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EV की रफ्तार बढ़ी तो 2027 तक घट सकती है लाखों बैरल तेल की मांग! भारत का होगा बड़ा रोल

अमेरिकाईरान के बीच हुए हालिया संघर्ष ने भले ही कच्चे तेल के लिए दुनिया को रुलाया हो, लेकिन आने वाले कुछ सालों में कहानी पूरी तरह बदल सकती है. दुनियाभर में इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है. अब EV को सिर्फ एक नई परिवहन तकनीक नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे वैश्विक ऊर्जा बाजार को बदलने वाली बड़ी ताकत के रूप में देखा जा रहा है.

EV की रफ्तार बढ़ी तो 2027 तक घट सकती है लाखों बैरल तेल की मांग! भारत का होगा बड़ा रोल

वैश्विक निवेश बैंक Goldman Sachs की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगर इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री इसी रफ्तार से बढ़ती रही, तो साल 2027 तक दुनिया में तेल की मांग में बड़ी कमी आ सकती है. रिपोर्ट का अनुमान है कि EV की बढ़ती हिस्सेदारी के कारण 2027 तक रोजाना करीब 3.2 लाख बैरल तेल की मांग कम हो सकती है.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर दुनिया में किसी वजह से होर्मुज स्ट्रेट जैसी स्थिति फिर से पैदा होती है तो लोग और सरकारें तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुख कर सकती हैं. ऐसी स्थिति में तेल की मांग में गिरावट और भी तेज हो सकती है.

तेजी से बढ़ रही EV की हिस्सेदारी

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने वैश्विक कार बाजार में EV की हिस्सेदारी बढ़कर 26.1 प्रतिशत तक पहुंच गई. यह अब तक के सबसे ऊंचे स्तरों में से एक है. इसका मतलब है कि दुनिया में बिकने वाली हर चार कारों में से लगभग एक कार इलेक्ट्रिक हो चुकी है. हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक, दो कंडीशन बन सकती हैं. पहली स्थिति में अगर EV की बिक्री मौजूदा स्तर पर स्थिर रहती है, तो 2027 तक तेल की मांग में रोजाना करीब 1.3 लाख बैरल की कमी आ सकती है. दूसरी स्थिति में अगर EV की बिक्री लगातार बढ़ती रही, तो तेल की मांग में रोजाना 3.2 लाख बैरल तक की गिरावट आ सकती है.

भारत में स्कूटर और बाइक निभा रहे बड़ी भूमिका

रिपोर्ट के अनुसार भारत, चीन और वियतनाम जैसे देशों में इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहन सबसे ज्यादा बिक रहे हैं. इलेक्ट्रिक स्कूटर, बाइक और ऑटोरिक्शा तेजी से पेट्रोल और डीजल वाहनों की जगह ले रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि ये छोटे EV वाहन तेल की खपत कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं. क्योंकि इन देशों में लाखों लोग रोजाना दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल करते हैं.

चीन सबसे आगे

दुनिया के सबसे बड़े EV बाजारों में चीन सबसे आगे बना हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक चीन में EV की हिस्सेदारी में 11.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इससे साफ है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन और बिक्री दोनों में चीन का दबदबा लगातार बढ़ रहा है. दुनिया के 15 सबसे बड़े EV बाजारों में से 12 बाजारों में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है. इससे संकेत मिलता है कि आने वाले सालों में पेट्रोल और डीजल की मांग पर दबाव बढ़ सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर EV तकनीक और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से विकसित होते रहे, तो भविष्य में तेल पर निर्भरता और कम हो सकती है.

भारत में भी EV की रफ्तार तेज

भारत का इलेक्ट्रिक वाहन बिक्री ने भी मई 2026 में नया रिकॉर्ड बनाया. मई 2026 में देशभर में कुल 2.64 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों के रजिस्ट्रेशन हुए, जो पिछले साल की तुलना में 35% अधिक और अप्रैल 2026 की तुलना में 6% ज्यादा है. अब खरीदार पेट्रोलडीजल की बढ़ती कीमतों, कम रनिंग कॉस्ट, ईंधन पर होने वाली बचत और बेहतर होती चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी वजहों से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर आकर्षित हो रहे हैं. दूसरे शब्दों में कहें तो भारतीय EV बाजार अब आत्मनिर्भर विकास की ओर बढ़ रहा है, जहां ग्राहकों की वास्तविक मांग इसकी सबसे बड़ी ताकत बनती जा रही है.

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