
Ganesh Chaturthi 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी पूरे देश में धूमधाम से मनाई जाती है। वैसे हो हर मास की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी पड़ती है लेकिन भादो मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि काफी खास है, क्योंकि इस दिन से 10 दिनों का गणेश उत्सव आरंभ हो जाता है। इस दौरान गणपति बप्पा की मूर्ति को विधि-विधान से घर और पंडालों में स्थापित करते हैं। इसके साथ ही अनंत चतुर्दशी के साथ बप्पा को अगले वर्ष आने की कामना करते हुए जल में प्रवाहित किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश उत्सव के दौरान प्रथम पूज्य की पूजा करने से सुख, समृद्धि, सौभाग्य और शांति का वास होता है। भगवान गणेश अत्यंत सहज और सरलता से प्रसन्न होने वाले देवता हैं। अगर आप भी गणेश जी की पूजा कर रहे हैं, तो कुछ चीजों को उन्हें अर्पित करने की मनाही होती है। इस साल गणेश उत्सव 14 सितंबर 2026, सोमवार से आरंभ हो रहा है। आइए जानते हैं गणेश उत्सव के दौरान गणपति बप्पा को किन चीजों को चढ़ाने की मनाही होती है…
गणेश जी को न चढ़ाएं तुलसी
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,गणेश जी को तुलसी दल चढ़ाने की मनाही होती है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा प्रचलित है। इसके अनुसार एक बार देवी तुलसी ने भगवान गणेश को अपने पति के रूप में पाने की प्रबल इच्छा प्रकट की और उनसे विवाह का प्रस्ताव रखा। किंतु गणपति बप्पा ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। क्रोध और आक्रोश में आकर तुलसी जी ने भगवान गणेश को श्राप दे दिया कि उनका दो विवाह होंगे। इस श्राप को सुनकर गणेश जी भी क्रोधित हो उठे। उन्होंने प्रतिश्राप देते हुए कहा कि, “हे तुलसी! तुम्हें भी राक्षस से विवाह करना होगा और मेरी पूजा में तुम्हारा उपयोग कभी नहीं किया जाएगा। इसी के कारण तुलसी का इस्तेमाल गणेश जी की पूजा में नहीं किया जाता है।
केतकी का फूल
शंकर जी के अलावा गणेश जी को भी केतकी का फूल चढ़ाने की मनाही होती है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी में कौन श्रेष्ठ है? इस बात को लेकर युद्ध हो रहा था। तब शिव जी ने एक रास्ता निकाला था। लेकिन केतकी के फूल के साथ मिलकर ब्रह्मा जी ने छल करना चहा। भगवान शिव ने ब्रह्मा जी के इस छल को समझ लिया और अत्यंत क्रोधित हुए। तभी उन्होंने केतकी के फूल को श्राप दिया कि अब से उनकी पूजा में यह फूल स्वीकार नहीं किया जाएगा। चूंकि भगवान गणेश, भगवान शिव के पुत्र हैं, इसलिए गणेश पूजा में भी केतकी के फूल को अर्पित करना वर्जित माना गया है।
टूटा हुआ चावल
भगवान गणेश को अर्पित किए जाने वाले चावल यानी अक्षत चढ़ाते समय थोड़ा ध्यान रखने की जरूरत है। कभी भी गणेश जी को टूटा हुआ चावल नहीं चढ़ाना चाहिए, क्योंकि यह अपूर्णता और विघ्न का संकेत देता है।
गणेश जी को न चढ़ाएं सफेद चीजें
पौराणिक कथाओं के अनुसार, चंद्रदेव अपनी सुंदरता और तेज के लिए प्रसिद्ध थे। वे स्वयं को ब्रह्मांड का सबसे सुंदर और मनोहर मानते थे। इस बात का उन्हें काफी अहंकार था। ऐसे में उन्होंने एक बार गणेश जी का मजाक उड़ा दिया। भगवान गणेश ने चंद्रमा के इस व्यवहार से रुष्ट होकर उन्हें श्राप दे दिया कि आज से जो भी तुम्हारा दर्शन करेगा, वह कलंकित होगा। उसे समाज में अपमान और बदनामी का सामना करना पड़ेगा। यही कारण है कि गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन करना निषिद्ध माना गया है। इसके अलावा चंद्रमा का रंग सफेद है। ऐसे में सफेद रंग की वस्तुएं गणेश जी को नहीं चढ़ाई जाती है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों, संप्रदायों और परिवारों में पूजा-पद्धति एवं मान्यताओं में अंतर हो सकता है। इसलिए यहां बताई गई बातों को अंतिम या सर्वमान्य धार्मिक नियम न माना जाए। पूजा के दौरान अपने परिवार की परंपरा अथवा स्थानीय विद्वान/पंडित की सलाह को प्राथमिकता दें।


