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गोरखपुर में खौफनाक वारदात, AI की मदद से कंप्यूटर टीचर ने रचा 10 साल के मासूम के कत्ल का डिजिटल ब्लूप्रिंट

Gorakhpur Teacher Kills 10 Year Old Boy: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से एक ऐसी सनसनीखेज वारदात सामने आई है जिसने न केवल पुलिस प्रशासन और आम जनता, दोनों को झकझोर कर रख दिया है। जिस शिक्षक के कंधों पर बच्चों को भविष्य की तकनीक और कंप्यूटर सिखाने की जिम्मेदारी थी उसी ने AI तकनीक को इस्तेंमाल कर एक मासूम की जान ले ली। यह मामला सिर्फ एक अपहरण या हत्या का नहीं है, बल्कि यह उस काली सोच का परिणाम है जहां तकनीक का इस्तेमाल अपराध के ‘परफेक्ट ब्लूप्रिंट’ के लिए किया गया।

गोरखपुर में खौफनाक वारदात, AI की मदद से कंप्यूटर टीचर ने रचा 10 साल के मासूम के कत्ल का डिजिटल ब्लूप्रिंट
गोरखपुर में खौफनाक वारदात, AI की मदद से कंप्यूटर टीचर ने रचा 10 साल के मासूम के कत्ल का डिजिटल ब्लूप्रिंट

AI की पाठशाला में सीखा गैंगस्टर जैसा स्टाइल

के इस कंप्यूटर टीचर, सर्वेश भट्ट ने 10 साल के मासूम वैभव वर्मा के अपहरण और हत्या की पूरी साजिश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस  की मदद से तैयार की थी। आरोपी ने AI से यह सीखा कि एक अपराधी या गैंगस्टर कैसे सोचता है, पुलिस को कैसे चकमा दिया जाता है और फिरौती की मांग किस तरह की जाती है। पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपी ने किताबों से नहीं, बल्कि डिजिटल टूल्स के जरिए अपराध की पूरी स्क्रिप्ट तैयार की थी ताकि वह पकड़ा न जा सके।

1 करोड़ की फिरौती का लालच

जांच में सामने आया कि सर्वेश भट्ट पेशे से कंप्यूटर टीचर था और उसकी शादी को अभी महज एक साल ही हुआ था। उसने बैंक से करीब 25 लाख रुपये का कर्ज ले रखा था, जिसकी हर महीने 30 हजार रुपये की किस्त जाती थी। इसी उधारी के बोझ को उतारने के लिए उसने इलाके के एक बड़े जौहरी के पोते वैभव को अगवा करने का प्लान बनाया। उसे उम्मीद थी कि इस अपहरण के बदले उसे कम से कम 1 करोड़ रुपये की फिरौती मिल जाएगी।

मासूम की चीख का खौफनाक अंत

चौथी कक्षा में पढ़ने वाला वैभव सोमवार दोपहर करीब 2 बजे अपनी नई साइकिल चलाने के लिए घर से निकला था। सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, वह सर्वेश के घर वाली गली तक तो गया, लेकिन उसके बाद लापता हो गया। बताया जा रहा है कि जब सर्वेश ने वैभव को किडनैप करने की कोशिश की, तो बच्चा शोर मचाने लगा। पकड़े जाने के डर से आरोपी ने तुरंत वैभव का गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी और लाश को बोरी में भरकर अपने घर के बेसमेंट में छिपा दिया। कत्ल करने के बाद भी शातिर आरोपी ने वैभव के पिता से 1 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी।

17 घंटे तक घर में ही रही लाश

इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। सीसीटीवी में सर्वेश को एक खेत में बच्चे की चप्पल फेंकते हुए देखा गया था, जिसके आधार पर पुलिस ने उसे हिरासत में भी ले लिया था। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि आरोपी पुलिस की कस्टडी में 17 घंटे तक रहा और पुलिस उससे सच नहीं उगलवा पाई। यही नहीं, पुलिस एक बार आरोपी के घर की तलाशी लेने भी गई थी, लेकिन वह बेसमेंट में रखी उस बोरी तक नहीं पहुंच सकी जिसमें मासूम की लाश थी। अंततः मंगलवार सुबह आरोपी के घर की तलाशी लेने पर उसके घर से ही वैभव का शव बरामद हुआ।

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आरोपी का दागदार अतीत और परिवार की गिरफ्तारी

सर्वेश भट्ट का पुराना रिकॉर्ड भी आपराधिक रहा है। वह 2024 के मामले में भी आरोपी रह चुका है और 40 दिनों तक प्रयागराज की नैनी जेल में बंद था। वैभव हत्याकांड में पुलिस ने सबूत मिटाने और साजिश में शामिल होने के आरोप में सर्वेश के परिवार के 6 अन्य सदस्यों को भी गिरफ्तार किया है।

यह घटना हमें चेतावनी देती है कि कैसे आधुनिक तकनीक, अगर गलत हाथों में चली जाए, तो वह कितनी विनाशकारी साबित हो सकती है।

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