
लखनऊ। अगर आपके मोबाइल पर ग्रीन गैस कनेक्शन का बिल अपडेट करने, मीटर सत्यापन या KYC पूरा करने के नाम पर कोई संदिग्ध APK फाइल भेजी जाती है तो उसे डाउनलोड या इंस्टॉल करने से बचें। साइबर ठग WhatsApp, SMS और फोन कॉल के जरिए लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं। लखनऊ क्राइम ब्रांच ने ऑपरेशन डिजिटल कवच के तहत लोगों को इस नए साइबर फ्रॉड से सावधान करते हुए एडवाइजरी जारी की है।
साइबर जालसाज उपभोक्ताओं से संपर्क कर बिल अपडेट, मीटर अथवा KYC सत्यापन का बहाना बनाते हैं। इसके बाद उन्हें संदिग्ध APK फाइल डाउनलोड कर मोबाइल में इंस्टॉल करने के लिए कहा जाता है। क्राइम ब्रांच के मुताबिक, ऐसी फाइल मोबाइल में इंस्टॉल होने के बाद संवेदनशील जानकारी और मोबाइल की गतिविधियों तक ठगों की पहुंच बन सकती है।
गलती से APK इंस्टॉल हो गई तो सबसे पहले क्या करें?
एडीसीपी क्राइम किरन यादव के मुताबिक, अगर किसी ने गलती से संदिग्ध APK फाइल इंस्टॉल कर ली है तो घबराने के बजाय सबसे पहले मोबाइल का वाईफाई और मोबाइल डेटा बंद कर देना चाहिए।
इसके बाद संदिग्ध एप को कोई नई अनुमति नहीं देनी चाहिए। साइबर स्वच्छता केंद्र की वेबसाइट से उपलब्ध सुरक्षा टूल की मदद से मोबाइल को स्कैन करने की सलाह दी गई है।
जरूरी पासवर्ड और क्रेडेंशियल संभव हो तो किसी दूसरे सुरक्षित डिवाइस से बदलें। साथ ही अपने बैंक खातों और UPI लेनदेन की तत्काल जांच करें। कोई संदिग्ध लेनदेन दिखाई दे तो तुरंत बैंक को इसकी जानकारी दें।
OTP और बैंकिंग डेटा पर हो सकता है निशाना
क्राइम ब्रांच के मुताबिक संदिग्ध APK के जरिए साइबर अपराधी OTP, SMS, बैंकिंग से जुड़ी जानकारी और निजी डेटा हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं। इस जानकारी का इस्तेमाल आर्थिक धोखाधड़ी के लिए किया जा सकता है।
ऐसे में किसी अनजान नंबर से आए लिंक या APK को सिर्फ इसलिए इंस्टॉल न करें क्योंकि संदेश में बिल, KYC या मीटर अपडेट करने की बात कही गई है।
ठगी हो जाए तो 1930 पर करें कॉल
अगर संदिग्ध APK इंस्टॉल करने के बाद खाते से कोई रकम निकलती है या साइबर ठगी हो जाती है तो बिना देरी किए 1930 पर कॉल करने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
समय पर शिकायत करने से ठगी की रकम को रोकने की कोशिश में मदद मिल सकती है।
संदिग्ध WhatsApp मैसेज और नंबर डिलीट न करें
क्राइम ब्रांच ने लोगों से खास तौर पर कहा है कि संदिग्ध WhatsApp मैसेज या SMS को तुरंत डिलीट न करें। जिस नंबर से APK या WhatsApp मैसेज आया है, उसका मोबाइल नंबर, पूरा मैसेज और स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें।
इन जानकारियों को लखनऊ पुलिस क्राइम ब्रांच की ऑर्गनाइज्ड क्राइम हेल्पलाइन 7839861034 पर भेजने को कहा गया है।
एडीसीपी क्राइम किरन यादव के मुताबिक, जनता से मिला एक संदिग्ध मोबाइल नंबर और एक WhatsApp मैसेज भी साइबर अपराधियों की पहचान करने और उनके नेटवर्क तक पहुंचने में मददगार साबित हो सकता है।
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