
लखनऊ, अमृत विचार : प्रदेश के ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के स्मारकों को संवारने के लिए राज्य सरकार ने कदम बढ़ाया है। राज्य पुरातत्व निदेशालय के अधीन संरक्षित स्मारकों पर वृहद अनुरक्षण कार्य के लिए 15 करोड़ पांच लाख 31 हजार रुपये की धनराशि प्रस्तावित एवं अवमुक्त की गई है। सिविल कार्यों के लिए उप्र. आवास विकास परिषद को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि अनुरक्षण कार्य झांसी, लखनऊ, शामली, फिरोजाबाद और ललितपुर स्थित राज्य संरक्षित स्मारकों में कराया जाएगा। इन कार्यों में स्मारकों से वनस्पति हटाने, पत्थरों की केमिकल क्लीनिंग, जर्जर दीवारों के संरक्षण और प्लास्टर के रखरखाव समेत अन्य जरूरी कार्य शामिल हैं।
झांसी स्थित ठाकुरद्वारा की गढ़ी के संरक्षण के लिए 498.96 लाख रुपये की लागत से कार्य कराया जाएगा। स्मारक की दीवारों, छत और छज्जों में लगे पत्थरों की केमिकल क्लीनिंग के साथ दीवारों पर बने पेंटिंग वर्क की सफाई और रेस्टोरेशन होगा। जर्जर दीवारों के प्लास्टर के रखरखाव का काम भी कराया जाएगा।
कई ऐतिहासिक स्मारकों की सुधरेगी हालत
लखनऊ के बड़ा शिवाला श्री सिद्धनाथ मंदिर सैथा और शामली के प्राचीन गुंबद बन्तीखेड़ा में वनस्पति उन्मूलन व प्लास्टर के रखरखाव का कार्य होगा। फिरोजाबाद के चंद्रवाड़ किले में केमिकल क्लीनिंग और जर्जर ब्रिक स्टोन का संरक्षण कराया जाएगा। ललितपुर के रणछोड़ मंदिर और लक्ष्मणगढ़ मंदिर के साथ झांसी की डिमरौनी की गढ़ी में भी अनुरक्षण कार्य प्रस्तावित है। ललितपुर स्थित मर्दन सिंह के किले के संरक्षण के लिए 145.57 लाख रुपये की लागत से कार्य कराया जाएगा।
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