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ग्रेटर नोएडा स्लीपर बस अग्निकांड: 19 चालान के बावजूद सड़क पर दौड़ती रही बस, छह राज्यों से जुड़े दस्तावेज; नौ लोगों की मौत

ग्रेटर नोएडा स्लीपर बस अग्निकांड: 19 चालान के बावजूद सड़क पर दौड़ती रही बस, छह राज्यों से जुड़े दस्तावेज; नौ लोगों की मौत

ग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की मौत के बाद बस के संचालन और दस्तावेजों को लेकर कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि बस के खिलाफ करीब 1.75 लाख रुपये के 19 चालान दर्ज थे। इनमें कम उम्र के चालक से बस चलाने, फ्यूल चेंज, रेट्रोफिटिंग और परमिट से जुड़े नियमों के उल्लंघन के मामले भी शामिल थे। इसके बावजूद बस का संचालन जारी रहा।

बस की तकनीकी जांच में उसकी ऊंचाई निर्धारित मानक से अधिक पाई गई। बस की ऊंचाई 4.1 मीटर थी, जबकि निर्धारित अधिकतम ऊंचाई 3.8 मीटर है। इसके अलावा बस के दस्तावेजों की पड़ताल में भी कई राज्यों का कनेक्शन सामने आया है। बस का पंजीकरण बिहार के मधुबनी में हुआ था, जबकि उसका फिटनेस प्रमाणपत्र राजस्थान और प्रदूषण प्रमाणपत्र हरियाणा से जारी हुआ था। बस का मालिक मध्य प्रदेश के छतरपुर का रहने वाला बताया गया है और इसका संचालन दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा के बीच किया जा रहा था।

जांच में यह भी सामने आया कि जनवरी 2026 में कम उम्र के चालक से बस चलवाने के मामले में चालान किया गया था। जून 2025 में फ्यूल चेंज और रेट्रोफिटिंग से जुड़े नियमों के उल्लंघन पर भी कार्रवाई हुई थी। बस के परमिट को लेकर भी पहले चालान किए जा चुके थे। इसके बावजूद बस सड़क पर चलती रही।

हादसे से पहले बस के इंजन से असामान्य आवाज आने की शिकायतों का भी जिक्र सामने आया है। यात्रियों के अनुसार, आग लगने से पहले बस में जलने जैसी गंध महसूस हुई थी। पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक यात्रियों ने चालक और परिचालक को इसकी जानकारी दी थी, लेकिन बस को रोककर जांच नहीं की गई। कुछ देर बाद चालक की सीट के पास से आग की लपटें निकलने लगीं और आग तेजी से फैल गई।

घटना के समय बस में करीब 30 से 35 यात्री सवार बताए गए हैं। आग लगने के बाद कई यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि नौ यात्रियों की मौत हो गई। पुलिस ने मामले में चालक और परिचालक समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है और बस के फिटनेस, परमिट तथा अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि बस के खिलाफ लगातार नियम उल्लंघन के मामले और 19 चालान दर्ज होने के बावजूद उसका संचालन क्यों जारी रहा। बस की तकनीकी स्थिति, दस्तावेजों और अलग-अलग राज्यों से जारी प्रमाणपत्रों की जांच के आधार पर अब जिम्मेदारी तय किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

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