BusinessIndia

₹401 करोड़ के GST का गोलमाल! CAG की ऑडिट रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, विभाग ने मानी चूक

कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ने वर्क्स कांट्रैक्ट और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में 401.42 करोड़ रुपए से जुड़े जीएसटी नॉन कंप्लायंस के 1,334 केसों का पता लगाया है. सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्स एंड कस्टम ड्यूटीज यानी सीबीआईसी ने इनमें से 903 केसों में 268.36 करोड़ रुपए की टिप्पणियों को स्वीकार कर लिया है और अब तक 15.88 करोड़ रुपए की वसूली की है.

₹401 करोड़ के GST का गोलमाल! CAG की ऑडिट रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, विभाग ने मानी चूक

कैग ने रेवेन्यू डिपार्टमेंट पर अपनी रिपोर्ट में, जिसे बुधवार को संसद में पेश किया गया, इन निष्कर्षों पर प्रकाश डाला है. कैग ऑडिटर्स ने 850 टैक्सपेयर्स और 71 जीएसटी डिपार्टमेंट ऑफिसेस के जीएसटी रिटर्न और संबंधित रिकॉर्ड की जांच की. इस चेक में शामिल मुख्य अवधि 202021 और 202122 थी. हालांकि, इनमें से कुछ विभागों में, ऑडिटर्स ने बाद के वर्षों 202324 तक पर भी नजर डाली, यह देखने के लिए कि क्या वही समस्याएं जारी रहीं.

मुख्य समस्याओं में सड़कों, पुलों, रेलवे और मिट्टी के काम के कांट्रैक्ट्स पर रियायती दरों या छूट के गलत दावे, सरकारी बॉडीज के लिए किए गए कामों पर टैक्स का कम भुगतान, बिल्डर्स और डेवलपर्स द्वारा रिवर्स चार्ज के तहत कम भुगतान, चालू और पूर्ण परियोजनाओं पर अनियमित इनपुट टैक्स क्रेडिट के दावे, सही सेवा कोड और व्यवसाय के अतिरिक्त स्थानों की घोषणा करने में विफलता, और ब्याज की कम वसूली के साथ आईटीसी के दावे और कर भुगतान के बीच बेमेल शामिल हैं. अकेले 123 केसों में, इन मुद्दों से रेवेन्यू पर 190.98 करोड़ रुपए का प्रभाव पड़ा, जबकि 522 टैक्सपेयर्स से जुड़ी 1,057 कमियों के एक अन्य सेट में 188.98 करोड़ रुपए जुड़ गए.

रिकार्ड हासिल करने में भी दिक्कतों का सामना

ऑडिट को पूरा रिकार्ड हासिल करने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. 392 टैक्सपेयर्स से जुड़े 431 मामलों में, विस्तृत दस्तावेज पूरी तरह से प्रस्तुत नहीं किए गए थे, और इनमें कर देनदारी, आईटीसी और रियायती दरों में 2,732.56 करोड़ रुपए का बेमेल दिखाया गया था. 22 और मामलों में, विभाग के सिस्टम से मूल रिटर्न और डिटेल गायब थे, जो 36.09 करोड़ रुपए के संभावित बेमेल की ओर इशारा करते हैं. जीएसटी विभाग के कार्यालयों की निगरानी कमजोर थी. जांचे गए 71 कार्यालयों में से 57 में खामियां दिखीं. कई स्थानों पर जांच या तो ठीक से नहीं की गई या देरी से की गई, और ऑडिट और जोखिम प्रबंधन महानिदेशालय से जोखिम अलर्ट पर फॉलोअप एक्शन कई मामलों में अधूरे थे.

रिपोर्ट में ये भी शामिल

रिपोर्ट में जीएसटी नेटवर्क आईटी सिस्टम के कैग ऑडिट के तीसरे चरण को भी शामिल किया गया है. पिछले ऑडिट के 56 लंबित मुद्दों में से, जीएसटीएन ने 38 को ठीक कर दिया है. एक को आंशिक रूप से ठीक कर दिया गया है और तीन प्रक्रियाधीन हैं, जबकि बाकी अनसुलझे हैं या केवल आंशिक रूप से संबोधित किए गए हैं. रजिस्ट्रेशन मॉड्यूल में समस्याएं जारी हैं, कमजोर वेरिफिकेशन और अनुमोदन या कैंसीलेशन में देरी, रिटर्न मॉड्यूल में, पात्रता, ब्याज गणना, आईटीसी रिवर्सल और सिक्वेंशियल फाइलिंग के लिए अपूर्ण जांच, और इंटीग्रेटिड जीएसटी सेटलमेंट में, जहां कुछ रिपोर्ट तैयार नहीं की गईं और विभाजन संबंधी त्रुटियां देखी गईं. कंपोजीशन लेवी स्कीम के तहत टैक्सपेयर्स की निगरानी भी अपर्याप्त है.

जीएसटीएन काफी हद तक आईटी प्रशासन और सुरक्षा के अनुरूप था, लेकिन हाई पोर्टल क्षमता और अधिक लचीले डेटा सेंटर्स की योजना में खामियां बनी हुई हैं. रेवेन्यू के मोर्चे पर, 202324 में इनडायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में सालदरसाल 8 फीसदी की वृद्धि हुई, जो सेंट्रल जीएसटी में 13 फीसदी की वृद्धि से प्रेरित है. हालांकि, कुल इनडायरेक्ट टैक्ससेजीडीपी रेश्यो 5.15 फीसदी से घटकर 4.98 फीसदी हो गया, जिसका मुख्य कारण केंद्रीय उत्पाद शुल्क रेवेन्यू में गिरावट जारी रही.

कैश की सिफारिश

सीएजी ने सिफारिश की है कि विभाग सड़क, पुल, रेलवे और मिट्टी के काम के कांट्रैक्ट्स पर रियायतों का दावा करने वाले सबकांट्रैक्टर्स की जांच और इंटरनल ऑडिट का विस्तार करे, ऐसे दावों की जांच करने के लिए सिस्टम में वेरिफिकेशन कंट्रोल रखे, रिवर्सचार्ज मामलों पर अधिक ध्यान केंद्रित करे जहां काम करने वाले ठेकेदार अनरजिस्टर्ड सप्लायर्स से खरीदते हैं या सरकार से सेवाएं प्राप्त करते हैं, और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के साथ कॉर्डिनेशन में सुधार करते हैं, ताकि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा पाई गई बेहिसाब इनकम की भी जीएसटी देनदारी के लिए जांच की जा सके. वित्त मंत्रालय और जीएसटीएन ने आईटी से संबंधित अधिकांश निष्कर्षों को स्वीकार कर लिया है. वर्क कांट्रैक्ट्स को देखने पर रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने स्वीकृत प्रकरणों में वसूली प्रारंभ कर दी है. रिपोर्ट बताती है कि जीएसटी कलेक्शन बढ़ रहा है, कंसट्रक्शन सेक्टर के टैक्सपेयर्स द्वारा कंप्लायंस में अंतर और शेष सिस्टम कमजोरियां रेवेन्यू को जोखिम में डाल रही हैं.

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply