
कोच्चि: भारतीय नौसेना और अमेरिकी नौसेना के बीच समुद्री सुरक्षा और ऑपरेशनल सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से कोच्चि स्थित सदर्न नेवल कमांड में संयुक्त एक्सप्लोसिव ऑर्डनेंस डिस्पोजल अभ्यास शुरू हुआ है। यह द्विपक्षीय अभ्यास 10 से 14 अगस्त तक पांच दिनों तक चलेगा।
इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की विशेषज्ञ डाइविंग और EOD टीमों के बीच आपसी समन्वय बढ़ाना, विशेषज्ञता साझा करना और मौजूदा EOD चुनौतियों से निपटने की क्षमता को मजबूत करना है।
विशेषज्ञता और तकनीकों का होगा आदानप्रदान
10 अगस्त से शुरू हुए इस अभ्यास के दौरान दोनों नौसेनाओं के कर्मियों के बीच पेशेवर सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। कार्यक्रम में विषयविशेषज्ञों का आदानप्रदान, क्रॉसट्रेनिंग, उपकरणों का प्रदर्शन और परिस्थितियों पर आधारित प्रैक्टिकल ट्रेनिंग शामिल है।
इन गतिविधियों के जरिए दोनों पक्ष मौजूदा EOD तकनीकों, उन्नत तकनीकी क्षमताओं और बेहतर ऑपरेशनल प्रक्रियाओं से जुड़े अनुभव साझा कर रहे हैं।
एकदूसरे की क्षमताओं को समझने का मौका
संयुक्त अभ्यास दोनों नौसेनाओं के कर्मियों को एकदूसरे की क्षमताओं, ऑपरेशनल कॉन्सेप्ट और पेशेवर कार्यप्रणाली को करीब से समझने का अवसर देता है।
संयुक्त प्रशिक्षण और संवाद के माध्यम से प्रक्रियाओं में सुधार, आपसी समझ बढ़ाने और जटिल तथा बदलती EOD चुनौतियों से प्रभावी तरीके से निपटने की क्षमता विकसित करने पर जोर है।
2005 से हो रहा है संयुक्त अभ्यास
भारतीय नौसेना और अमेरिकी नौसेना के बीच 2005 से संयुक्त साल्वेज और EOD अभ्यास आयोजित किए जा रहे हैं। कोच्चि में चल रहा मौजूदा अभ्यास इस द्विपक्षीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आठवां संस्करण है।
यह अभ्यास दोनों नौसेनाओं के बीच लंबे समय से जारी सहयोग को आगे बढ़ाने के साथसाथ ऑपरेशनल विशेषज्ञता साझा करने और विशेष नौसैनिक अभियानों में समन्वय मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
पांच दिनों में मजबूत होगा ऑपरेशनल तालमेल
पांच दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान संयुक्त गतिविधियों और विशेषज्ञों के बीच संवाद से दोनों देशों के नौसैनिक कर्मियों को अपने अनुभव साझा करने और प्रक्रियाओं को बेहतर समझने का अवसर मिलेगा।
अभ्यास के जरिए दोनों पक्षों के बीच आपसी तालमेल, पेशेवर समझ और संयुक्त ऑपरेशनल क्षमता को और मजबूत करने की उम्मीद है।
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