जहां एक ओर भारत की सत्ताधारी पार्टी बांग्लादेश के नजदीक के राज्य वेस्ट बंगाल में जीत का जश्न मना रही है. वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में राजनीतिक सत्ता के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी होती जा रही हैं. बंगाल चुनाव नतीजों के 24 घंटे के बाद पाकिस्तान को लेकर ऐसी रिपोर्ट आई है, जिससे इस्लामाबाद में हड़कंप मच गया है. इस तरह की रिपोर्ट के आने का अंदाजा किसी को भी नहीं था. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर ऐसी कौन सी रिपोर्ट आई है, जिसकी वजह से पूरे पाकिस्तान में चिंता बढ़ गई है.

क्या है रिपोर्ट?
एक रिपोर्ट में यह कहा गया कि पाकिस्तान का वस्तु व्यापार घाटा चालू वित्त वर्ष के पहले 10 महीनों में 20 फीसदी बढ़कर 32 अरब डॉलर पर पहुंच गया. इससे देश की नाजुक इकोनॉमी को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए ‘द न्यूज’ ने बताया कि इंपोर्ट का वैल्यू एक्सपोर्ट की तुलना में दोगुने से भी अधिक रहा. पीबीएस के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 202526 की जुलाईअप्रैल अवधि के दौरान आयात लगभग सात प्रतिशत बढ़कर 57.2 अरब डॉलर हो गया, जबकि निर्यात छह प्रतिशत से अधिक घटकर 25.2 अरब डॉलर रहा. इस अंतर को अर्थशास्त्रियों ने विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डालने और पाकिस्तानी मुद्रा पर असर डालने वाला बताया है.
यहां से मिली राहत
रिपोर्ट के अनुसार, यह गिरावट अप्रैल 2026 में भी जारी रही, जब मासिक व्यापार घाटा एक साल पहले की तुलना में लगभग चार प्रतिशत बढ़कर चार अरब डॉलर से थोड़ा अधिक हो गया. मासिक एक्सोर्ट 14 प्रतिशत बढ़कर 2.48 अरब डॉलर हो गया, लेकिन इंपोर्ट की तुलना में यह कम रहा, जो 7.5 प्रतिशत बढ़कर 6.55 अरब डॉलर तक पहुंच गया. सेवा व्यापार के मोर्चे पर कुछ राहत मिली. वित्त वर्ष 202526 की जुलाईमार्च अवधि के दौरान सेवाओं का व्यापार घाटा 6.7 प्रतिशत घटकर 2.15 अरब डॉलर रहा. सर्विस एक्सपोर्ट 17 प्रतिशत बढ़कर 7.35 अरब डॉलर रहा. वहीं सर्विस कर इंपोर्ट लगभग 11 प्रतिशत बढ़कर 9.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया.



