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खेती-किसानी पर सरकार का बड़ा दांव! इस साल 20% बढ़ सकता है खाद सब्सिडी का बोझ, जानें खजाने पर क्या होगा असर

Satya Report: जियो पॉलिटिकल टेंशन की वजह से खाद सप्लाई में काफी दिक्कतें आ रही हैं. जिसकी वजह से कीमतों में भी इजाफा देखने को मिला है. ऐसे में सरकार मौजूदा साल में खाद सब्सिडी में इजाफा कर सकती है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार खाद मंत्रालय की अधिकारी अपर्णा शर्मा ने सोमवार को बताया कि भारत को उम्मीद है कि मौजूदा वित्त वर्ष में उसका खाद सब्सिडी बिल लगभग 20 फीसदी बढ़ जाएगा. इसकी वजह मिडिल ईस्ट संकट के कारण कीमतों में हुई बढ़ोतरी है. यूरिया का दुनिया का सबसे बड़ा आयातक भारत, इस खाद की रिकॉर्ड 2.5 मिलियन मीट्रिक टन मात्रा आयात करने के ऑर्डर दे चुका है. यह आयात लगभग दोगुनी कीमत पर किया जा रहा है, जबकि दो महीने पहले इसकी कीमत आधी थी. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि ईरान संघर्ष के कारण ग्लोबल सप्लाई बाधित हुई है और कीमतें बढ़ गई हैं.

खेती-किसानी पर सरकार का बड़ा दांव! इस साल 20% बढ़ सकता है खाद सब्सिडी का बोझ, जानें खजाने पर क्या होगा असर
खेती-किसानी पर सरकार का बड़ा दांव! इस साल 20% बढ़ सकता है खाद सब्सिडी का बोझ, जानें खजाने पर क्या होगा असर

क्यों बढ़ सकती है खाद सब्सिडी?

ये रिकॉर्ड खरीद, जो भारत के सालाना आयात का लगभग एकचौथाई है, ग्लोबल सप्लाई को और सीमित कर सकती है और कीमतों को और ऊपर धकेल सकती है. इससे भविष्य में नई दिल्ली के लिए आयात लागत और बढ़ सकती है. बढ़ती आयात लागत के कारण भारत की खाद सब्सिडी में भी बढ़ोतरी होने की संभावना है. यह सब्सिडी उन कंपनियों को दी जाती है जो किसानों को बाजार मूल्य से कम कीमत पर फसलों के लिए पोषक तत्व बेचती हैं. पिछले मार्च के अंत तक समाप्त हुए वित्त वर्ष के लिए भारत की खाद सब्सिडी का अनुमान लगभग 1.87 ट्रिलियन रुपए लगाया गया है.

सऊदी अरब और ओमान है सबसे बड़े सप्लायर

भारत यूरिया, डायअमोनियम फॉस्फेट और म्यूरिएट ऑफ पोटाश जैसे खादों के साथसाथ लिक्विफाइड नेचुरल गैस का भी आयात करता है. LNG यूरिया प्रोडक्शन के लिए एक प्रमुख कच्चा माल है. भारत के DAP और यूरिया इंपोर्ट का लगभग आधा हिस्सा मिडिल ईस्ट से आता है. इनमें सऊदी अरब DAP का सबसे बड़ा सप्लायर है, जबकि ओमान यूरिया का सबसे बड़ा सप्लायर है. भारत के पास उर्वरकों का पर्याप्त भंडार मौजूद है, लेकिन जून और जुलाई के महीनों में इनकी मांग में भारी उछाल आ जाता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इस दौरान किसान चावल, मक्का, कपास और तिलहन जैसी फसलों की बुवाई शुरू करते हैं.

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