
Chanakya Niti: महान शिक्षक, अर्थशास्त्री और कूटनीतिज्ञ चाणक्य अपनी खास नीतियों के लिए जाने जाते हैं. वह अपनी बुद्धिमत्ता और रणनीतिक कौशल के लिए जाने जाते थे. आचार्य चाणक्य की कई नीतियां आज के समय में भी प्रासंगिक हैं. उन्होंने अपनी नीतियों में मित्रों के बारे में बताया है. सच्चे मित्र के बारे में आचार्य चाणक्य के श्लोक के जरिए जान सकते हैं.
“आतुरे व्यसने प्राप्ते दुर्भिक्षे शत्रु-संकटे.
राजद्वारे श्मशाने च यस्तिष्ठति स बान्धवः॥”
आचार्य चाणक्य के इस श्लोक के जरिए सच्चे मित्र की पहचान के बारे में जान सकते हैं. मित्रता से जुड़ा एक प्रसिद्ध श्लोक सच्चे मित्र की पहचान के बारे में बताया है. आइये इसके बारे में विस्तार से जानते हैं कि, कौन लोग आपके सच्चे मित्र होते हैं और कौन लोग सिर्फ दिखावे के लिए आपके साथ होते हैं.
बीमारी में साथ – आप बीमार हैं या घर-परिवार में कोई सदस्य बीमारी से जूझ रहा है, ऐसे समय में साथ देने वाला ही सच्चा मित्र होता है. अगर ऐसे समय में कोई साथ छोड़ देता हैं तो वह सिर्फ दिखावे का मित्र है.
विपत्ति और संकट में साथ – आपके ऊपर कोई बड़ा संकट या विपत्ति आती है, ऐसे समय में साथ रहने वाला ही आपका सच्चा मित्र है. नौकरी जाने, व्यापार में नुकसान होने या जीवन में संकट के समय साथ देने वाला सच्चा दोस्त होता है.
आर्थिक तंगी में साथ – आप जीवन में किसी कारण से आर्थिक तंगी से परेशान हैं. इस समय में दोस्त आपका साथ छोड़ दें, तो वह सिर्फ दिखावे का मित्र है. असली दोस्त आपकी हर संभव मदद करेगा.
विरोध या लड़ाई में साथ – किसी से लड़ाई होने पर साथ देना वाला ही आपका दोस्त होता है. ऐसे समय में मुंह मोड़ लेने वाला आपका सच्चा दोस्त नहीं हो सकता है. आपका सच्चा मित्र शत्रु के सामने आपके साथ खड़ा रहेगा.
कानूनी परेशानी में साथ – अक्सर लोग कानूनी मामलों में उलझ जाते हैं. इस बुरे समय में सभी लोग साथ छोड़ देते हैं. लेकिन आपका सच्चा दोस्त इस समय में आपका साथ नहीं छोड़ेगा. जरूरत के समय वह हमेशा साथ खड़ा मिलेगा.
पारिवारिक पीड़ा में दे साथ – सच्चा मित्र सिर्फ आपका ही नहीं, बल्कि परिवार का भी साथ देता है. परिवार में किसी अनहोनी के होने या किसी की मृत्यु होने पर भी आपके साथ खड़ा रहता है. आचार्य चाणक्य के इस श्लोक के अनुसार, बुरे समय में दोस्त साथ नहीं देता है, तो वह सच्चा मित्र नहीं है.



