Satya Report: 22 अप्रैल, 2025 … जम्मू-कश्मीर के पहलगाम के पास बैसरन घाटी में सब कुछ रोज की तरह था. पर्यटक खूबसूरत नजारों का लुत्फ उठा रहे होते हैं. घाटी में हंसी ठिठोली चल रही होती है, लेकिन उसके बाद एक लम्हे में सब कुछ बदल गया. खुशिया मातम में बदल गई. हंसी ठिठोली चीख पुकार में तब्दील हो गई. आतंकियों ने 26 निर्दोष लोगों को उनके परिवार के सामने गोली मार दी.

आतंकियों ने नाम/धर्म पूछे, कुछ लोगों को कलमा पढ़ने के लिए मजबूर किया.और गैर-मुसलमानों (जिनमें ज्यादातर हिंदू, एक ईसाई और एक नेपाली शामिल थे) उन्हें को गोली मार दी. एक स्थानीय मुस्लिम टट्टू चालक भी बीच-बचाव करने की कोशिश में शहीद हो गया. आज वही 22 अप्रैल है. इस घटना को पूरा एक साल हो गया है, लेकिन इस खौफनाक मंजर की यादें आज भी लोगों के जहन में हैं. चलिए आपको बताते हैं उन 26 लोगों के बारे में जिन्होंने इस हमले में अपनी जान गंवाई.
सुशील नथानियल
सुशील नथानियल (Sushil Nathaniel) इंदौर के निवासी थे, जिनकी 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में मौत हो गई थी. 58 साल के सुशील ईस्टर मनाने के लिए अपने परिवार के साथ इंदौर से कश्मीर आए थे. जब वो बैसरन घाटी में अपने परिवार के साथ मस्ती कर रहे थे तभी वहां आतंकी आ गए और उनसे कलमा पढ़ने को कहा. उन्होंने बताया कि वो ईसाई हैं और उन्हें कलमा नहीं आता. इतना बोलते ही आतंकियों ने उन्हें गोली मारकर हमेशा के लिए खामोश कर दिया. इस अफरा-तफरी में उनकी बेटी आकांक्षा के पैर में चोट आई. परिवार ने उन्हें एक समर्पित पिता बताया जो अपने धर्म में अडिग थे. उनकी पत्नी ने इस भयावह घटना को अपनी आंखों से देखा और बताया कि हमलावरों ने शवों के साथ सेल्फी भी लीं.
सैयद आदिल हुसैन शाह
अनंतनाग के हापत नार गांव के रहने वाले सैयद आदिल हुसैन शाह एक स्थानीय मुस्लिम थे. वो बैसरन मैदान में पर्यटकों को ले जाकर करीब 300 रुपए प्रतिदिन कमाते थे. अपने बुजुर्ग माता-पिता, पत्नी और बच्चों के इकलौते कमाने वाले आदिल ने हमले के दौरान बहादुरी दिखाते हुए पर्यटकों की रक्षा के लिए एक आतंकवादी की राइफल छीनने की कोशिश की. इस दौरान उन्हें कई गोलियां लगीं और उनकी मौत हो गई. उनकी बहादुरी ने कई लोगों की जान बचाई. आदिल के चचेरे भाई नजाकत ने भी पर्यटकों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में मदद की. आदिल को एक मेहनती और निस्वार्थ शख्स के रूप में याद किया जाता है. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उनके परिवार से मुलाकात कर परिवार की मदद की.
हेमंत सुहास जोशी
हेमंत सुहास जोशी मुंबई के डोंबिवली में रहते थे. वो एक निजी कंपनी में काम करते थे और अपनी पत्नी मोनिका और बेटे ध्रुव के साथ रहते थे. यात्रा से पहले उन्होंने अपने पिता की देखभाल का इंतजाम किया था. वो डोंबिवली के एक ही मोहल्ले के तीन मामा के बच्चों में से एक थे, जो छह अन्य रिश्तेदारों (कुल नौ लोग) के साथ पारिवारिक अवकाश पर गए थे. आतंकियों ने उन्हें भी गोली मार दी. हेमंत ने सुबह परिवार को संदेश भेजा और कुछ घंटों बाद ही उनकी मौत की खबर आई, जिससे परिवार सदमे में आ गया. वहीं परिवार का एक सदस्य घायल हो गया.
विनय नरवाल
हरियाणा के रहने वाले 26 साल के भारतीय नौसेना के लेफ्टिनेंट विनय नरवाल ने 16 अप्रैल को हिमांशी से शादी की थी. यह जोड़ा कश्मीर में हनीमून पर था. घास के मैदान में भेलपुरी खाते हुए, आतंकवादियों ने उन्हें सिर में बेहद करीब से गोली मार दी. इस दौरान उनकी पत्नी बच गईं. उनकी तस्वीर इस त्रासदी की प्रतीक बन गईं. उस तस्वीर ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया था. विनय 2022 में नौसेना में शामिल हुए थे और उन्हें एक होनहार युवा अधिकारी के रूप में याद किया जाता है. उनके परिवार, जिनमें उनके पिता हवा सिंह नरवाल भी शामिल हैं, आज बी गहरे शोक में डूबे हुए हैं. वहीं पत्नी हिमांशी ने बाद में सांप्रदायिक हिंसा के खिलाफ अपील करते हुए शांति पर जोर दिया.
अतुल श्रीकांत मोनी
रेलवे में नौकरी करने वाले अतुल श्रीकांत मोनी पत्नी अनुष्का और बेटी रुचा के साथ डोंबिवली पश्चिम में रहते थे. वो परिवार के साथ घूमने के लिए कश्मीर गए थे, जहां से वो जिंदा वापस नहीं आ सके. उनके साथ उनके दो मामा के बेटे हेमंत सुहास जोशी और संजय लक्ष्मण लेले भी थे. अतुल का परिवार उस संयुक्त समूह के नौ सदस्यों में शामिल था जो इस हादसे की चपेट में आया. इस हादले में उनके परिवार का एक सदस्य घायल हो गया था. घटना के बाद पूरे डोंबिवली में मातम छा गया था.
नीरज उधवानी
राजस्थान के जयपुर में रहने वाले 33 साल के नीरज उधवानी दुबई में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट थे. वो एक शादी में शामिल होने के बाद अपनी पत्नी के साथ कश्मीर गए थे. रिपोर्ट के मुताबिक नीरज से एक आतंकी ने उनका आईडी कार्ड दिखाने को कहा. इसके बाद उन्हें गोली मार दी. इस घटना से उनकी पत्नी और पूरा परिवार सदमे में आ गया.
36 साल के इंजीनियर बितान अधिकारी अमेरिका में काम करते थे . वो छुट्टी पर अपने गृहनगर पटुली, कोलकाता आए थे.
इसी दौरान वो अपनी पत्नी और 3 साल के बेटे के साथ छुट्टियां मनाने कश्मीर गए आए थे. आतंकवादियों ने उनके बेटे के सामने उन्हें गोली मार दी थी.
पहलगाम में हुए आतंकी हमले में नेपाल के लुंबिनी प्रदेश में रहने वाले सुदीप न्यूपाने की भी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. 27 साल के सुदीप अपनी मां, बहन और बहनोई के साथ कश्मीर में पारिवारिक अवकाश पर गए थे. पीड़ितों में वो नेपाल के एकमात्र विदेशी पर्यटक थे. रिपोर्ट के मुताबिक आतंकियों ने सुदीप की बढ़ी हुई दाढ़ी देख कर उन्हें अल्लाह का नाम लेने के लिए बोला लेकिन सुदीप ने ऐसा नहीं किया. इसके बाद उन्हें गोली मार दी गई.
शुभम द्विवेदी
उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले 30 साल के शुभम द्विवेदी की नई-नई शादी हुई थी. वो अपनी पत्नी ऐशन्या पर पांडे के साथ हनीमून पर गए थे. खबरों के अनुसार आतंकियों ने सबसे पहले शुभम को निशाना बनाया था. घास के मैदान में खाना खाते समय उन्हें गोली मार दी गई थी.
प्रशांत कुमार सतपथी
ओडिशा के बालासोर के रहने वाले 41 साल के प्रशांत कुमार सतपथी अपनी पत्नी प्रियदर्शनी और बेटे के साथ पारिवारिक अवकाश यात्रा पर थे. वो या घास के मैदान में आनंद ले रहे थे, तभी उन्हें गोली लग गई. इस घटना से उनका पूरा परिवार सदमे में चला गया.
मनीष रंजन
पश्चिम बंगाल के पुरुलिया के रहने वाले मनीष रंजन हैदराबाद में सेक्शन ऑफिसर के रूप में कार्यरत थे. मनीष पनी पत्नी और बच्चों के साथ पारिवारिक तीर्थयात्रा पर थे. आतंकियों ने उन्हें गोली मार दी. वहीं उनकी पत्नी और बच्चे बच गए. पति और पिता को खोने का दर्द आज भी उनकी आखों में नजर आता है.
एन. रामचंद्र
केरल के रहने वाले मनीष रंजन कुछ समय पहले ही खाड़ी देशों से लौटे थे. वो 65 साल के एन. रामचंद्र अपनी पत्नी, बेटी और पोते-पोतियों के साथ कश्मीर छुट्टियां मनाने गए थे. इसा दौरान आतंकियों की गोली का शिकार बन गए. उनकी मृत्यु से पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई. आज भी परिवार के लोग उन्हें यादकर भावुक हो जाते हैं.
संजय लक्ष्मण लाली
महाराष्ट्र के डोंबिवली में रहने वाले संजय लक्ष्मण लाली अपने पूरे परिवार के साथ कश्मीर गए थे. इस दौरान उनकी और उनके दो मामा के बेटों, अतुल श्रीकांत मोने और हेमंत सुहास जोशी की हत्या कर दी गई. वहीं संजय के बेटे को हाथ में गोली लगी. बताया जाता है कि तीनो कजिन भाइयों में बचपन से ही काफी प्यार था. उनके परिवार (पत्नियां और बच्चे) भी यात्रा दल का हिस्सा थे, लेकिन वो बच गए.
दिनेश अग्रवाल
दिनेश अग्रवाल छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक व्यवसायी थे. दिनेश अपनी पत्नी के साथ शादी की सालगिरह मनाने कश्मीर गए थे. लेकिन उनकी ये सालगिरह आखिरी बन गई. उनकी मौत ने उत्सव को त्रासदी में बदल दिया. उनकी पत्नी आज भा इस सदमे से उबर नहीं पाई.
समीर गुहा
कोलकाता में सांख्यिकी मंत्रालय में कार्यरत समीर गुहा अपनी पत्नी सबरी और बेटी सुभांगी के साथ पारिवारिक अवकाश पर कश्मीर गए थे. वो 16 अप्रैल को पहुंचे थे. समीर की हत्या उनकी पत्नी और बेटी के सामने कर दी गई.
दिलीप देसाले
महाराष्ट्र के पनवेल निवासी दिलीप देसाले पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए थे. दिलीप परिवार के साथ दर्शनीय स्थलों की यात्रा पर गए थे. तभी उन्हें आतंकियों ने गोली मार दी. दिलीप देसाले को उनके पैतृक गांव पनवेल में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई थी.
जे. सचन्द्र मोली
आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम के रहने वाले जे. सचन्द्र मोली 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में मारे गए थे. 68 साल के सेवानिवृत्त कर्मचारी चंद्रमौली अपनी पत्नी और चार अन्य लोगों के साथ छुट्टी पर थे. वे अपने समूह से अलग हो गए; घंटों बाद उनका गोलियों से छलनी शव मिला. बताया जाता है कि वो कश्मीर जाने के लिए काफी उत्साहित थे.
मधुसूदन सोमिसेट्टी
बेंगलुरु के मधुसूदन सोमिसेट्टी के लिए एक पारिवारिक छुट्टी शांति की जगह त्रासदी बन गई. पहलगाम आतंकी हमले में वो बेरहमी से मार दिए गए. मधुसूदन परिवार के साथ छुट्टी पर थे.
संतोष जगदाले
महाराष्ट्र के पुणे में रहने वाले जान गंवाने वाले संतोष जगदाले एक व्यवसायी थे वो अपनी पत्नी और बेटी के साथ पारिवारिक यात्रा पर थे. खबरों के अनुसार, जब उनसे कलमा सुनाने के लिए कहा गया लेकिन वो ऐसा नहीं कर पाए, जिसके बाद उन्हें परिवार के सामने गोली मार दी गई.
मंजूनाथ राव
कर्नाटक के शिवमोग्गा के रहने वाले रियल एस्टेट व्यवसायी मंजूनाथ राव की 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक आतंकवादी हमले में जान चली गई थी. वह अपने परिवार के साथ छुट्टी मनाने गए थे. यह दुखद घटना बैसरन घाटी में हुई, जिसमें कई अन्य पर्यटकों के साथ उन्हें निशाना बनाया गया. उनकी पत्नी पल्लवी ने हमलावरों का सामना करते हुए उनसे कहा कि वो उन्हें भी गोली मार दें. बताया जाता है कि उनमें से एक ने इनकार कर दिया था.
कौस्तुभ गणबोटे
महाराष्ट्र के पुणे के रहने वाले कौस्तुभ गणबोटे अपनी पत्नी संगीता के साथ छुट्टी घूमने के लिए कश्मीर गए थे. जहां आतंकियों ने उनकी पत्नी के सामने उन्हें गोली मारकर हत्या कर दी. संगीता का कहना है जो हमला हुआ था वह बहुत खतरनाक था और वो उसको मरते दम तक नहीं भूल पाएंगी.
भरत भूषण
बेंगलुरु के रहने वाले 35 साल के भरत भूषण पनी पत्नी और छोटे बेटे के साथ पारिवारिक अवकाश पर थे. घटना के समय वो परिवार के साथ मस्ती कर रहे थे. तभी आतंकियों ने उन्हें अपना निशाना बनाया और उन्हें गोली मार दी. .
सुमित परमार
गुजरात के भावनगर में रहने वाले 17 साल के सुमित परमार एक छात्र थे. वो अपने पिता यतीश परमार के साथ श्मीर में मोरारी बापू के धार्मिक प्रवचन में शामिल होने के लिए गए थे. उनके साथ लगभग 20 लोग और भी थे. आतंकियों ने सुमित और उसके पिता की हत्या कर दी थी. मित पीड़ितों में सबसे कम उम्र का था.
यतीश परमार
45 साल के यतीश परमार एक हेयर सैलून के मालिक थे. वो अपने बेटे सुमित परमार के साथ आध्यात्मिक यात्रा पर थे. आतंकी हमले में यतीश और सुमित दोनों की एक साथ मौत हो गई. वहीं परिवार के अन्य सदस्यों में कुथ जख्मी भी हो गए.
तागे हैल्यांग
भारतीय वायु सेना में कॉर्पोरल रहे तागे हैल्यांग अरुणाचल प्रदेश के रहने वाले थे. तागे अपनी पत्नी के साथ छुट्टी पर कश्मीर गए थे. उनकी नई-नई शादी हुई थी. वो बैरसन में घूम रहे थे तभी उन्हें आतंकियों ने गोली मार दी.
शैलेश कलाथिया
सूरत के रहने वाले शैलेश कलाथिया मुंबई में काम करते थे. 44 साल के शैलेश अपनी पत्नी शीतलबेन, बेटे नक्ष और बड़ी बेटी नीति के साथ कश्मीर में छुट्टियां मना रहे थे. इसी दौरान परिवार के सामने उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई. उनका परिवार आज भी उस घटना को यादकर सिहर उठता है.



