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चीन का मुकाबला करने में भारत की भूमिका अहम : सीनेटर डेन्स

वॉशिंगटन : अमेरिकी सीनेटर स्टीव डेन्स ने कहा है कि अमेरिका के साथ मिलकर काम करते हुए भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जो चीन के इनोवेशन इकोसिस्टम के आकार और पैमाने की बराबरी कर सकता है। उन्होंने भारतअमेरिका साझेदारी को न केवल दोनों देशों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण बताया।

चीन का मुकाबला करने में भारत की भूमिका अहम : सीनेटर डेन्स

मोंटाना के रिपब्लिकन सीनेटर डेन्स ने वाशिंगटन में अमेरिकाभारत रणनीतिक साझेदारी मंच लीडरशिप समिट में ये बातें कहीं। इस समिट में उन्हें दोनों देशों के बीच रिश्ते मजबूत करने के उनके काम के लिए यूएसआईएसपीएफ पब्लिक सर्विस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। सीनेटर मार्क वार्नर, जिन्हें भी यह अवॉर्ड मिला, खुद वहां मौजूद नहीं रह सके।

फेडेक्स के प्रेसिडेंट और सीईओ राज सुब्रमण्यम के साथ बातचीत के दौरान डेन्स ने कहा, “अमेरिका और भारत के बीच जो रिश्ते हैं, वे सिर्फ हमारे दोनों देशों के लिए ही अहम नहीं हैं। मुझे लगता है कि ये दुनिया के लिए भी अहम हैं।”

डेन्स ने कहा कि चीन से मिल रही चुनौती से निपटने के दौरान वाशिंगटन को भारत की भूमिका के बारे में और अधिक रणनीतिक तौर पर सोचने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, “जब हम चीन के साथ चल रही स्थितियों के बारे में सोचते हैं, तो हमें एक ऐसे भरोसेमंद साथी की जरूरत होती है जो उसका मुकाबला कर सके।”

उन्होंने भारत और चीन के प्रति अपने नजरिए में साफ फर्क बताते हुए कहा, “जब मैं चीन जाता हूं, तो यह फोन मेरे साथ बीजिंग नहीं जाता। यह वाशिंगटन डीसी में मेरी डेस्क पर ही रहता है। जब मैं दिल्ली या भारत में कहीं भी जाता हूं, तो यह मेरे साथ होता है।”

डेन्स ने कहा कि अमेरिका चीन से पूरी तरह अलग नहीं हो सकता, लेकिन उसे भरोसेमंद रणनीतिक साझेदारी बनाते हुए जोखिम कम करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, “हम चीन से अलग नहीं हो सकते। हमें उनके साथ जुड़ना होगा और जोखिम कम करना होगा। लेकिन सवाल यह उठता है कि रणनीतिक साझेदारी और मौकों के बारे में सोचते हुए हम सक्रिय रूप से क्या करने जा रहे हैं?”

उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के पास मिलकर वह टैलेंट और क्षमता है जो वैश्विक स्तर पर मुकाबला करने के लिए जरूरी है।

डेन्स ने कहा, “दुनिया में सिर्फ एक ही देश है जो चीन के इनोवेशन इकोसिस्टम के आकार और स्तर का मुकाबला कर सकता है और वह है अमेरिका के साथ मिलकर काम करने वाला भारत।”

उन्होंने आगे कहा, “वैश्विक स्तर पर मुकाबला करने और जरूरी क्षमता बनाने के लिए हमारे पास एकमात्र उम्मीद भारत और अमेरिका का साथ है।”

एशिया में बड़े पैमाने पर यात्रा कर चुके डेन्स ने कहा कि असरदार विदेश नीति बनाने के लिए व्यक्तिगत जुड़ाव जरूरी है।

उन्होंने कहा, “लोगों से मिलने और उनके साथ समय बिताने से बेहतर कुछ नहीं है। भरोसा ही भारतअमेरिका संबंधों की सबसे अहम नींव है।”

डेन्स ने कहा कि वॉशिंगटन में अक्सर चीन से मिलने वाली चुनौती पर चर्चा तो होती है, लेकिन इस बात पर ठीक से विचार नहीं किया गया है कि किन साझेदारियों को मजबूत करने की ज़रूरत है।

उन्होंने कहा, “हम यहां वॉशिंगटन में चीन से जुड़ी चुनौती के बारे में बहुत बात करते हैं, लेकिन हमने असल में इस बात पर कोई रणनीति नहीं बनाई है कि आगे क्या करना है? चीन के मुकाबले के लिए किन रिश्तों को मजबूत करने की जरूरत है?”

अवॉर्ड देने से पहले डेन्स का परिचय देते हुए यूएसआईएसपीएफ के चेयरमैन जॉन चैम्बर्स ने सीनेटर की रिश्ते बनाने और राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर काम करने की क्षमता की तारीफ की।

चैम्बर्स ने कहा, “उनमें जीवन भर चलने वाले रिश्ते बनाने की क्षमता है। वे राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर काम करते हैं और अपने क्षेत्र के लोगों के लिए ऐसे हालात बनाते हैं जिनमें सभी का फ़ायदा हो।”

चैम्बर्स ने डेन्स की नई दिल्ली यात्रा का भी जिक्र किया और कहा कि उन्होंने भारतीय नेताओं और अमेरिकी अधिकारियों के साथ भरोसा कायम किया है। उन्होंने कहा, “आप भरोसा बनाते हैं। आपने एंबेसडर गोर और एंबेसडर क्वात्रा के साथ बहुत अच्छे से काम किया।”

बातचीत का संचालन करने वाले सुब्रमण्यम ने डेन्स को इस अवॉर्ड के लिए बधाई दी और एक केमिकल इंजीनियर, प्रॉक्टर एंड गैंबल के पूर्व एग्जीक्यूटिव, एंटरप्रेन्योर और लॉमेकर के तौर पर उनके बैकग्राउंड का जिक्र किया।

डेन्स ने 1990 के दशक में चीन में प्रॉक्टर एंड गैंबल के साथ अपने शुरुआती करियर को याद किया और कहा कि उस अनुभव ने एशिया के आर्थिक उदय के बारे में उनकी समझ को आकार दिया। उन्होंने कहा कि चीन उस समय 500 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था से बढ़कर आज 20 ट्रिलियन डॉलर से ज़्यादा की अर्थव्यवस्था बन गया है।

उन्होंने मध्य एशिया और दक्षिण काकेशस में अपनी डिप्लोमैटिक गतिविधियों के बारे में भी बात की, जिसमें अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच शांति समझौते की कोशिशें शामिल थीं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नेतृत्व का महत्व बना हुआ है क्योंकि “आज़ादी काम करती है।”

सीनेट छोड़ने की घोषणा की करने वाले डेन्स ने कहा कि वह ग्लोबल मुद्दों और भारतअमेरिका संबंधों में जुड़े रहने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम रिटायर नहीं होने वाले हैं। हम अपना काम बदलेंगे और शायद प्राइवेट सेक्टर में जुड़े रहेंगे।”

डेन्स ने कहा, “हम इन ग्लोबल मुद्दों और भारत में हो रही घटनाओं को लेकर बहुत उत्साहित और गंभीर हैं।”

उन्होंने अपनी बात एक निजी अनुभव के साथ खत्म की और बताया कि कैंसर के इलाज के दौरान एक भारतीय डॉक्टर ने उनके पिता की जान बचाई थी। अमेरिकी समाज में भारतीयअमेरिकियों के योगदान को वे अच्छी तरह समझते हैं।

यूएसआईएसपीएफ पब्लिक सर्विस अवॉर्ड उन सरकारी अधिकारियों को दिया जाता है, जिन्होंने भारतअमेरिका साझेदारी को मजबूत करने में योगदान दिया है। इस साल डेन्स को यह अवॉर्ड भारत के साथ रणनीतिक जुड़ाव को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका के लिए दिया गया। यह सम्मान ऐसे समय में दिया गया है जब वॉशिंगटन ग्लोबल सप्लाई चेन, टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और चीन के प्रति अपनी लंबी अवधि की रणनीति पर फिर से विचार कर रहा है।

 

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