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​​​जिस घर में पति करता था भरोसा, वहीं पत्नी ने मालिक के साथ मिलकर रच दिया खौफनाक खेल​​​​

मंदसौर, मध्य प्रदेश की इस पुरानी आपराधिक घटना में एक मजदूर की गुमशुदगी की शिकायत से शुरू हुई जांच ने पुलिस को हत्या के एक गंभीर मामले तक पहुंचा दिया था। मृतक की पत्नी और उसके मालिक के बीच संबंधों को लेकर सवाल उठे, जबकि खेत से शव के जले हुए अवशेष मिलने के बाद मामले ने सनसनीखेज मोड़ ले लिया। इस प्रकरण में मुख्य आरोपी पर हत्या का आरोप लगा था, वहीं पत्नी की भूमिका को लेकर भी पुलिस जांच कर रही थी।

पति के लापता होने की शिकायत लेकर थाने पहुंची पत्नी

घटना 12 अप्रैल की बताई गई है। मंदसौर जिले के भानपुरा थाना क्षेत्र के दूधाखेड़ी गांव की रहने वाली रूपा अपने पति धनराज नाथ के लापता होने की शिकायत लेकर थाने पहुंची। उसके साथ गांव का संपन्न किसान पंकज चौधरी भी था।

पंकज ने पुलिस को बताया कि धनराज उसके खेतों में काम करता था और ट्रैक्टर चलाना उसका मुख्य काम था। उसने खेत पर धनराज और उसकी पत्नी के रहने के लिए एक कमरा भी बनवा रखा था। पंकज के मुताबिक, धनराज 11 अप्रैल से लापता था और उसका मोबाइल फोन भी बंद आ रहा था।

शुरुआत में पुलिस ने इसे गुमशुदगी का सामान्य मामला समझकर रिपोर्ट दर्ज की और तलाश करने का आश्वासन दिया। लेकिन थाने से लौटते समय रूपा और पंकज के व्यवहार ने पुलिस का ध्यान खींचा। इसके बाद गांव में पूछताछ कराई गई, जिसमें दोनों के बीच कथित नजदीकियों की बात सामने आने का दावा किया गया।

पूछताछ में बदले बयान तो गहराया शक

गांव से मिली जानकारी के बाद पुलिस ने रूपा और पंकज को पूछताछ के लिए बुलाया। दोनों से अलग-अलग सवाल किए गए। खबर के मुताबिक, उनके बयानों में विरोधाभास सामने आने के बाद पुलिस का संदेह बढ़ गया।

पूछताछ के दौरान पंकज ने कथित तौर पर धनराज की हत्या करने की बात स्वीकार की। बताया गया कि वह रूपा के साथ अपना रिश्ता बनाए रखना चाहता था और इसी वजह से उसने धनराज को रास्ते से हटाने की योजना बनाई थी।

इसके बाद पुलिस ने पंकज की निशानदेही पर उसके खेत में खुदाई कराई। वहां से धनराज के जले हुए अवशेष बरामद किए गए। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कुछ अवशेष खेत में बने कुएं से मिले थे। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

कैसे बढ़ीं रूपा और पंकज के बीच नजदीकियां?

इस मामले की कहानी में बताया गया कि धनराज और रूपा की शादी करीब 15 साल पहले हुई थी। धनराज मेहनत-मजदूरी करके परिवार चलाता था। बाद में पंकज ने धनराज को अपने खेतों में काम पर रख लिया और उसे पहले से बेहतर वेतन देने की बात कही।

धनराज को शुरुआत में यह समझ नहीं आया कि पंकज अचानक उस पर इतना मेहरबान क्यों हो रहा है। आरोपों के मुताबिक, पंकज की दिलचस्पी धनराज की पत्नी रूपा में थी। वह अलग-अलग बहानों से रूपा को खेत पर बुलाने लगा और कभी-कभी धनराज को दूसरे काम से बाहर भेज देता था।

रिपोर्ट में दावा किया गया कि पंकज ने रूपा को पैसे और उपहार देने शुरू किए। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने की बात कही गई। बाद में धनराज को उनके संबंधों पर शक होने लगा और उसने इसका विरोध करना शुरू कर दिया।

हालांकि, इस हिस्से में बताए गए घटनाक्रम और संबंधों से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन्हें मामले की रिपोर्ट में सामने आए आरोपों और कथित घटनाक्रम के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

खेत पर बुलाकर हत्या करने का आरोप

रिपोर्ट के अनुसार, 11 अप्रैल की रात पंकज ने धनराज को खेत पर बुलाया। आरोप है कि वहां उसे शराब पिलाने के बाद धारदार हथियार से उसकी हत्या कर दी गई। इसके बाद शव को जलाने और खेत में गड्ढा खुदवाकर अवशेष दफन करने की बात सामने आई।

बताया गया कि आरोपी ने शव को इस तरह ठिकाने लगाने की कोशिश की, जिससे किसी को शक न हो। लेकिन धनराज के लापता होने की शिकायत और पुलिस की पूछताछ के बाद मामला खुलने लगा। खेत से अवशेष मिलने के बाद जांच को महत्वपूर्ण आधार मिला।

पत्नी ने खुद को बताया था निर्दोष

मामले में रूपा की भूमिका भी पुलिस के संदेह के दायरे में आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस उससे पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही थी कि उसे कथित हत्या की योजना की जानकारी थी या नहीं और घटना में उसकी कोई भूमिका थी या नहीं।

दूसरी ओर, रूपा ने खुद को निर्दोष बताते हुए आरोप लगाया था कि पंकज ने उसकी गरीबी और मजबूरी का फायदा उठाया तथा उसके साथ जबरदस्ती की। इस दावे और उसके विरुद्ध उठे संदेह के बीच उसकी भूमिका का निर्धारण जांच के आधार पर होना था।

इसलिए केवल कथित संबंधों या गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराने के आधार पर रूपा को हत्या में शामिल मानना उचित नहीं होगा।

गुमशुदगी से शुरू हुई जांच ने खोला हत्या का मामला

धनराज के लापता होने की शिकायत से शुरू हुई जांच में पुलिस को खेत से उसके जले हुए अवशेष मिले और पंकज के खिलाफ हत्या का मामला सामने आया। इस घटना ने दिखाया कि गुमशुदगी के मामलों में छोटे-से सुराग और बयानों में विरोधाभास भी जांच की दिशा बदल सकते हैं।

हालांकि, उपलब्ध पुरानी रिपोर्ट में मामले की शुरुआती जांच और आरोपों का विवरण है। इसमें अदालत के अंतिम फैसले या पत्नी की भूमिका पर जांच के अंतिम निष्कर्ष की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।

सत्य रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह पुरानी घटना पर आधारित सत्यकथा है, जिसे उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर दोबारा लिखा गया है। इसमें वर्णित आरोपों और कथित घटनाक्रम को अदालत में सिद्ध अंतिम तथ्य न माना जाए।

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