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बिहार में कचरा और पराली से किसानों की होगी कमाई! सरकार खरीदेगी इससे बनी बिजली, एक यूनिट का कितना पैसा देगी?

Patna News: बिहार में अब कचरा और किसानों की पराली भी बिजली उत्पादन का जरिया बनेगी. बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने अक्षय ऊर्जा स्रोतों से बनने वाली बिजली की नई बिक्री दरें तय कर दी हैं. आयोग के इस फैसले के बाद राज्य में बिजली कंपनियां नगर निकायों के ठोस कचरे, बायोमास और गन्ने की खोई से पैदा होने वाली बिजली को निर्धारित कीमतों पर खरीदेंगी. इस पहल से न केवल कचरा प्रबंधन में सुधार होगा, बल्कि किसानों को उनकी फसल के अवशेषों का सही मोल भी मिल सकेगा.

बिहार में कचरा और पराली से किसानों की होगी कमाई! सरकार खरीदेगी इससे बनी बिजली, एक यूनिट का कितना पैसा देगी?

बिहार विद्युत विनियामक आयोग के अध्यक्ष आमिर सुबहानी और सदस्य पुरुषोत्तम सिंह यादव ने अक्षय ऊर्जा स्रोतों के 13 अलगअलग प्रकार के प्लांट से उत्पादित बिजली की दरें तय की हैं. नगर निकायों के ठोस कचरे से बनने वाली बिजली को बिजली कंपनी 7.07 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदेगी.

गन्ने की खोई से बनी बिजली

चीनी मिलों या गन्ने की खोई से उत्पादित होने वाली बिजली के लिए 8.15 रुपये प्रति यूनिट की दर तय की गई है. आयोग ने 9 प्रकार के अलगअलग बायोमास प्लांट से बनने वाली बिजली की दर 9.92 रुपये से लेकर 10.62 रुपये प्रति यूनिट तक तय की है. आयोग द्वारा सुनाया गया यह नया फैसला 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो जाएगा.

आयोग के दिशानिर्देशों के मुताबिक, 31 मार्च तक लगने वाले पावर प्लांट्स के फिक्स चार्ज में अगले 25 वर्षों तक कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. केवल समयसमय पर उत्पादन की दरों में ही संशोधन संभव होगा. लंबे समय तक फिक्स चार्ज स्थिर रहने से राज्य में अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में काम करने वाली निजी कंपनियों और निवेशकों को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा.

पराली और फसल अवशेष बेचकर कमाई कर सकेंगे किसान

इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा बिहार के किसानों को होने वाला है. राज्य में बायोमास आधारित पावर प्लांट लगने से किसान अपनी पराली और फसलों के बचे अवशेषों को जलाकर नष्ट करने के बजाय बायोमास प्लांट संचालकों को बेच सकेंगे. इससे खेतों में पराली जलाने की समस्या से मुक्ति मिलेगी, पर्यावरण स्वच्छ रहेगा और किसानों को अतिरिक्त आमदनी का नया जरिया हासिल होगा.

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