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परमाणु बम बनाने में कितना यूरेनियम चाहिए और ईरान के पास कितना है? ये क्यों है जरूरी? जिस पर ट्रंप की नजरें टेढ़ीं

अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक फिर से कहा है कि अगर ईरानअमेरिका के बीच समझौता हो जाता है तो दोनों देश मिलकर ईरान में मौजूद संवर्धित यूरेनियम को नष्ट कर देंगे. ट्रम्प का यह भी कहना है कि वे ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देने के अपने संकल्प पर अटल हैं. ट्रम्प ने कहा है कि अगर किन्हीं कारणों से समझौता नहीं होता है तो वे ईरान में उपलब्ध संवर्धित यूरेनियम को अपने कब्जे में लेने के विकल्प पर भी विचार कर सकते हैं.

परमाणु बम बनाने में कितना यूरेनियम चाहिए और ईरान के पास कितना है? ये क्यों है जरूरी? जिस पर ट्रंप की नजरें टेढ़ीं
परमाणु बम बनाने में कितना यूरेनियम चाहिए और ईरान के पास कितना है? ये क्यों है जरूरी? जिस पर ट्रंप की नजरें टेढ़ीं

आइए, इस बहाने जानते हैं कि आखिर ईरान के पास कितना संवर्धित यूरेनियम है? परमाणु बम बनाने में कितना यूरेनियम चाहिए होता है?

परमाणु बम के लिए कितना यूरेनियम चाहिए?

सामान्य तौर पर परमाणु बम के लिए बहुत अधिक संवर्धित यूरेनियम चाहिए. इसे हाईली एनरिच्ड यूरेनियम कहा जाता है. हथियारग्रेड यूरेनियम में आमतौर पर लगभग 90 प्रतिशत यू235 होता है. यह वही हिस्सा है जो परमाणु ऊर्जा और विस्फोट में अहम भूमिका निभाता है. सार्वजनिक विशेषज्ञ अनुमान के अनुसार, एक परमाणु हथियार के लिए लगभग 25 किलो हथियारग्रेड यूरेनियम को महत्वपूर्ण मात्रा माना जाता है. लेकिन सिर्फ यूरेनियम होना काफी नहीं है. एक हथियार बनाने के लिए और भी बहुत जटिल तकनीक चाहिए. इसमें डिजाइन, असेंबली, परीक्षण क्षमता और डिलीवरी सिस्टम जैसे पहलू आते हैं. इसीलिए यूरेनियम का भंडार खतरे का संकेत हो सकता है. पर, यह अपने आप तैयार बम नहीं होता.

संवर्धित यूरेनियम क्या होता है?

प्राकृतिक यूरेनियम सीधे परमाणु हथियार में इस्तेमाल नहीं होता. इसमें यू235 की मात्रा बहुत कम होती है. इसे बढ़ाने की प्रक्रिया को संवर्धन कहा जाता है. कम संवर्धित यूरेनियम का इस्तेमाल बिजलीघरों में हो सकता है. आमतौर पर 3 से 5 प्रतिशत तक संवर्धन नागरिक उपयोग के लिए माना जाता है. 20 प्रतिशत संवर्धन को बड़ा स्तर माना जाता है. 60 प्रतिशत संवर्धन बहुत गंभीर स्तर है. 90 प्रतिशत के आसपास इसे हथियारग्रेड कहा जाता है. यही वजह है कि 60 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम पर दुनिया की चिंता बढ़ जाती है. क्योंकि यह हथियारग्रेड स्तर से बहुत दूर नहीं माना जाता.

ईरान के पास कितना यूरेनियम है?

मौजूदा सार्वजनिक रिपोर्ट्स पर भरोसा करें तो ईरान के पास लगभग 440 से 450 किलो तक 60 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम बताया गया है. बीबीसी हिन्दी ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा है कि ईरान के पास करीब 440 किलो 60 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम है. इसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान के पास करीब 10 कुंतल 20 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम और लगभग 8.50 कुंतल कम स्तर का संवर्धित यूरेनियम भी है. यह आंकड़े इसलिए अहम हैं क्योंकि 60 प्रतिशत वाला भंडार सबसे ज्यादा चिंता पैदा करता है. यह अभी हथियारग्रेड नहीं है.

लेकिन इसे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में गंभीर खतरे की तरह देखा जाता है. कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस सामग्री को और संवर्धित किया जाए, तो यह कई परमाणु हथियारों के लिए पर्याप्त हो सकती है. लेकिन यह बात शर्तों पर आधारित है. सिर्फ सामग्री से हथियार तैयार नहीं हो जाता.

ट्रंप क्यों नाराज हैं?

डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम के आलोचक रहे हैं. 2018 में उनके पहले कार्यकाल के दौरान अमेरिका ईरान परमाणु समझौते से बाहर हो गया था. वह समझौता 2015 में हुआ था. इसके तहत ईरान के संवर्धन स्तर और यूरेनियम भंडार पर सीमा लगाई गई थी. समझौते के तहत ईरान को 3.67 प्रतिशत से अधिक संवर्धन की अनुमति नहीं थी. उसके यूरेनियम भंडार की सीमा भी तय थी. ट्रंप का मानना था कि यह समझौता कमजोर है.

उनका कहना था कि इससे ईरान को लंबे समय में फायदा मिल सकता है. इसीलिए अमेरिका समझौते से बाहर हो गया. अब ट्रंप फिर ईरान के यूरेनियम भंडार पर सख्त नजर रखे हुए हैं. उनकी चिंता है कि ईरान इस भंडार का सैन्य इस्तेमाल कर सकता है.

ईरान क्या कहता है?

ईरान लगातार कहता है कि वह परमाणु बम नहीं बना रहा. परमाणु ऊर्जा उसका अधिकार है. ईरान यह भी कहता है कि पश्चिमी देश उसके साथ दोहरा रवैया अपनाते हैं. तेहरान का दावा है कि वह अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत काम करना चाहता है, लेकिन अमेरिका और इसराइल को ईरान पर भरोसा नहीं है. वे कहते हैं कि ईरान ने पहले कई गतिविधियां छिपाई थीं. इसलिए उसके दावों की जांच जरूरी है.

यह मुद्दा दुनिया के लिए क्यों जरूरी है?

यह सिर्फ ईरान और अमेरिका का विवाद नहीं है. यह पूरी दुनिया की सुरक्षा से जुड़ा सवाल है. अगर ईरान परमाणु हथियार के करीब पहुंचता है, तो मध्य पूर्व में तनाव बढ़ सकता है. इसराइल इसे अपने लिए बड़ा खतरा मानता है. सऊदी अरब और दूसरे क्षेत्रीय देश भी बेचैन हो सकते हैं. इससे हथियारों की दौड़ शुरू हो सकती है. एक देश परमाणु क्षमता बढ़ाएगा, तो दूसरे देश भी ऐसा कर सकते हैं. यह हालात दुनिया के लिए खतरनाक होंगे. क्योंकि परमाणु हथियार किसी सामान्य हथियार जैसे नहीं होते. इनका असर पीढ़ियों तक रह सकता है.

तेल और अर्थव्यवस्था पर असर

ईरान का मुद्दा ऊर्जा बाजार से भी जुड़ा है. मध्य पूर्व दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा केंद्र है. अगर ईरान और अमेरिका में टकराव बढ़ता है, तो तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं. होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी खतरा बढ़ सकता है. यह रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए बहुत अहम है. भारत जैसे देशों पर भी इसका असर पड़ सकता है. कच्चे तेल के दाम बढ़ेंगे, तो पेट्रोलडीजल महंगे हो सकते हैं. महंगाई भी बढ़ सकती है.

क्या कोई समाधान है?

समाधान बातचीत से ही संभव है. ईरान को भरोसा देना होगा कि उसका कार्यक्रम शांतिपूर्ण है. इसके लिए अंतरराष्ट्रीय निगरानी जरूरी है. अमेरिका और यूरोपीय देशों को भी ऐसा रास्ता निकालना होगा, जिसमें ईरान की सुरक्षा चिंताओं को समझा जाए. साथ ही परमाणु हथियारों का खतरा रोका जाए. कुछ रिपोर्ट्स में यह भी चर्चा है कि ईरान का संवर्धित यूरेनियम किसी तीसरे देश में अंतरराष्ट्रीय निगरानी के तहत रखा जा सकता है. ऐसे उपाय तनाव कम कर सकते हैं. लेकिन इसके लिए भरोसा जरूरी है.

ईरान का यूरेनियम विवाद बेहद संवेदनशील है. एक परमाणु हथियार के लिए लगभग 25 किलो हथियारग्रेड यूरेनियम को अहम मात्रा माना जाता है. ईरान के पास लगभग 440 किलो 60 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम बताया जा रहा है. यही वजह है कि ट्रंप और पश्चिमी देश चिंतित हैं. यह सामग्री अभी तैयार बम नहीं है, लेकिन यह परमाणु हथियार की दिशा में बड़ा संकेत मानी जाती है. दुनिया के लिए सबसे अच्छा रास्ता युद्ध नहीं है. सबसे अच्छा रास्ता सख्त निगरानी और गंभीर बातचीत है. क्योंकि परमाणु संकट का हल ताकत से नहीं, समझदारी से निकलता है.

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