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​रूल ऑफ माफिया से रूल ऑफ लॉ तक… CM योगी बोले- बदली यूपी की छवि, अब निवेश के लिए बेहतर माहौल

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को राजधानी लखनऊ में डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने भारत के राजनीतिक और संवैधानिक इतिहास के प्रमुख क्षणों को याद किया, जिनमें 1975 में आपातकाल की घोषणा और अनुच्छेद 370 का निरसन शामिल है. इस दौरान सीएम ने मेधावियों को पदक दिए.

​रूल ऑफ माफिया से रूल ऑफ लॉ तक… CM योगी बोले- बदली यूपी की छवि, अब निवेश के लिए बेहतर माहौल

सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश ‘रूल ऑफ माफिया’ से मुक्त हुआ है और ‘रूल ऑफ लॉ’ लागू हुआ है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले कानूनव्यवस्था और निवेश को लेकर संदेह रहता था. माफिया से विकास बाधित था. सरकार ने कानून का शासन स्थापित कर प्रदेश की छवि बदली है.उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति या पद संविधान से ऊपर नहीं हो सकता. उन्होंने युवा अधिवक्ताओं से कहा कि अन्याय सामने हो तो चुप रहना विकल्प नहीं है. उन्होंने कहा कि फैसला इतिहास सुनाएगा, लेकिन बहस आपको करनी है.

‘आपातकाल ने समझाया कानून और शासक के शासन का अंतर’

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 अगस्त 1947 और 26 जनवरी 1950 के साथ 25 जून 1975 भी लोकतंत्र की महत्वपूर्ण तारीख है. आपातकाल ने ‘रूल ऑफ लॉ’ और ‘रूलर ऑफ लॉ’ का अंतर समझाया. न्यायमूर्ति एचआर खन्ना की असहमति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सिद्धांतों के पक्ष में लिया निर्णय इतिहास में स्थान बनाता है. उन्होंने कहा कि युवा अधिवक्ताओं को संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करनी चाहिए.

‘सत्यं वद, धर्मं चर को हृदय में उतारें’

सीएम योगी ने कहा कि ‘सत्यं वद, धर्मं चर, स्वाध्यायान्मा प्रमदः’ को चैंबर की दीवार पर नहीं, हृदय में उतारें. उन्होंने कहा कि सत्य और निरंतर अध्ययन अधिवक्ता के जीवन का आधार हो. डॉ. लोहिया के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विधिवेत्ता में शिव जैसा मस्तिष्क, कृष्ण जैसा हृदय और राम जैसा वचन होना चाहिए.

‘विकसित भारत की पैरवी करें युवा अधिवक्ता’

मुख्यमंत्री ने विकसित भारत की परिकल्पना को मुकदमे के रूप में प्रस्तुत किया. उन्होंने कहा कि 140 करोड़ देशवासियों के इस दावे की पैरवी तथ्यों, साक्ष्यों और ईमानदारी से करनी होगी. उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प में युवा अधिवक्ताओं की भूमिका होगी. उन्होंने कहा कि प्रदेश को 202930 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की कार्ययोजना तैयार है.

‘एआई को सहायक बनाएं, सारथी नहीं’

सीएम योगी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता काम आसान कर सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय इंसान के विवेक से होना चाहिए. उन्होंने कहा कि लापरवाह मसौदे से निर्दोष व्यक्ति को स्वतंत्रता गंवानी पड़ सकती है. उन्होंने कहा कि डीपफेक और साइबर अपराधों ने साक्ष्यों की विश्वसनीयता की चुनौती पैदा की है. उन्होंने कहा कि प्रदेश के 75 जिलों में साइबर थाने और 1,583 थानों में साइबर हेल्प डेस्क हैं. उन्होंने कहा कि ‘एआई प्रज्ञा’ से 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है.

‘अधिवक्ता की सबसे बड़ी पूंजी उसकी साख’

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को अन्याय के खिलाफ खड़े होने, जड़ों से जुड़े रहने और निरंतर अध्ययन की सीख दी. उन्होंने कहा कि गांवों में जमीन और पारिवारिक विवादों के समाधान में योगदान दें. गलत काम का दबाव आए तो सिद्धांतों से समझौता न करें.

सीएम ने कहा कि सत्य बोलना,धर्म का आचरण करना, स्वाध्याय में कभी प्रमाद न करना किसी भी अधिवक्ता के लिए इससे छोटा जॉब डिस्क्रिप्शन नही हो सकता. उन्होंने कहा कि यही भारत का पहला दीक्षांत उद्बोधन भी है. उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र गाउन तो नया पहने होंगे,लेकिन भारत का ये दीक्षांत उपदेश हजारों वर्ष का है,हज़ारों वर्षो से हमारे गुरुकुल और विश्विद्यालय इस दीक्षांत उपदेश अपने जीवन का हिस्सा बनाते रहे हैं.

‘इतिहास कैसे करवट लेता है, मैं देख रहा था’

उन्होंने कहा कि यह वही उत्तरप्रदेश है, जिस उत्तर प्रदेश के उच्च न्यायालय ने 12 जून को भारत के सबसे ताकतवर कुर्सी पर बैठे व्यक्ति के चुनाव को रद्द कर दिया था. इसके ठीक 13 दिन बाद प्रतिक्रिया में देश में आपातकाल लागू हुआ. उन्होंने कहा कि इतिहास कैसे करवट लेता है, मैं देख रहा था, उस समय जिस जस्टिस हंसराज खन्ना ने असहमति दी थी, उन्हें उसकी कीमत चुकानी पड़ी थी,लेकिन इतिहास व्यर्थ नही जाता. हाल ही में आपने देखा होगा कि 2017 में उच्चतम न्यायालय ने उसी असहमति को सही माना. उन्होंने कहा कि 1975 ने देश को सिखाया “रूल ऑफ लॉ,और रूलर ऑफ लॉ ” में क्या फर्क होता है, ये 1975 का सबक है देश के लिए. 2017 में फिर से असहमति को सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि जस्टिस खन्ना सही थे.

‘लोगों के मन में बात घर कर चुकी थी कि यूपी नहीं सुधरेगा’

सीएम योगी ने कहा कि आज से 10 वर्ष पहले कोई यूपी के बारे में कहता कि कोई निवेश करे, तो लोग कहते थे कि मूर्ख व्यक्ति है,जहां व्यक्ति की सुरक्षा नहीं है,निवेश की सुरक्षा की बात करते हैं,कनेक्टिविटी नहीं है और एक्सपोर्ट की बात करते हैं, कोई पॉलिसी नहीं है और निवेश को इंसेंटिव देने की बात करते हैं. लोगों ने हमें बीमारू राज्यों की श्रेणी में खड़ा कर दिया था,संसद में मैं देखता था कि लोगों के मन में बात घर कर चुकी थी कि यूपी नहीं सुधरेगा.

‘प्रदेश में रूल ऑफ लॉ का शासन’

उन्होंने कहा कि पहले उत्तरप्रदेश में “रूल ऑफ माफिया” था. हमने लॉ की किताब से उसे बाहर निकाल कर प्रदेश में रूल ऑफ लॉ का शासन ईमानदारी से लागू किया तब हम यह परिवर्तन लाने में सफल हुए. उन्होंने कहा कि प्रयागराज में एक माफिया था,वो जिस जमीन पर पैर रख देता था,वह जमीन उसकी होती थी, उसपर कोई कानून नही लागू होता था.कोई मुख्यमंत्री, गवर्नर,हाईकोर्ट जस्टिस जाते थे तो उस माफिया के लिए इनके काफिले रुक जाते थे,पहले उस माफिया को पास कराया जाता था.

सीएम ने कहा कि उस रूल ऑफ माफिया”से यूपी मुक्त हुआ है. “रूल ऑफ लॉ” सही मायने में यूपी में लागू हुआ है, “रूल ऑफ लॉ” यूपी को बीमारू राज्य से उभरकर भारत के टॉप 3 इकोनॉमी में खड़े हैं. उन्होंने कहा कि यूपी में अब माफिया का नहीं, कानून का राज है.

‘दूसरों के जीवन में बदलाव से तय होगी सफलता’

लोहिया विधि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि उपाधि मंजिल नहीं, नई यात्रा की शुरुआत है. उन्होंने कहा कि शिक्षा की वास्तविक परीक्षा विश्वविद्यालय से बाहर शुरू होती है. सफलता का आकलन इससे होगा कि विद्यार्थी दूसरों के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव लाते हैं. उन्होंने संवैधानिक मूल्यों, करुणा और संवेदनशीलता को जीवन में उतारने का आह्वान किया।

‘कानून के शासन को मजबूत करें विद्यार्थी’

हीं इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली ने कहा कि विधि शिक्षा में विश्वविद्यालय का विशेष स्थान है. संस्थान ने न्यायपालिका, विधि शिक्षा और लोकसेवा में योगदान दिया है. उन्होंने विश्वास जताया कि विद्यार्थी उच्च मानकों और परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए कानून का शासन मजबूत करेंगे.

’20 वर्षों में 250 से अधिक न्यायिक अधिकारी दिए’

इस मौके पर कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय ने 20 वर्षों में उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों की न्यायिक सेवाओं को 250 से अधिक अधिकारी दिए हैं. यहां से शिक्षित विधि विशेषज्ञ विभिन्न क्षेत्रों में योगदान दे रहे हैं. विधि शिक्षा केवल भौतिक सफलता नहीं, समाज सेवा का माध्यम भी है। इसका उपयोग वंचित वर्गों के कल्याण में हो.

रुपाली और तेजस्वनी को स्वर्ण पदक

एलएलएम में रुपाली जायसवाल को स्वर्ण, चित्रा सिंह को रजत और सौम्या गिरी को कांस्य पदक मिला. वहीं एलएलबी ऑनर्स में तेजस्वनी कौशल को स्वर्ण, ईशा अग्रवाल को रजत और निशा वर्मा को कांस्य पदक मिला.

ईशा अग्रवाल को तीन प्रायोजित स्वर्ण पदक

ईशा अग्रवाल को क्रिमिनल लॉ में जस्टिस ओपी प्रधान मेमोरियल, कॉन्स्टिट्यूशनल लॉ में पद्मावती मोहनलाल जरीवाला और स्टूडेंट ऑफ द ईयर के लिए वीरेंद्र भाटिया स्वर्ण पदक मिला. तान्या वर्मा को टैक्सेशन में प्रदीप कुमार अग्रवाल मेमोरियल और मालविका पचौरी को सर्वश्रेष्ठ मूटिंग के लिए केके लूथरा मेमोरियल स्वर्ण पदक मिला.

डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के मेधावी भी सम्मानित

साइबर लॉ में भास्कर पांडे, जयंत अग्रवाल और चिराग निगम को क्रमशः स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक मिला. बौद्धिक संपदा अधिकार में आशी पांडे, रितेश मेहता और ईशा अस्थाना को क्रमशः स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक मिले। मीडिया लॉ में अंशुमान सिंह को स्वर्ण और संतुष्ट सोनकर को रजत पदक मिला.

कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद

समारोह में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली, उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह, विभागाध्यक्ष प्रो. मनीष सिंह और कुलसचिव केशव कुमार सहित न्यायमूर्तिगण, शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक उपस्थित रहे.

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