देश में अवैध धर्मांतरण कराने वालों का तगड़ा नेटवर्क है, जो अबतक गली-मोहल्लों से लेकर शिक्षण संस्थानों तक फैला था. अवैध धर्मांतरण वाला ये नेटवर्क अब हाइटेक होकर बड़े कार्पोरेट तक पहुंच गया है. ये बहुत खतरनाक संकेत है. धार्मिक सौहार्द के लिए खतरा बने एक बीपीओ के 6 टीम लीडर्स का ये मामला आपको सोचने पर मजबूर कर देगा.
)
Satya Report: पहनावा बदल गया लेकिन इनकी सोच नहीं बदली. इसलिए हम कह रहे हैं कि ये बहुत अलर्ट करने वाली खबर है. अब सुनिए कार्पोरेट कल्चर वाले कट्टरपंथियों पर क्या आरोप है
8 लड़कियों ने शिकायत की है कि आरोपियों ने धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया. एक हिंदू युवक के जबरन धर्मांतरण कराने का आरोप है. कट्टरपंथियों ने पीड़ित हिंदू युवक को दोपहर में नमाज पढ़ने को मजबूर किया. पीड़ित हिंदू युवक को जबरन बीफ खिलाया गया
धर्मांतरण का कॉर्पोरेट नेटवर्क चलानेवाले कट्टरपंथियों का नाम भी जान लिजिए. आसिफ अंसारी, शफी शेख, शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन, तौसीफ अत्तर. पुलिस ने धर्मांतरण के 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इनके खिलाफ छेड़छाड़, रेप और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का केस दर्ज किया गया है
पुलिस ने अब तक कुल 9 FIR दर्ज की है. पीड़ित लड़कियों ने कंपनी की HR प्रमुख से आरोपियों की शिकायत की थी. उसने मामूली बात कहकर शिकायत नहीं सुनी. पुलिस ने HR हेड के खिलाफ भी केस दर्ज किया है. पुलिस को शक है कि अवैध धर्मांतरण का कॉरपोरेट नेटवर्क बहुत संगठित है. इसकी कई और ब्रांच भी हो सकती हैं.
इसे ऐसे समझिए कि अवैध धर्मांतरण का कार्पोरेट नेटवर्क चलाने वाले जो 6 आरोपी पकड़े गए हैं वो कोई साधारण कर्मचारी नहीं थे. इनकी प्रोफाइल देखिए और समझिए कि कट्टरपंथ का जहर कितना विषैला है. गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी टीम लीडर थे. यानी पढ़े-लिखे और कंपनी में प्रभावशाली थे. अपने ओहदे का फायदा उठाकर दूसरों पर दवाब बना सकते थे
पीड़ित लड़कियों की उम्र 18 से 25 साल के बीच है. कई आर्थिक तौर पर कमजोर थीं. उन्हें नौकरी की जरूरत थी. इन्हें डराना आसान था. इसलिए धर्मांतरण का कॉर्पोरेट नेटवर्क चलाने वाले कट्टरपंथियों ने इन्हें अपना निशाना बनाया.
लव जिहाद, प्रलोभन, ऑफिस में दोस्ती और मेन्टॉरशिप का फायदा उठाकर लड़कियों का धर्मांतरण कराने की साजिश की गई.
बेशक ये कट्टरपंथी धर्मांतरण का मॉडर्न कॉर्पोरेट नेटवर्क चला रहे थे लेकिन उनकी मॉडस ऑपरेंडी यानी काम करने का तरीका वही पुराना आजमाया हुआ था. आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों को निशाना बनाना. धन के प्रलोभन और प्रेमजाल में फंसाकर धर्मांतरण कराना. अपने आसपास मौजूद दूसरे धर्म के लोगों को मीठी-मीठी बातें कर बहलाना-फुसलाना. पुलिस को शक है कि पीड़ित लड़कियों की संख्या 50 से ज्यादा हो सकती है. सोचिए, पुलिस शक जता रही है कि 50 से ज्यादा पीड़ित लड़कियां हो सकती हैं. ये सब कहां हो रहा है? एक मल्टीनेशनल कंपनी में.
यानी धर्मांतरण को नितांत निजी फैसला बताया गया है. लेकिन कट्टरपंथियों के दिमागी सॉफ्टवेयर की प्रोग्रामिंग ऐसी होती है कि उन्हें ये बात समझ में नहीं आती है. ये बात हर कट्टरपंथी पर लागू होती है. जानते हैं जब इन आरोपियों को कोर्ट में ले जाया गया तो इनके पीछे 500 से ज्यादा कट्टरपंथी कोर्ट पहुंच गए. समझिए, ये इनकी फैन फॉलोइंग थी.
सोचिए जिन अपराधियों पर महिलाओं से छेड़छाड़, रेप, धर्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप है उनकी तरफदारी के लिए कोर्ट कैंपस में भीड़ जुट जाती है. क्या किसी सभ्य और स्वस्थ समाज में ऐसा हो सकता है. नहीं हो सकता. फिर नासिक में ऐसा क्यों हुआ? क्योंकि आरोपी धर्मांतरण का कॉरपोरेट नेटवर्क चला रहे थे. कट्टरपंथियों की नजर में ये धर्म का काम कर रहे थे. इसलिए ये उनके नायक हैं. सोचिए ये कट्टरपंथी कैसा समाज बनाना चाहते हैं. इसलिए आज कट्टरपंथियों के सियासी संरक्षकों से भी सवाल पूछे जा रहे हैं
महात्मा गांधी ने कहा है कि मैं एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति के धर्मांतरण में विश्वास नहीं करता. मेरा प्रयास कभी किसी की आस्था को कमजोर करने का नहीं, बल्कि उसे अपने धर्म का बेहतर अनुयायी बनाने का होना चाहिए.
नासिक में गिरफ्तार किए गए आरोपी दूसरों की आस्था को कमजोर कर रहे थे. असहिष्णुता, मुसलमानों से भेदभाव, संवैधानिक अधिकार जैसे शब्दों का दिन में 100 बार उच्चारण करनेवाले कथित मानवतावादी आज खामोश हैं. धर्मांतरण के इस अधर्म पर कोई कुछ नहीं बोल रहा है.
2023 में धर्मांतरण की 601 घटना रिपोर्ट हुईं.
2024 में धर्मांतरण की 840 घटनाएं दर्ज की गईं. एक साल में धर्मांतरण के मामले 40 प्रतिशत बढ़े.
2025 में धर्मांतरण की 900 घटनाएं रिपोर्ट की गईं. ये संख्या 1947 के बाद सबसे ज्यादा है.
ये आंकड़े आपको छोटे लग रहे होंगे. लेकिन समझिए. ये वो घटनाएं हैं जो रिपोर्ट हुई हैं. आप जानते हैं जब तक बड़े रैकेट का पर्दाफाश नहीं होता, अवैध धर्मांतरण की ज्यादातर घटनाएं रिपोर्ट ही नहीं होती हैं. जो आंकड़े उपलब्ध हैं, उनका ट्रेंड ये बता रहा है कि धर्मांतरण का नेटवर्क साल-दर-साल मजबूत हो रहा है. अब तो ये नेटवर्क कॉरपोरेट बन गया है.
2025 में यूपी में गिरफ्तार हुआ छांगुर याद है आपको. धर्मांतरण के लिए उसे विदेश से करीब 100 करोड़ का फंड मिला था. छांगुर धर्मांतरण का कॉरपोरेट नेटवर्क चलानेवालों की तरह हाई क्वालिफाइड नहीं था. फिर भी उसे 100 करोड़ का विदेशी फंड मिला था. पुलिस को शक है कि नासिक वाले धर्मातरण के कॉरपोरेट नेटवर्क को भी विदेशी फंडिंग मिल रही होगी. पुलिस की जांच में ये प्वाइंट भी शामिल है.
6 कट्टरपंथी गिरफ्तार-धर्मांतरण का आरोप
सोचिए देश के 12 राज्यों में एंटी-कन्वर्जन कानून लागू है. फिर भी महाराष्ट्र के नासिक में धर्मांतरण का कॉरपोरेट नेटवर्क चल रहा था वहां अवैध धर्मांतरण पर 7 साल की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है. लेकिन कट्टरपंथियों को कानून की चिंता नहीं है, जानते हैं क्यों. क्योंकि उन्हें भरोसा होता है कि मजहब के नाम पर भीड़ उनके पक्ष में खड़ी हो जाएगी. एक वोट बैंक को लक्षित करने वाले नेता उनके समर्थन में खड़े हो जाएंगे. वहीं मानवाधिकार के नाम पर एक्टिविस्टों की एक टोली उनके पक्ष में आवाज उठाने लगेगी
सावधान करने वाले इस मामले पर आंख-कान खोलकर रखने की जरूरत है, क्योंकि धर्मांतरण अब कॉरपोरेट नेटवर्क बन गया है. इसके साथ एक पूरा इकोसिस्टम एक्टिव रहता है. इसलिए सावधान रहिए। अपने आसपास नजर रखिए. आखिर में हम, ब्रिटिश प्रसिद्ध दार्शनिक जॉन लॉक के शब्दों में कट्टरपंथियों से यही कहेंगे कि सच्चा धर्म आंतरिक विश्वास का विषय है, जिसे बलपूर्वक बदला नहीं जा सकता है.



