
वारसॉ (पोलैंड). खूबसूरती पाने की चाहत जब एक पागलपन या मानसिक बीमारी का रूप ले ले, तो इसके नतीजे कितने खौफनाक हो सकते हैं, इसका एक जीता-जागता और डरावना उदाहरण पोलैंड से सामने आया है. यहां एक 26 साल की युवती एल्वा ने महंगे डॉक्टरों और कॉस्मेटिक क्लीनिकों की फीस से बचने के लिए इंटरनेट से नकली और बिना लाइसेंस वाले ब्यूटी प्रोडक्ट्स खरीदे. इसके बाद उसने किसी भी ट्रेनिंग के बिना, घर पर ही खुद से अपने चेहरे पर सिलिकॉन के इंजेक्शन लगाना शुरू कर दिया. इस जानलेवा लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि आज उसके चेहरे की हालत बद से बदतर हो चुकी है. आईने में एल्वा अब खुद को भी पहचान नहीं पा रही है.
मूल रूप से पोलैंड के एक छोटे से शहर में लड़के के रूप में जन्मी एल्वा पिछले कई सालों से अपनी शारीरिक बनावट और लुक को लेकर मानसिक तनाव से गुजर रही थीं. अपने चेहरे को बदलने की चाहत में उसने कुछ साल पहले ब्लैक मार्केट से संदिग्ध कॉस्मेटिक उत्पाद ऑर्डर करना शुरू किया. शुरुआत में उन्होंने खुद ही चेहरे की चर्बी घटाने वाली दवाओं के इंजेक्शन सप्ताह में दो बार अपने चेहरे पर लगाने शुरू किए. इसका असर यह हुआ कि उसका चेहरा जरूरत से ज्यादा पतला और पिचक गया. इस नुकसान की भरपाई करने के लिए उसने इंटरनेट से इंजेक्टेबल लिपोलिसिस और नकली सिलिकॉन खरीदा और उसे चेहरे पर इंजेक्ट करना शुरू कर दिया.
एल्वा ने एक पोलिश समाचार आउटलेट को बताया कि शुरुआत में वे सप्ताह में एक बार सिलिकॉन इंजेक्शन लगाती थीं, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें इसकी ऐसी लत लगी कि वे हर दिन अपने चेहरे पर खुद ही सुई चुभाने लगीं. उस समय वे वारसॉ शहर में रह रही थीं और उनकी अधिकांश कमाई कमरे के किराए में चली जाती थी, इसलिए उनके पास किसी एक्सपर्ट डॉक्टर के पास जाने के पैसे नहीं थे. ऐसे में बिना किसी डॉक्टरी प्रशिक्षण और भारी मात्रा में नकली सिलिकॉन का इस्तेमाल करने के कारण एल्वा के पूरे चेहरे पर गंभीर सूजन आ गई. उनकी त्वचा पर गहरे निशान (Scars) पड़ गए हैं और उनकी आंखें सूजन के कारण लगभग पूरी तरह बंद हो चुकी हैं.
इस मामले पर चिंता जताते हुए एस्थेटिक मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ मारेक वासिलुक ने कहा कि एल्वा ने जिन उत्पादों का इस्तेमाल किया है, वे प्रमाणित नहीं हैं और बेहद खतरनाक हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि भले ही अभी कोई गंभीर संक्रमण न दिख रहा हो, लेकिन अगले छह महीनों में यह सूजन जानलेवा इन्फेक्शन का रूप ले सकती है, जिसमें उनकी आंखों को सबसे बड़ा खतरा है. वहीं, मनोवैज्ञानिक पॉलिना मिएर्जेजेवस्का का मानना है कि एल्वा ‘बॉडी डिस्मॉर्फिया’ नाम की एक गंभीर मानसिक बीमारी से पीड़ित हैं, जिसमें व्यक्ति अपने वास्तविक रूप को नापसंद करने लगता है और जोखिमों की परवाह किए बिना काल्पनिक रूप पाने की जिद में अंधा हो जाता है. डॉक्टरों के अनुसार, एल्वा को वापस सामान्य स्थिति में लाने के लिए पहले मानसिक काउंसलिंग और फिर चेहरे के नुकसान का आकलन करने के लिए एमआरआई कराना होगा.



