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PCOS​​​ यानी PMOS से परेशान महिलाओं के लिए राहत की उम्मीद, AIIMS की स्टडी में योग से दिखे सकारात्मक बदलाव

PCOS​​​ यानी PMOS से परेशान महिलाओं के लिए राहत की उम्मीद, AIIMS की स्टडी में योग से दिखे सकारात्मक बदलाव

नई दिल्ली: महिलाओं में होने वाली हार्मोनल और मेटाबॉलिक समस्या PCOS को अब PMOS यानी पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम भी कहा जा रहा है। इस समस्या में पीरियड्स अनियमित होना, वजन बढ़ना, चेहरे पर अनचाहे बाल आना और मुंहासे जैसी परेशानियां हो सकती हैं। अब एम्स (AIIMS) की एक स्टडी में सामने आया है कि नियमित योगाभ्यास इस समस्या से जूझ रही महिलाओं के लिए मददगार हो सकता है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, योग, प्राणायाम और ध्यान का नियमित अभ्यास हार्मोनल और मेटाबॉलिक सेहत में सुधार से जुड़ा पाया गया। हालांकि, योग को इस समस्या का पूर्ण इलाज नहीं माना जा सकता, बल्कि इसे उपचार और जीवनशैली में बदलाव के साथ एक सहायक उपाय के तौर पर अपनाया जा सकता है।

AIIMS की स्टडी में क्या सामने आया?

एम्स नई दिल्ली से जुड़े शोधकर्ताओं की ओर से किए गए अध्ययन में PMOS से पीड़ित 30 महिलाओं को शामिल किया गया। इन महिलाओं ने 12 सप्ताह तक योगाभ्यास किया। इस दौरान आसन, प्राणायाम और ध्यान को शामिल किया गया।

अध्ययन के बाद महिलाओं के हार्मोनल स्तर, शरीर से जुड़े कुछ मापदंडों और लिपिड प्रोफाइल में सकारात्मक बदलाव देखे गए। शोधकर्ताओं ने शरीर में मौजूद कुछ मेटाबोलाइट्स में भी बदलाव दर्ज किए, जो मेटाबॉलिक स्वास्थ्य से जुड़े होते हैं।

PMOS में योग कैसे कर सकता है मदद?

1. हार्मोनल संतुलन में मदद

PMOS में हार्मोन का असंतुलन एक प्रमुख समस्या है। नियमित योग और ध्यान तनाव कम करने तथा शरीर की समग्र कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। इससे हार्मोनल स्वास्थ्य को सहारा मिल सकता है।

2. वजन नियंत्रित रखने में सहायक

इस समस्या से जूझ रही कई महिलाओं को वजन बढ़ने की परेशानी होती है। नियमित योगाभ्यास शारीरिक गतिविधि बढ़ाता है और स्वस्थ वजन बनाए रखने में मदद कर सकता है।

3. इंसुलिन से जुड़ी समस्या में मदद

PMOS का संबंध कई बार इंसुलिन रेजिस्टेंस से भी होता है। ऐसी स्थिति में शरीर इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता। नियमित शारीरिक गतिविधि और संतुलित जीवनशैली इंसुलिन संवेदनशीलता को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।

4. तनाव और मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद

हार्मोनल बदलावों के कारण कुछ महिलाओं को तनाव, बेचैनी और मूड में बदलाव का सामना करना पड़ता है। योग, प्राणायाम और ध्यान मन को शांत करने और तनाव से निपटने में मदद कर सकते हैं।

5. मेटाबॉलिक सेहत को मिल सकता है सहारा

एम्स के अध्ययन में योग के बाद लिपिड प्रोफाइल और कुछ मेटाबॉलिक संकेतकों में भी बदलाव देखा गया। इससे पता चलता है कि नियमित योग शरीर की मेटाबॉलिक सेहत को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।

PMOS में कौन से योगासन किए जा सकते हैं?

योग अभ्यास में बद्ध कोणासन, सेतु बंधासन, भुजंगासन, नौकासन और मलासन जैसे आसन शामिल किए जा सकते हैं। सूर्य नमस्कार भी शारीरिक सक्रियता बढ़ाने का एक विकल्प है। हालांकि, हर महिला की शारीरिक स्थिति अलग होती है, इसलिए योग की शुरुआत प्रशिक्षित विशेषज्ञ की देखरेख में करना बेहतर है।

क्या सिर्फ योग से ठीक हो सकता है PMOS?

इसका जवाब है नहीं। योग को PMOS के इलाज का विकल्प नहीं समझना चाहिए। इसके प्रबंधन में संतुलित खानपान, नियमित शारीरिक गतिविधि, वजन नियंत्रण और जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय उपचार महत्वपूर्ण हैं। पीरियड्स में लगातार अनियमितता, अचानक वजन बढ़ने या अन्य लक्षणों की स्थिति में स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।

Satya Report नोट: AIIMS की स्टडी में योग के सकारात्मक प्रभाव सामने आए हैं, लेकिन इसके परिणामों की पुष्टि के लिए बड़े स्तर पर और लंबे समय तक शोध की जरूरत है। PMOS से पीड़ित महिलाएं डॉक्टर की सलाह के बिना अपनी दवाएं या चल रहा उपचार बंद न करें।

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