दुनिया में चल रही उथलपुथल के बीच भारत की अर्थव्यवस्था लगातार रफ्तार के रथ पर सवार है. सरकार की ओर से हाल ही में जारी किए गए आर्थिक आंकड़े बताते हैं कि देश में विकास की रफ्तार बरकरार है. फिर चाहे वह जीडीपी में तेज बढ़ोतरी हो, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर का विस्तार हो, रिकॉर्ड वाहन बिक्री हो या फिर मजबूत GST कलेक्शन और अच्छे निर्यात के आंकड़े हों. ये सभी आंकड़े संकेत देते हैं कि देश में मांग और निवेश लगातार बढ़ रहे हैं.

GDP में मजबूत बढ़त
वित्त वर्ष 202526 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.7% की दर से बढ़ी. इसके साथ ही भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहा. वित्त वर्ष 202526 की अंतिम तिमाही में विकास और तेज हुआ. इस दौरान वास्तविक 7.8% रही, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह 7.0% थी. इस बढ़त में मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर, उपभोक्ता खर्च और निवेश का बड़ा योगदान रहा.
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में लगातार बढ़ोतरी
जून 2026 में HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग PMI 54.2 रहा. यह लगातार 37वें महीने 50 अंक से ऊपर बना रहा, जो मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में लगातार विस्तार का संकेत है. सर्वे के अनुसार उत्पादन, नए ऑर्डर, रोजगार और खरीद गतिविधियों में लगातार बढ़ोतरी हुई. इससे पता चलता है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है और कारोबारियों का भरोसा भी कायम है.
सर्विस सेक्टर बना विकास का बड़ा आधार
HSBC इंडिया सर्विसेज PMI बिजनेस एक्टिविटी इंडेक्स अप्रैल के 58.8 से बढ़कर मई 2026 में 59.8 पर पहुंच गया. यह नवंबर 2025 के बाद सबसे तेज़ विस्तार है. सर्वे के मुताबिक, बेहतर मांग, नए ग्राहकों के जुड़ने और नए कारोबार में बढ़ोतरी की वजह से यह सुधार देखने को मिला. वहीं, नए ऑर्डर पिछले छह महीनों में सबसे तेज़ गति से बढ़े. रोजगार में बढ़ोतरी और निर्यात मांग में सुधार से भी कारोबारी गतिविधियों को मजबूती मिली, जिससे भारत का सर्विस सेक्टर मजबूत बना हुआ है.
औद्योगिक उत्पादन में और तेजी
भारत का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक अप्रैल के 4.9% से बढ़कर मई 2026 में 5.1% हो गया. यह पिछले पांच महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. इस बढ़त में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की 5.5% और बिजली व गैस आपूर्ति की 9.9% वृद्धि का बड़ा योगदान रहा. मैन्युफैक्चरिंग के अंदर मोटर वाहन 14.5%, इलेक्ट्रिकल उपकरण 20.8% और बेसिक मेटल 4.6% की बढ़त के साथ प्रमुख क्षेत्र रहे. वहीं, कैपिटल गुड्स का उत्पादन 12.9% बढ़ा, जो निवेश में लगातार मजबूती और औद्योगिक क्षमता बढ़ने का संकेत है.
सरकार का पूंजीगत खर्च लगातार बढ़ रहां
वित्त वर्ष 202627 में भी सरकार ने पूंजीगत खर्च पर विशेष जोर दिया है. अप्रैलमई 2026 के दौरान पूंजीगत खर्च ₹2.51 लाख करोड़ रहा, जबकि अप्रैलमई 2025 में यह ₹2.21 लाख करोड़ था. यानी सिर्फ पहले दो महीनों में करीब ₹29,650 करोड़ की बढ़ोतरी हुई. इसका मतलब है कि सरकार साल की शुरुआत में ही इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर तेजी से खर्च कर रही है. इससे निर्माण, स्टील, सीमेंट, परिवहन, लॉजिस्टिक्स और उपकरण जैसे क्षेत्रों में मांग बढ़ने की उम्मीद है.
रेलवे पर बड़ा निवेश
पूंजीगत खर्च बढ़ाने में की बड़ी भूमिका रही है. अप्रैलमई 2026 के दौरान रेलवे ने ₹84,000 करोड़ से अधिक खर्च किए, जो उसके पूरे साल के पूंजीगत खर्च लक्ष्य का लगभग 30% है. यह खर्च रेलवे सुरक्षा, सिग्नलिंग सिस्टम, ट्रेन सुरक्षा प्रणाली, नई रेल लाइनें, गेज परिवर्तन और डबल लाइन बिछाने जैसे कामों पर किया जा रहा है. सरकार की सार्वजनिक निवेश रणनीति में सड़क, रेलवे, टेलीकॉम, रक्षा और अन्य बुनियादी ढांचा क्षेत्र सबसे अहम बने हुए हैं.
मजबूत टैक्स कलेक्शन से आर्थिक गतिविधियां मजबूत
वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद टैक्स कलेक्शन मजबूत बना हुआ है. अप्रैलमई 2026 में सकल कर पिछले साल की तुलना में अधिक रहा, जिससे पता चलता है कि सरकार की आय मजबूत बनी हुई है. जून 2026 में 13.9% बढ़कर लगभग ₹1.95 लाख करोड़ हो गया, जबकि जून 2025 में यह ₹1.71 लाख करोड़ था. 17 जून तक चालू वित्त वर्ष में नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 14.64% बढ़कर ₹5.21 लाख करोड़ पहुंच गया. इसमें कॉर्पोरेट और गैरकॉर्पोरेट दोनों तरह के टैक्स से अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई.
राजकोषीय अनुशासन जारी रहने की उम्मीद
वैश्विक ऊर्जा कीमतों और पश्चिम एशिया की स्थिति से कुछ समय के लिए दबाव जरूर बना, लेकिन कच्चे तेल और उर्वरकों की कीमतों में नरमी आने से सरकार को वित्त वर्ष 202627 के राजकोषीय घाटा नियंत्रण के लक्ष्य पर आगे बढ़ने में मदद मिल रही है.
हाईफ्रीक्वेंसी आर्थिक संकेतक भी मजबूत
- मई में ईवे बिल की संख्या सालाना आधार पर 10.9% बढ़ी, जिससे पता चलता है कि माल की आवाजाही और आर्थिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं.
- बिजली की मांग अप्रैल के 3.5% से बढ़कर मई में 11.2% हो गई. इससे औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों में तेजी का संकेत मिलता है.
- बंदरगाहों पर माल की आवाजाही अप्रैल के 2.4% से बढ़कर मई में 6.6% हो गई, जो व्यापार में बढ़ोतरी का संकेत है.
- अप्रैल से जून 2026 तक वाहन बिक्री मजबूत रही. अप्रैल में 26.11 लाख वाहनों की बिक्री हुई, जो भारत के ऑटो रिटेल बाजार के इतिहास का सबसे बड़ा अप्रैल रहा.
- मई में 25.31 लाख वाहन बिके, जो सालाना आधार पर लगभग 10% की बढ़ोतरी है. जून में भी पैसेंजर वाहन, SUV, इलेक्ट्रिक वाहन , दोपहिया और कमर्शियल वाहनों की मांग मजबूत बनी रही.
- ग्रामीण क्षेत्रों में भी मांग बढ़ी. मई में ग्रामीण इलाकों में वाहन बिक्री 7.8% बढ़ी, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है.



