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हिंद महासागर में भारत का बड़ा दांव! जानिए क्यों रुका MTNL का मॉरीशस से एग्जिट प्लान

भारत ने कर्ज में डूबी सरकारी कंपनी महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड की मॉरीशसबेस्ड टेलीकॉम यूनिट, महानगर टेलीफोन लिमिटेड में अपनी हिस्सेदारी बेचने की योजना को रोक दिया है. मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों के अनुसार, सरकार द्वीप पर अपनी मौजूदगी बनाए रखना चाहती है. कंपनी के बोर्ड ने अगस्त 2024 में नॉन कोर असेट्स ?से पैसा जुटाने और कर्ज चुकाने की बड़ी योजना के तहत मॉरीशस से बाहर निकलने के कदम को मंजूरी दी थी.

आंतरिक चर्चाओं के बारे में बात करते हुए नाम न बताने की शर्त पर एक अधिकारी ने मिंट की रिपोर्ट में कहा कि विदेश मंत्रालय रणनीतिक कारणों से प्रस्तावित बिक्री के पक्ष में नहीं है. भारत और मॉरीशस ने मार्च 2025 में अपने संबंधों को और बेहतर बनाया था. टेलीकॉम कंपनी की मॉरीशस यूनिट CHiLi ब्रांड के तहत काम करती है और इसे 20 साल पहले शुरू किया गया था.

मार्च में खत्म हुए साल में इसने लगभग 79 करोड़ रुपए का रेवेन्यू कमाया, जो पिछले साल के मुकाबले 3 फीसदी कम था, जबकि नुकसान बढ़कर 6.5 करोड़ रुपए हो गया. एक दूसरे अधिकारी ने कहा कि फिलहाल, मॉरीशस यूनिट में हिस्सेदारी बेचने की कोई योजना नहीं है. विदेश मंत्रालय भी इस हिस्सेदारी को बेचने के पक्ष में नहीं था क्योंकि वे इस इलाके को जियो पॉलिटिकल रूप से काफी अहम मानते हैं. उन्होंने आगे कहा कि MTNL के लिए मॉरीशस का कारोबार छोटा है और बिक्री से बहुत ज्यादा रकम नहीं मिलती.

मोबाइल टेलीडेंसिटी 170 फीसदी से ज्यादा

मिंट की रिपोर्ट के अनुसार कंपनी का कामकाज मूल कंपनी से डेप्युटेशन पर आए कर्मचारी संभालते हैं. DoT की वित्त वर्ष 2026 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, मॉरिशस में 10 से ज्यादा MTNL कर्मचारी डेप्युटेशन पर हैं. इसके अलावा, दूसरे कामों के लिए लोकल लेवल पर आउटसोर्सिंग भी की जाती है. रिपोर्ट के अनुसार, मॉरिशस की आबादी 12.5 लाख है और वहां मोबाइल टेलीडेंसिटी 170 फीसदी से ज्यादा है.

वहां कस्टमर्स की संख्या 4 लाख से ज्यादा है और अब वहां 5G सर्विस शुरू करने की तैयारी चल रही है. टेलीडेंसिटी का मतलब किसी इलाके में प्रति 100 लोगों पर टेलीफोन कनेक्शन की संख्या है. 100 फीसदी से ज्यादा टेलीडेंसिटी का मतलब है कि प्रति व्यक्ति एक से ज्यादा कनेक्शन या सिम हैं.

आंशिक हिस्सेदारी बेचने के पक्ष में तर्क

DoT ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कंपनी के सभी खर्च उसके अपने संसाधनों से पूरे किए जाते हैं, जिसमें उपकरण खरीदने के लिए किया गया कैपिटल खर्च भी शामिल है. साथ ही, मॉरीशस यूनिट पर कोई कर्ज नहीं है. टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व प्रिंसिपल एडवाइजर सत्य एन. गुप्ता ने कहा कि CDMAबेस्ड मोबाइल नेटवर्क के एक्सपीरियंस के दम पर, MTNL ने सबसे पहले अपनी 2G सर्विस के साथ मॉरीशस के मार्केट में कदम रखा था.

सरकार के लिए 49 फीसदी हिस्सेदारी बेचना और 51 फीसदी कंट्रोल के साथ मालिकाना हक अपने पास रखना समझदारी भरा कदम होगा. हिस्सेदारी बेचने से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल भारत में BSNL के विस्तार या MTNL के कर्ज का कुछ हिस्सा चुकाने के लिए किया जा सकता है.

गुप्ता के अनुसार, सरकार इसे केवल भारतीय कंपनियों या निवेशकों को ही बेच सकती है ताकि बाजार में भारत की मजबूत मौजूदगी बनी रहे और भविष्य में मॉरीशस के कारोबार में सुधार के मौके पैदा हों. गौरतलब है कि मॉरीशस उन कंपनियों के लिए भी एक अहम जगह रही है जो वहां अपनी यूनिट्स स्थापित करना चाहती हैं, क्योंकि वहां का माहौल कारोबार के लिए काफी अनुकूल है और टैक्स ट्रीटी दोहरे टैक्स से बचने में मदद करती हैं.

कितना है एमटीएनएल पर कर्ज

BSNL द्वारा संचालित MTNL को वित्त वर्ष 2026 में 3,107 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ, जो वित्त वर्ष 2025 के 3,328 करोड़ रुपए के नुकसान से कम है. वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का ऑपरेशन से होने वाला रेवेन्यू सालाना आधार पर 15.3 फीसदी घटकर 956 करोड़ रुपए रह गया. जून के आखिर तक कंपनी पर 37,223 करोड़ रुपए की देनदारियां थीं और वह अपने बैंक लोन पर ब्याज और किस्त चुकाने में चूक गई है, जिसके कारण उसके सभी बैंक कर्ज को नॉनपरफॉर्मिंग एसेट्स के तौर पर कैटेगराइज किया गया है. BSNL और MTNL ने 1 जनवरी 2025 से लागू होने वाले एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत BSNL, MTNL की टेलीकॉम सेवाओं को EBITDAन्यूट्रल आधार पर चला रही है. कुल देनदारियों में से, जून के आखिर तक MTNL का बैंक कर्ज 9,495 करोड़ रुपए था.

842 करोड़ रुपए का नुकसान

जून तिमाही में कंपनी को 842 करोड़ रुपए का नेट नुकसान हुआ, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह नुकसान 943 करोड़ रुपए था. इस तिमाही के दौरान ऑपरेशन से होने वाला उसका रेवेन्यू सालाना आधार पर 41.5 फीसदी घटकर 217 करोड़ रुपए रह गया. पिछले महीने, लोकसभा में MTNL से जुड़े एक सवाल के जवाब में कम्युनिकेशन्स मिनिस्टर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि MTNL पर लगभग 40,000 करोड़ रुपए की कुल देनदारियां हैं, जबकि मार्केट वैल्यू के हिसाब से कंपनी के पास करीब 50,000 करोड़ रुपए के नॉनकोर एसेट्स हैं. मंत्री ने कहा कि सरकार निकट भविष्य में MTNL के लिए किसी नए रीस्ट्रक्चरिंग प्लान को लागू करने पर विचार नहीं कर रही है. शुक्रवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर MTNL के शेयर 0.7 फीसदी गिरकर 26.36 रुपए पर बंद हुए.

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