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मुरादाबाद में गूगल मैप की गलत नेविगेशन से छूटा NEET का एग्जाम, 23 किलोमीटर दूर ले गई लोकेशन… रोते-बिलखते रहे छात्र नहीं खुला गेट

गूगल मैप की एक गंभीर तकनीकी लापरवाही के चलते मुरादाबाद में आयोजित NEETUG के कई मेधावी परीक्षार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है. रविवार को परीक्षा के दौरान गूगल मैप ने परीक्षा केंद्र ‘आर.एन. इंटर कॉलेज’ की लोकेशन गलत दिखाए जाने के कारण कई छात्रछात्राएं समय पर अपने निर्धारित परीक्षा केंद्रों तक नहीं पहुंच सके और उन्हें परीक्षा से वंचित होना पड़ा है.

मुरादाबाद में गूगल मैप की गलत नेविगेशन से छूटा NEET का एग्जाम, 23 किलोमीटर दूर ले गई लोकेशन… रोते-बिलखते रहे छात्र नहीं खुला गेट

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में डिजिटल नेविगेशन पर भरोसा करना छात्रों के लिए उस समय भारी पड़ गया, जब नीट की परीक्षा देने पहुंचे छात्रों को मैप ने सही केंद्र से करीब 23 किलोमीटर दूर कांठ रोड स्थित किसी अन्य विद्यालय की तरफ भेज दिया था. जब तक परीक्षार्थियों को इस बड़ी गलती का एहसास हुआ और वे वापस सही परीक्षा केंद्र तक पहुंचे, तभी एंट्री का निर्धारित समय खत्म हो चुका था.

रोतेबिलखते रहे छात्र

परीक्षा केंद्र के मुख्य द्वार पर तैनात सुरक्षाकर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने नियमों का हवाला देते हुए मात्र 10 से 15 मिनट की देरी से पहुंचे छात्रों को अंदर प्रवेश देने से साफ इनकार कर दिया है. इसके चलते संभल से आए परीक्षार्थी फैजान अली और एक अन्य छात्र सार्थक सहित दर्जनों अभ्यर्थियों की सालभर की कड़ी मेहनत पर पानी फिर गया है. केंद्र के बाहर बदहवास खड़े पीड़ित अभिभावकों और रोतेबिलखते छात्रों ने सरकार और प्रशासन से मानवीय आधार पर गेट खोलने और परीक्षा में शामिल होने देने की गुहार लगाई, लेकिन सख्त नियमों के कारण उन्हें मायूस लौटना पड़ा है.

गलत नेविगेशन से छूटा पेपर

परीक्षा केंद्र के बाहर परेशान दिखे अभिभावक इकराम ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वे बच्चों को लेकर समय से निकले थे, लेकिन गूगल मैप की गलत नेविगेशन प्रणाली ने उन्हें कांठ रोड की ओर आर.एन. स्कूल की लोकेशन दिखा दी थी. इसके कारण वे मुख्य केंद्र से करीब 23 किलोमीटर आगे चले गए और वहां से वापस लौटने में उन्हें 15 मिनट की देरी हो गई. पीड़ित अभिभावकों का कहना है कि इस तकनीकी खराबी और मजबूरी को देखते हुए शासनप्रशासन को नियमों में थोड़ी ढील देकर गेट खोलना चाहिए था, क्योंकि इस परीक्षा के लिए बच्चे साल भर से तैयारी कर रहे थे. इस गंभीर लापरवाही ने तकनीकी निर्भरता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.

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