Business

15 साल में एपल को कितनी बड़ी कंपनी बना गए टिम कुक, माइक्रोसॉफ्ट से गूगल तक सभी को छोड़ा पीछे

Satya Report: टिम कुक एपल के सीईओ सितंबर से नहीं रहेंगे. कंपनी ने इसके बारे में जानकारी दी है वह सीईओ का पद छोड़ रहे हैं. उन्होंने करीब 15 सालों तक एपल की कमान संभाली. इस दौरान उन्होंने कंपनी को नए ऊंचाइयों तक पहुंचाया. साथ ही बड़ी टेक दिग्गज कंपनियों जैसे माइक्रोसॉफ्ट औग गूगल को भी पीछे छोड़ दिया. आइए आपको बताते हैं कि आखिर जो एपल साल 1990 के दशक में बुरी स्थिति में थी. उस कंपनी को बीते 15 सालों में कैसे टिम कुक ने शिखर तक पहुंचाया है.

15 साल में एपल को कितनी बड़ी कंपनी बना गए टिम कुक, माइक्रोसॉफ्ट से गूगल तक सभी को छोड़ा पीछे
15 साल में एपल को कितनी बड़ी कंपनी बना गए टिम कुक, माइक्रोसॉफ्ट से गूगल तक सभी को छोड़ा पीछे

टिम कुक ने 15 साल पहले जब Apple की कमान संभाली थी. उनके सीईओ बनने के बाद शायद ही किसी ने सोचा होगा कि कंपनी एक दिन दुनिया की सबसे वैल्यूएबल टेक दिग्गज बन जाएगी. जब वह 24 अगस्त 2011 को सीईओ बने थे. तब उस समय Apple का शेयर महज 13.44 डॉलर पर था और कंपनी की कुल वैल्यू करीब 197 बिलियन डॉलर थी. आज, 2026 के आसपास, यही कंपनी 4.01 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप तक पहुंच चुकी है और शेयर कीमत 273 डॉलर के पार जा चुकी है. यानी Cook के कार्यकाल में Apple ने वैल्यूएशन और शेयर प्राइस दोनों में 20 गुना से ज्यादा की छलांग लगाई है.

एपल की हुई रिकॉर्ड ग्रोथ

कुक के नेतृत्व में एपल ने सिर्फ ग्रोथ ही नहीं दिखाई, बल्कि अपने बिजनेस मॉडल को भी नई दिशा दी. iPhone की मजबूत पकड़ को बनाए रखते हुए कंपनी ने सर्विसेज सेगमेंट जैसे Apple Music, iCloud और App Store को तेजी से विस्तार दिया, जिससे रेवेन्यू का नया और स्थिर स्रोत तैयार हुआ. यही वजह है कि Apple ने उतार-चढ़ाव भरे बाजार में भी लगातार मजबूती दिखाई.

इस दौरान Apple ने कई बड़े माइलस्टोन हासिल किए. कंपनी ने पहले 1 ट्रिलियन, फिर 2 ट्रिलियन और उसके बाद 3 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा पार किया, और अब 4 ट्रिलियन डॉलर के क्लब में शामिल हो चुकी है. इस रेस में उसने Microsoft और Google जैसी दिग्गज कंपनियों को पीछे छोड़ दिया.

कुक की दूरदर्शी रणनीति

टिम कुक की रणनीति का एक बड़ा हिस्सा सप्लाई चेन को मजबूत करना और ग्लोबल एक्सपेंशन रहा. उन्होंने चीन के बाहर भी मैन्युफैक्चरिंग बेस को बढ़ाया और भारत जैसे बाजारों पर खास फोकस किया. इसके अलावा, प्राइवेसी को लेकर Apple की सख्त पॉलिसी ने भी कंपनी को प्रतिस्पर्धियों से अलग पहचान दिलाई.

हालांकि, कुक का दौर सिर्फ उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहा. उन्हें स्लो हार्डवेयर इनोवेशन और iPhone पर अधिक निर्भरता को लेकर आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा. इसके बावजूद, निवेशकों का भरोसा कंपनी पर बना रहा और Apple का स्टॉक लॉन्ग टर्म में शानदार रिटर्न देता रहा. .

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply