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​40 की उम्र में नौकरी छोड़ी तो क्या बंद हो जाएगा PF का ब्याज? EPFO का ये नियम जान लें

40 की उम्र में नौकरी छोड़ने के बाद भी आपके ईपीएफ खाते पर ब्याज तुरंत बंद नहीं होता है. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ के मौजूदा दिशानिर्देशों के मुताबिक, 55 साल से पहले नौकरी छोड़ने वाला कर्मचारी 58 साल की उम्र तक अपने ईपीएफ बैलेंस पर ब्याज पा सकता है. यानी 40 साल की उम्र में नौकरी छोड़ने पर जमा राशि अगले 18 साल तक ब्याज कमा सकती है. हालांकि, इसके लिए खाता लागू नियमों के तहत ब्याज पाने के योग्य होना चाहिए.

​40 की उम्र में नौकरी छोड़ी तो क्या बंद हो जाएगा PF का ब्याज? EPFO का ये नियम जान लें

40 की उम्र में नौकरी छोड़ी तो क्या होगा

नौकरी छोड़ने के बाद नियोक्ता की ओर से ईपीएफ खाते में नई मासिक राशि जमा होना बंद हो जाती है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि खाते में पहले से जमा रकम पर उसी दिन से ब्याज मिलना बंद हो जाएगा. ईपीएफओ की अक्सर पूछे जाने वाले सवालों की जानकारी के मुताबिक, 55 साल की उम्र से पहले स्वैच्छिक रूप से नौकरी छोड़ने वाला कर्मचारी 58 साल की उम्र तक ब्याज पा सकता है. इसलिए 40 साल में नौकरी छोड़ने वाला व्यक्ति अपनी जमा ईपीएफ राशि को खाते में रखता है, तो मौजूदा नियमों के तहत वह 58 साल तक ब्याज कमा सकती है.

40 से 58 साल तक ब्याज का नियम

ईपीएफओ ने अपने अक्सर पूछे जाने वाले सवालों में 50 साल की उम्र में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले कर्मचारी का उदाहरण दिया है. इसके मुताबिक, ऐसे कर्मचारी को 58 साल की उम्र तक ईपीएफ पर ब्याज मिलता रह सकता है, क्योंकि इस स्थिति में खाता 58 साल की उम्र तक निष्क्रिय नहीं माना जाता. इसी आधार पर 40 साल की उम्र में नौकरी छोड़ने वाले व्यक्ति के लिए भी ब्याज 58 साल तक जारी रह सकता है, बशर्ते खाता लागू ईपीएफ नियमों के तहत ब्याज के लिए पात्र बना रहे.

कब निष्क्रिय हो जाता है ईपीएफ खाता

ईपीएफओ के मुताबिक, सेवानिवृत्ति, स्थायी रूप से विदेश जाने या सदस्य की मृत्यु के बाद तीन साल तक कोई योगदान नहीं मिलने पर खाता निष्क्रिय श्रेणी में आ सकता है. निष्क्रिय खाते पर आगे ब्याज नहीं मिलता. हालांकि, 55 साल से पहले नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों को लेकर ईपीएफओ की विशेष जानकारी में 58 साल तक ब्याज मिलने की बात कही गई है. ईपीएफओ के अनुसार, 58 साल की उम्र में सेवानिवृत्त होने पर ब्याज 58 साल तक, 50 साल में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पर 58 साल तक और 60 साल में सेवानिवृत्ति पर 63 साल तक ब्याज दिया जा सकता है.

नौकरी छोड़ने के बाद पैसा निकालना जरूरी नहीं

नौकरी छोड़ने के बाद ईपीएफ की पूरी रकम तुरंत निकालना जरूरी नहीं है. अगर कोई व्यक्ति दोबारा ईपीएफ के दायरे वाली नौकरी शुरू करने की उम्मीद करता है, तो पुरानी ईपीएफ राशि को नए नियोक्ता के ईपीएफ खाते में ट्रांसफर करना अधिक उपयोगी हो सकता है. ईपीएफओ भी ईपीएफ कवर वाले संस्थान में दोबारा नौकरी शुरू करने वाले सदस्यों को पुरानी पीएफ राशि नए खाते में ट्रांसफर करने की सलाह देता है. इससे पहले से जमा रिटायरमेंट फंड को बनाए रखने में मदद मिलती है.

ब्याज दर के हिसाब से बढ़ेगा बैलेंस

ईपीएफ पर मिलने वाला ब्याज संबंधित वित्त वर्ष के लिए घोषित ब्याज दर के आधार पर तय होता है. इसलिए कई वर्षों तक खाते में रखी गई रकम आखिर में कितनी होगी, यह उस अवधि में लागू ब्याज दरों और जिस बैलेंस पर ब्याज की गणना होगी, उस पर निर्भर करेगा. नौकरी छोड़ने वाले सदस्यों के लिए अपना यूएएन, केवाईसी और बैंक से जुड़ी जानकारी अपडेट रखना भी जरूरी है. बाद में ईपीएफ कवर वाली नौकरी मिलने पर पुराने खाते की राशि को नए खाते में ट्रांसफर किया जा सकता है.

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