5 Trillion Economy: भारत की अर्थव्यवस्था इस समय एक दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है. एक तरफ देश की घरेलू आर्थिक रफ्तार पहले से ज्यादा तेज हो रही है, वहीं दूसरी तरफ डॉलर के मुकाबले गिरता रुपया एक बड़े सपने की राह में रोड़ा बन गया है. साल 2027 में भारत जापान के साथ ब्रिटेन को भी पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बनने जा रहा है. लेकिन 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने के लिए देश को अब एक साल का अतिरिक्त इंतजार करना पड़ेगा.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अक्टूबर महीने के ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक’ डेटा के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था अब साल 2028 के बजाय 2029 में 5 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा पार करेगी. अप्रैल में अनुमान लगाया गया था कि भारत 2028 में ही ये मुकाम पा लेगा, लेकिन रुपये की गिरावट ने डॉलर के हिसाब से सारा गणित बदल दिया है.
डॉलर के मुकाबले कमजोर रुपये ने बिगाड़ा 2028 का गणित
वैश्विक स्तर पर किसी भी देश की आर्थिक रैंकिंग तय करने के लिए उसकी जीडीपी को डॉलर में मापा जाता है. आईएमएफ ने रुपये के हिसाब से भारत के आर्थिक उत्पादन का अनुमान बढ़ाया है, लेकिन डॉलर में साल 2028 की नॉमिनल जीडीपी का अनुमान घटा दिया है. छह महीने पहले अप्रैल में अनुमान था कि 2028 में भारतीय इकोनॉमी 5.1 ट्रिलियन डॉलर की हो जाएगी. अब इसे घटाकर 4.996 ट्रिलियन डॉलर कर दिया गया है.
आईएमएफ के अक्टूबर के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2026 में भारत की अर्थव्यवस्था 4.06 ट्रिलियन डॉलर और 2027 में 4.52 ट्रिलियन डॉलर रहेगी. साल 2028 में 4.996 ट्रिलियन डॉलर पर रुकने के बाद, 2029 में ये 5.54 ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंच जाएगी. साफ है कि इस लक्ष्य में देरी की वजह आर्थिक सुस्ती नहीं, बल्कि एक्सचेंज रेट में हुआ बदलाव है.
रुपये में बढ़ी देश की कमाई पर एक्सचेंज रेट से लगा झटका
इस रिपोर्ट की खास बात ये है कि घरेलू करेंसी यानी रुपये में भारत का आर्थिक उत्पादन बढ़ा है. साल 2028 में रुपये के हिसाब से भारत की नॉमिनल जीडीपी 477.1 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो अप्रैल के 471.9 लाख करोड़ रुपये के अनुमान से 1.1 फीसदी ज्यादा है. लेकिन जब इसे डॉलर में बदला जाता है, तो कमजोर रुपये के कारण उसी साल का आर्थिक उत्पादन करीब 63 अरब डॉलर घट जाता है.
आईएमएफ ने साल 2027 के लिए डॉलर के मुकाबले रुपये का अनुमानित स्तर 93 से घटाकर 95 कर दिया है. वहीं 2028 के लिए औसत एक्सचेंज रेट का अनुमान अप्रैल के 93.3 रुपये से बदलकर 95.5 रुपये प्रति डॉलर कर दिया है. मनीकंट्रोल की गणना बताती है कि अगर 2028 में अप्रैल वाला 93.3 का रेट ही रहता, तो 477.1 लाख करोड़ रुपये की जीडीपी लगभग 5.11 ट्रिलियन डॉलर बैठती और भारत आसानी से लक्ष्य पार कर लेता. बता दें कि इस साल की शुरुआत से रुपया 5 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है. शुक्रवार को ये 96.73 पर बंद हुआ था, जिसके बाद आरबीआई को गिरावट थामने के लिए कदम उठाने पड़े.
2027 में जापानब्रिटेन छूटेंगे पीछे, 2031 में जर्मनी की बारी
देरी के बावजूद वैश्विक रैंकिंग में भारत का कद तेजी से बढ़ेगा. साल 2027 में भारत 4.52 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा और उससे आगे सिर्फ अमेरिका, चीन और जर्मनी होंगे. तब ब्रिटेन की जीडीपी 4.49 ट्रिलियन डॉलर और जापान की 4.47 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान है. हालांकि, तीनों देशों के बीच फासला काफी कम है, इसलिए करेंसी के उतारचढ़ाव से अंतिम नतीजे बदल भी सकते हैं. आगे चलकर भारतीय इकोनॉमी 2030 में 6.13 ट्रिलियन डॉलर और 2031 में 6.74 ट्रिलियन डॉलर की हो जाएगी. 2031 में भारत जर्मनी को पछाड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा.
घरेलू मांग के दम पर तेज रहेगी भारत की आर्थिक रफ्तार
डॉलर के आंकड़ों में कमी के बीच राहत की बात ये है कि आईएमएफ को भारत की घरेलू ग्रोथ पर पहले से ज्यादा भरोसा है. अक्टूबर की रिपोर्ट में मजबूत घरेलू मांग और तेज आर्थिक गतिविधियों के चलते वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की रियल जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.4 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी कर दिया गया है. साथ ही, 2027 में घरेलू मुद्रा में नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ भी 10.8 फीसदी के पुराने अनुमान से बढ़कर 11.7 फीसदी रहने की उम्मीद है. ये आंकड़े दिखाते हैं कि देश के भीतर विकास की रफ्तार मजबूत है, बस रुपये की कमजोरी ने डॉलर वाले मील के पत्थर तक पहुंचने का समय थोड़ा बढ़ा दिया है.



