GazabIndiaTrending

कुत्ते​​​​​​ को घुमाने निकले तो पॉटी बैग के साथ पानी की बोतल भी रखें! यूरोप के इस शहर में पेड़ों को बचाने के लिए शुरू हुई अनोखी मुहिम

कुत्ते​​​​​​ को घुमाने निकले तो पॉटी बैग के साथ पानी की बोतल भी रखें! यूरोप के इस शहर में पेड़ों को बचाने के लिए शुरू हुई अनोखी मुहिम

वियना, ऑस्ट्रिया: पालतू कुत्तों को घुमाने ले जाते समय उनके मालिक अक्सर सफाई के लिए पॉटी बैग साथ रखते हैं, लेकिन अब ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में एक और चीज साथ रखने की अपील की जा रही है—पानी की छोटी बोतल। इसकी वजह है शहर के पेड़ों को कुत्तों के पेशाब से होने वाले संभावित नुकसान से बचाना। स्थानीय स्तर पर शुरू की गई इस पहल के तहत लोगों से कहा जा रहा है कि अगर उनका कुत्ता किसी पेड़ के तने पर पेशाब करे, तो बाद में उस जगह पर थोड़ा पानी डाल दें।

पहली नजर में यह एक छोटी-सी जिम्मेदारी लग सकती है, लेकिन शहरों में पेड़ों की देखभाल को लेकर यह पहल चर्चा में है। इसका मकसद पालतू जानवरों के सामान्य व्यवहार पर पूरी तरह रोक लगाना नहीं, बल्कि उनके मालिकों को आसपास की हरियाली के प्रति जिम्मेदार बनाना है।

‘शोनेस गासी’ मुहिम से हुई शुरुआत

द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पहल का नाम ‘शोनेस गासी’ (Schönes Gassi) है। इसे वियना के नॉयबाउ इलाके में शुरू किया गया है। यह क्षेत्र अपने कैफे, आर्ट गैलरी और घनी आबादी के लिए जाना जाता है।

इस मुहिम में स्थानीय समूह ग्रेट्जललाबोर भी शामिल है। पहल का उद्देश्य इलाके की हरियाली की देखभाल करना है, खासकर उन पेड़ों की, जिन्हें शहर में गर्मी और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में मदद के लिए लगाया गया है।

इस अभियान के तहत कुत्तों को घुमाने वाले लोगों को पानी की छोटी बोतल साथ रखने और जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

कुत्तों के पेशाब से पेड़ों को क्यों हो सकता है नुकसान?

कुत्ते अक्सर दूसरे कुत्तों की गंध पहचानने और अपनी मौजूदगी का संकेत छोड़ने के लिए पेड़ों या आसपास की वस्तुओं पर पेशाब करते हैं। यह उनका स्वाभाविक व्यवहार है। हालांकि, शहरी इलाकों में अगर एक ही पेड़ पर बार-बार ऐसा होता रहे, तो वहां पेशाब जमा होने से पेड़ की सेहत पर असर पड़ सकता है।

कुत्तों के पेशाब में नाइट्रोजन युक्त पदार्थ और लवण होते हैं। अधिक मात्रा में और बार-बार एक ही जगह पर इनके पहुंचने से पेड़ के आसपास की मिट्टी तथा जड़ों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। कुछ परिस्थितियों में तने के निचले हिस्से को भी नुकसान पहुंच सकता है।

हालांकि, हर पेड़ पर पेशाब होने से वह खराब हो जाएगा, ऐसा नहीं है। नुकसान की संभावना पेड़ की प्रजाति, पेशाब की मात्रा, मिट्टी की स्थिति और आसपास के वातावरण जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है।

पानी डालने से क्या हो सकता है फायदा?

इस मुहिम में लोगों से कुत्ते के पेशाब करने के बाद उस जगह पर पानी डालने की अपील की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, लोगों को करीब 270 मिलीलीटर की छोटी बोतल उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है, जिसे टाउन हॉल से लिया जा सकता है।

पानी डालने से ताजे पेशाब के अवशेष पतले होकर आसपास फैल सकते हैं। इससे एक ही जगह पर पदार्थों की अधिक मात्रा जमा होने की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है। इससे दुर्गंध भी कुछ हद तक कम हो सकती है।

हालांकि, थोड़ी मात्रा में पानी डालना पेड़ को नुकसान से पूरी तरह सुरक्षित रखने की गारंटी नहीं है। यह पहल मुख्य रूप से लोगों को जागरूक करने और जिम्मेदार आदतों को बढ़ावा देने के लिए है।

कुत्तों पर पूरी तरह पाबंदी लगाने के बजाय जागरूकता पर जोर

डॉग ट्रेनर कोनी स्पोरर के मुताबिक, पालतू जानवरों से जुड़ी समस्याओं का समाधान केवल सख्त नियम बनाने से नहीं निकलता। लोगों को यह समझाना भी जरूरी है कि वे अपने जानवरों को घुमाते समय आसपास के लोगों और पर्यावरण का ध्यान कैसे रखें।

वियना की इस मुहिम में भी इसी तरह का रास्ता अपनाया गया है। कुत्तों के सामान्य व्यवहार को पूरी तरह रोकने के बजाय उनके मालिकों से छोटी-छोटी जिम्मेदारियां निभाने की अपील की जा रही है। इससे पालतू जानवरों को घुमाने की सुविधा और शहर की हरियाली की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है।

बर्लिन में भी अपनाए गए अलग तरीके

जर्मनी की राजधानी बर्लिन में भी कुत्तों के पेशाब से पेड़ों को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए अलग-अलग उपाय किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, चार्लोटेनबर्ग-विल्मर्सडॉर्फ इलाके में ऐसे विशेष पत्थरों का इस्तेमाल किया गया, जिनकी ओर कुत्तों को आकर्षित करने की कोशिश की जाती है, ताकि वे पेड़ों के बजाय निर्धारित जगहों का इस्तेमाल करें।

कुछ इलाकों में पेड़ों की प्रजातियों के चयन पर भी ध्यान दिया गया है, क्योंकि सभी पेड़ शहरी परिस्थितियों और पेशाब के बार-बार संपर्क को एक समान तरीके से सहन नहीं करते।

इन प्रयासों से पता चलता है कि शहरों में पालतू जानवरों की जरूरतों और सार्वजनिक हरियाली की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना स्थानीय प्रशासन के लिए एक अहम मुद्दा बन रहा है।

छोटी आदत से शहर की हरियाली को मिल सकती है मदद

शहरों में पेड़ छाया देने, तापमान कम करने और पर्यावरण को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बढ़ती गर्मी और जलवायु परिवर्तन के दौर में उनकी देखभाल और भी जरूरी हो गई है।

वियना की यह पहल लोगों को याद दिलाती है कि सार्वजनिक जगहों की देखभाल केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। पालतू जानवरों को घुमाने वाले लोग भी अपनी छोटी-छोटी आदतों से इसमें योगदान दे सकते हैं। पानी की बोतल साथ रखना भले ही मामूली बदलाव हो, लेकिन जागरूकता और नियमित देखभाल के साथ ऐसे कदम शहरी हरियाली की सुरक्षा में मदद कर सकते हैं।

सत्य रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह लेख प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट में उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। पानी डालने से पेड़ों को होने वाले नुकसान में कितनी कमी आती है, इसका प्रभाव स्थानीय परिस्थितियों और पेड़ की प्रजाति पर निर्भर कर सकता है।

contact.satyareport@gmail.com

Leave a Reply