दिल्ली की एक अदालत ने वर्ष 2018 में हुए बीकॉम छात्र आयुष नौटियाल के अपहरण और हत्या के चर्चित मामले में आठ साल बाद अपना फैसला सुनाया है। अदालत ने दोषी इश्तियाक अली को उम्रकैद की सजा सुनाई है और उस पर अलगअलग धाराओं के तहत कुल 1.20 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यह मामला डेटिंग ऐप के माध्यम से उपजी दोस्ती और उसके बाद फिरौती के उद्देश्य से की गई क्रूर हत्या का है, जिसने राजधानी को झकझोर कर रख दिया था।

मामले की शुरुआत 22 मार्च 2018 को हुई थी, जब दिल्ली विश्वविद्यालय के रामलाल आनंद कॉलेज में बीकॉम तीसरे वर्ष के छात्र आयुष नौटियाल कॉलेज फेस्ट में शामिल होने की बात कहकर घर से निकले थे। शाम तक जब आयुष घर नहीं लौटे, तो उनके पिता दिनेश चंद्र को आयुष के ही नंबर से एक वॉट्सऐप मैसेज मिला। मैसेज में आयुष की आंखों पर पट्टी और बंधे हुए हाथोंपैरों की फोटो थी, जिसके साथ 50 लाख रुपये की फिरौती की मांग की गई थी। हत्यारे ने चेतावनी दी थी कि यदि बेटे को जीवित देखना चाहते हैं, तो पुलिस को सूचना न दें। हालांकि, परिवार ने मामले की गंभीरता को समझते हुए पुलिस को सूचित किया।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि आयुष की मुलाकात कुछ समय पहले एक डेटिंग ऐप के जरिए इश्तियाक अली से हुई थी। सीसीटीवी फुटेज में दोनों को घटना से पहले साथ देखा गया था, जिससे दोस्ती की पुष्टि हुई। जांच में यह सामने आया कि इश्तियाक ने आयुष को उत्तम नगर के रामा पार्क स्थित एक फ्लैट में बुलाया था। वहां उसने हथौड़े से हमला कर आयुष की हत्या कर दी। वारदात को अपहरण का रूप देने के लिए उसने मृतक के मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर परिवार को फिरौती के संदेश भेजे थे। इसके बाद आरोपी ने शव को पॉलीथिन में पैक किया और अपनी अल्टो कार से द्वारका सेक्टर13 के नाले में फेंक दिया। 28 मार्च 2018 को शव बरामद किया गया, जिसके बाद आयुष के पिता ने उसकी पहचान की।
पुलिस ने मामले को सुलझाने के लिए सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, डीएनए साक्ष्य, हत्या में प्रयुक्त हथौड़ा और जले हुए लैपटॉप के अवशेषों जैसे फॉरेंसिक सबूतों का सहारा लिया। अभियोजन पक्ष ने अपराध की क्रूरता को देखते हुए मौत की सजा की मांग की, जबकि बचाव पक्ष ने इश्तियाक के पूर्व में कोई आपराधिक रिकॉर्ड न होने और आठ साल तक चले मुकदमे का हवाला दिया। एडिशनल सेशन जज स्वाति गुप्ता की अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 364ए के तहत आजीवन कारावास और 5050 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। इसके अतिरिक्त, धारा 201 के तहत उसे चार साल की कठोर कारावास और 20 हजार रुपये के जुर्माने का भी सामना करना पड़ेगा।



