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वजन बढ़ने से परेशान है तो सुबह की ये 3 आदतें बदलें, इंसुलिन और वजन रहेगा बैलेंस..

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सुबह की शुरुआत आपकी सेहत का मिजाज तय करती है। अगर आपका वजन लगातार बढ़ रहा है और शरीर में इंसुलिन का संतुलन बिगड़ा हुआ है, तो इसकी वजह आपकी सुबह की रूटीन हो सकती है। खराब लाइफस्टाइल और गलत खान-पान के चलते वजन बढ़ना और इंसुलिन असंतुलित होना आज एक आम समस्या बन चुका है। अगर आप भी सुबह उठते ही कुछ ऐसी गलतियां कर रहे हैं जो आपके मेटाबॉलिज्म को धीमा कर रही हैं, तो संभल जाने की जरूरत है। भारतीय योग गुरु, लेखक, शोधकर्ता और टीवी पर्सनालिटी डॉक्टर हंसा योगेंद्र के मुताबिक सुबह की सिर्फ 3 आदतों में बदलाव करके आप अपने इंसुलिन लेवल को मैनेज कर सकते हैं और वजन को भी कंट्रोल कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि सुबह की आदतें कैसे इंसुलिन और वजन को मैनेज करने में मदद कर सकती हैं।

सुबह की आदतें कैसे इंसुलिन और वजन को मैनेज करने में मदद कर सकती हैं

अगर आप कम खाना खाने के बावजूद वजन बढ़ने, खासकर पेट के आसपास चर्बी जमा होने से परेशान हैं, तो वजह सिर्फ कैलोरी की मात्रा नहीं हो सकती। शरीर इंसुलिन के प्रति कैसे प्रतिक्रिया करता है, यह भी महत्वपूर्ण है। सुबह की कुछ आसान आदतें इंसुलिन संवेदनशीलता और हेल्दी वेट को सपोर्ट कर सकती हैं। इंसुलिन एक हार्मोन है जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाता है। जब हम कार्बोहाइड्रेट खाते हैं, तो वे ग्लूकोज में टूटता हैं और ब्लडस्ट्रीम में पहुंचता हैं। इंसुलिन ग्लूकोज को शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाने में मदद करता है, जहां इसका इस्तेमाल ऊर्जा के लिए किया जाता है। इसलिए इंसुलिन खुद समस्या नहीं है बल्कि लक्ष्य यह है कि शरीर इंसुलिन का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करे।

गुनगुना पानी पिएं

रात में 6 से 8 घंटे सोने के बाद शरीर थोड़ा डिहाइड्रेट हो सकता है। सांस लेने और पसीने के कारण रातभर शरीर से पानी की कुछ मात्रा कम होती है। इसलिए सुबह उठकर गुनगुना पानी पीना हाइड्रेशन बनाए रखने का आसान तरीका है। ध्यान रखें कि पानी सीधे इंसुलिन का स्तर कम नहीं करता, लेकिन पर्याप्त हाइड्रेशन मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट करता है और कई बार प्यास को भूख समझने से बचा सकता है। सुबह-सुबह बहुत गर्म नहीं बल्कि गुनगुना पानी पीना सेहत के लिए उपयोगी है।

मांसपेशियों को एक्टिव करें

आप अपने दिन की शुरुआत करने से पहले अपनी मांसपेशियों को एक्टिव रखें फिर नाश्ता करें। मांसपेशियां शरीर में ग्लूकोज के इस्तेमाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जब आप शारीरिक गतिविधि करते हैं, तो मांसपेशियां ग्लूकोज का इस्तेमाल करने लगती हैं और इससे इंसुलिन संवेदनशीलता को सपोर्ट मिल सकती है। सुबह नाश्ते से पहले 15 से 20 मिनट की हल्की से मध्यम एक्टिविटी आपके वजन को कम करने में बेहद असरदार साबित होती है। बॉडी एक्टिविटी में सुबह तेज चाल से चलना, सूर्य नमस्कार, स्ट्रेचिंग, सीढ़ियां चढ़ना या अपनी क्षमता के अनुसार हल्की एक्सरसाइज बेहतर विकल्प हो सकते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति के लिए खाली पेट एक्सरसाइज जरूरी नहीं है। अपनी क्षमता और हेल्थ कंडीशन के मुताबिक आप बॉडी को एक्टिव रख सकते हैं।

इंसुलिन-फ्रेंडली नाश्ता खाएं

आपका सुबह का नाश्ता बैलेंस होना चाहिए जिसमें फाइबर, प्रोटीन, हेल्दी फैट और अच्छी गुणवत्ता वाले कार्बोहाइड्रेट का संतुलन हो। नाश्ते में फाइबर का सेवन करेंगे तो पाचन की गति धीमी रहेगी, जिससे ग्लूकोज धीरे-धीरे ब्लडस्ट्रीम में पहुंचेगा। आप सुबह के नाश्ते में सब्जियां, स्प्राउट्स, साबुत फल, ओट्स, मिलेट्स और साबुत अनाज खा सकते हैं। प्रोटीन डाइट के लिए आप सुबह के नाश्ते में  मूंग, चना, राजमा, पनीर, दही, टोफू, नट्स और बीज खा सकते हैं। प्रोटीन डाइट पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने, मांसपेशियों को सपोर्ट करने और बार-बार स्नैकिंग से बचने में मदद कर सकती है। हेल्दी फैट की प्राप्ति के लिए आप नाश्ते में नट्स, बीज, मूंगफली, तिल, अलसी और थोड़ी मात्रा में घी का सेवन कर सकते हैं। इन्हें सीमित मात्रा में लेना बेहतर है। सुबह सुबह बॉडी में एनर्जी बनाए रखने के लिए कार्बोहाइड्रेट भी जरूरी हैं, लेकिन बहुत अधिक रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा सकता हैं। आप सुबह के नाश्ते में साबुत अनाज, दालें, बीन्स, साबुत फल, मिलेट और सीमित मात्रा में चपाती या चावल का सेवन कर सकते हैं।

सुबह की खराब आदतें जो बढ़ाती है वजन और बिगाड़ती है इंसुलिन बैलेंस

नाश्ता छोड़ने से बचें

नाश्ता छोड़ने के बाद कुछ लोगों को बहुत ज्यादा भूख लग सकती है, जिसके कारण बाद में ज्यादा खाना या मीठा और रिफाइंड फूड्स लोग ज्यादा खाते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति के लिए सिर्फ नाश्ता करना ही जरूरी नहीं बल्कि दिनभर के खाने का ध्यान रखना भी जरूरी है। नाश्ते में पिज्जा, फ्राइड राइस और मिठाइयां न लें। बचे हुए पिज्जा, फ्राइड राइस, नूडल्स और मिठाइयां अक्सर रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, कैलोरी और वसा से भरपूर होते हैं। इन्हें नियमित नाश्ते का हिस्सा बनाने के बजाय फाइबर और प्रोटीन से भरपूर विकल्प चुनना बेहतर है।

नाश्ते में सिर्फ ड्रिंक का ही नहीं करें सेवन

फ्रूट जूस, मीठी चाय-कॉफी, मिल्क शेक और मीठी लस्सी जैसे ड्रिंक में फाइबर कम हो सकता है और इनमें मौजूद शुगर तेजी से अवशोषित हो सकती है। साबुत फल खाना आमतौर पर जूस पीने से बेहतर विकल्प है।

जरूरत से ज्यादा खाने से बचें

बहुत ज्यादा खाना एक साथ लेने से कुल कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बढ़ सकती है। इसलिए पेट को बहुत भारी करने के बजाय संतुष्ट होने तक खाना बेहतर है।

लंबे समय तक लगातार न बैठें

खाने के बाद थोड़ी देर चलना-फिरना या लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचना ग्लूकोज कंट्रोल के लिए मददगार हो सकता है। दिनभर की छोटी-छोटी एक्टिविटी करके ब्रेक लेना एक अच्छी आदत है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। सुबह की ये आदतें और संतुलित आहार इंसुलिन संवेदनशीलता और वजन कंट्रोल को सपोर्ट कर सकते हैं, लेकिन ये डायबिटीज, इंसुलिन रेजिस्टेंस या मोटापे का इलाज नहीं हैं। किसी भी डाइट या एक्सरसाइज में बदलाव से पहले, खासकर यदि आप डायबिटीज की दवा लेते हैं या कोई स्वास्थ्य समस्या है, डॉक्टर या योग्य डाइटीशियन की सलाह जरूर लें।

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