Satya Report: आम, जिसे फलों का राजा कहा जाता है, अपनी मिठास, सुगंध और विविधता के कारण दुनिया भर में प्रसिद्ध है। भारत में आम की सैकड़ों किस्में पाई जाती हैं, जिसमें अल्फांसो, दशहरी, लंगड़ा, केसर और तोतापुरी प्रमुख हैं। हर किसी का स्वाद, आकार, रंग और सुगंध अलगअलग होती है, जो इसे खास बनाती है। आम का इतिहास हजारों साल पुराना और इसकी उत्पत्ति मुख्य रूप से भारत में ही मानी जाती है। प्राचीन ग्रंथों और पुरातात्विक साक्ष्यों के अनुसार आम की खेती भारत में लगभग 40005000 वर्ष पहले शुरू हुई थी। सिंधु घाटी सभ्यता के समय भी आम का महत्व माना जाता था।

गौतम बुद्ध के समय भी होती थी आम की खेती
एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका के अनुसार आम भारत की लोककथाओं और धार्मिक परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि गौतम बुद्ध को विश्राम के लिए वैशाली में एक बगीचा भेंट किया गया था, ताकि वे उसकी ठंडी छाया में आराम कर सकें। वह एक आम का बगीचा था। भारतीय आमों के नामकरण के पीछे रोचक ऐतिहासिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक कारण जुड़े हुए हैं। कई आमों के नाम उस स्थान के आधार पर पड़े जहां वे पहली हार उगाए गए या लोकप्रिय हुए। ऐसे में आइए जानते हैं लंगड़ा आम के बारे में कुछ दिलचस्प बातें और कैसे पड़ा इसका नाम।
लंगड़ा आम की पहचान
लंगड़ा आम भारत की सबसे प्रसिद्ध आम की किस्मों में से एक है, जिसकी पहचान उसके अनोखे स्वाद और खुशबू से होती है। यह आम मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार और आसपास के क्षेत्रों में उगाया जाता है और जून से जुलाई के बीच बाजार में आता है। इसके स्वाद में हल्की खटास और गहरी मिठास का संतुलन होता है, जो इसे अन्य आमों से अलग बनाता है। आइए जानते हैं कैसे पड़ा इसका नाम:
कैसे पड़ा लंगड़ा नाम
माना जाता है कि इस आम की उत्पत्ति उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुई थी। इस आम के नाम को लेकर एक कहानी प्रचलित है। कहा जाता है कि कई वर्षों पहले वाराणसी में एक साधु या फकीर रहते थे, जो चलने में असमर्थ थे और लंगड़ाकर चलते थे। उनके आंगन में एक छोटा सा बाग था, जो सामान्य पेड़ों से अलग और बेहद खास था। अपनी कमजोरी के बावजूद वह हर पेड़ को बड़े प्यार और ध्यान से देखभाल करते थे।
एक दिन जब वह अपने बाग का निरीक्षण कर रहे थे, तब उनकी नजर एक खास आम के पेड़ पर पड़ी। वह पेड़ बाकी पेड़ों से ज्यादा बराभरा और स्वस्थ दिख रहा था। उसकी टहनियों पर लगे आम भी कुछ अलग ही नजर आ रहे थे। पकने के बाद जब उस आम को लोगों ने चखा तो धीरेधीरे उसके स्वाद की चर्चा शुरू हो गई। आम का स्वाद, मिठास और खुशबू लोगों को पसंद आने लगा। धीरेधीरे आम की चर्चा पूरे इलाके में फैलने लगी।
यह आम उस फकीर बाबा से जुड़ा हुआ था, जो दिव्यांग थे। ऐसे में लोगों ने इसे लंगड़ा आम नाम दिया। धीरेधीरे यह आम बनारस से निकलकर पूरे उत्तर भारत में मशहूर हो गया। आज लंगड़े आम के खेती उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और हिमाचल प्रदेश के अलावा कई और राज्यों में की जाती है। इसके अलावा बांग्लादेश और अन्य कई पड़ोसी देशों में भी इसकी खेती की जाती है।
रंग है इसकी पहचान
लंगड़ा आम अपनी खास बनावट और रंग के कारण पहचाना जाता है। जहां अधिकतर आम पकने के बाद पीले हो जाते हैं, तो वहीं यह आम हरा ही रहता है। इसका आकार अंडाकार का होता है और नीचे की ओर हल्का नुकीलापन होता है। इसका छिलका पतला और इसके पल्प काफी मुलायम, रसदार और बिना रेशे वाला होते हैं। इस आम की एक और खास पहचान है भीनीभीनी मिठी खुशबू।



