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8 महीने में गई थी कलेक्टरी, अब फिर विवादों में IAS नेहा मारव्या; पूर्व CM के करीबी से भी हुआ था टकराव..

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भोपाल। मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य विभाग में कथित ‘पेन डाउन’ के बाद 2011 बैच की आईएएस अधिकारी नेहा मारव्या एक बार फिर सुर्खियों में हैं। विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके कामकाज को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर अधिकारी का पक्ष सामने आना बाकी है।नेहा मारव्या का नाम इससे पहले भी प्रशासनिक विवादों के चलते चर्चा में रहा है। डिंडोरी कलेक्टर के तौर पर उनका कार्यकाल करीब आठ महीने ही रहा था। इसके अलावा शिवपुरी जिला पंचायत CEO रहते हुए भी उनके कुछ फैसलों को लेकर विवाद सामने आए थे।

बैठक में महिला अधिकारियों से कथित विवाद

विभागीय सूत्रों के अनुसार, गुरुवार को हुई एक बैठक के दौरान नेहा मारव्या और दो महिला अधिकारियों के बीच विवाद की स्थिति बनी। आरोप है कि दोनों अधिकारियों को बैठक से बाहर जाने के लिए कहा गया।

कर्मचारियों का यह भी दावा है कि विभागीय कार्यों से जुड़ी जानकारी बेहद कम समय में उपलब्ध कराने का दबाव बनाया जाता है। समय पर जानकारी नहीं देने पर अधिकारियों को कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। कुछ अधिकारियों के इंक्रीमेंट को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं।

पांच गाड़ियों और खर्च को लेकर भी सवाल

विभाग के कुछ कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि नेहा मारव्या के उपयोग के लिए कई सरकारी वाहन लगाए गए हैं और विभागीय संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि कार्यालय में मिलने वाली चाय तक बंद कर दी गई।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

डिंडोरी में 8 महीने ही रहीं कलेक्टर

नेहा मारव्या को डिंडोरी कलेक्टर की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनका कार्यकाल ज्यादा लंबा नहीं चला। करीब आठ महीने बाद उन्हें कलेक्टर पद से हटा दिया गया था।उनके कार्यकाल के दौरान तत्कालीन मंत्री ओपी धुर्वे सहित कुछ स्थानीय राजनीतिक नेताओं के साथ मतभेद की खबरें भी सामने आई थीं। इसके बाद उनके तबादले को लेकर काफी चर्चा हुई थी।

शिवपुरी में कलेक्टर की गाड़ी का बिल रोकने का मामला

साल 2017 में नेहा मारव्या शिवपुरी जिला पंचायत की CEO थीं। उस दौरान उन्होंने तत्कालीन शिवपुरी कलेक्टर के सरकारी वाहन से जुड़े बिल को लेकर आपत्ति जताई थी और भुगतान रोक दिया था। इस मामले ने उस समय प्रशासनिक हलकों में काफी चर्चा बटोरी थी।

पूर्व मुख्यमंत्री के करीबी अधिकारी से भी हुआ था विवाद

नेहा मारव्या का विवाद तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के करीबी माने जाने वाले अधिकारी मनीष रस्तोगी से भी जुड़ा रहा है। उस समय रस्तोगी राजस्व विभाग में प्रमुख सचिव थे। नेहा मारव्या ने उन पर कथित तौर पर दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया था। इस मामले ने भी प्रशासनिक गलियारों में काफी सुर्खियां बटोरी थीं।

रिटायर्ड अधिकारी के खिलाफ जांच का मामला

राज्य रोजगार गारंटी परिषद में अतिरिक्त CEO रहते हुए नेहा मारव्या ने वन विभाग के सेवानिवृत्त CCF ललित बेलवाल के खिलाफ जांच शुरू कराई थी। उन पर भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे। मामले में FIR की कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की भी बात सामने आई थी।

एक बार फिर सवालों के घेरे में आईं IAS नेहा मारव्या

जनजातीय कार्य विभाग में सामने आए ताजा विवाद ने नेहा मारव्या के पुराने प्रशासनिक मामलों को फिर चर्चा में ला दिया है। हालांकि, वर्तमान मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्ष का जवाब सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में पूरे मामले की तस्वीर विभागीय जांच या आधिकारिक बयान के बाद ही स्पष्ट होगी।

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