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​भारतीय बाजार में निवेश करना हुआ बेहद आसान! NRI के लिए सेबी का बड़ा कदम, चंद मिनटों में पूरा होगा ऑनलाइन KYC

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड ने बुधवार को प्रवासी भारतीयों , भारतीय मूल के विदेशी नागरिक और विदेशी नागरिक समेत भारत के बाहर रहने वाले व्यक्तियों के लिए अपने ग्राहक को जानो संबंधी नियमों में ढील दी है. इसके तहत वे डिजिटल माध्यम से पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे. अब वे Financial Action Task Force के स्टैंडर्ड का पालन करने वाले देशों में रहते हुए भारत में आए बिना यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं. सेबी ने अपने सर्कूलर में कहा कि संशोधित व्यवस्था तीन दिसंबर से लागू होगी.

​भारतीय बाजार में निवेश करना हुआ बेहद आसान! NRI के लिए सेबी का बड़ा कदम, चंद मिनटों में पूरा होगा ऑनलाइन KYC

सेबी ने आसान किए नियम

इस व्यवस्था के तहत सेबी में पंजीकृत मध्यस्थ ऐसे ग्राहकों से केवाईसी संबंधी जानकारी और संबंधित दस्तावेज डिजिटल माध्यम से स्वीकार कर सकेंगे. इसके लिए रजिस्ट्रेशन प्रोसेस के दौरान उनका भारत में शारीरिक रूप से मौजूद रहना जरूरी नहीं होगा. इस कदम का उद्देश्य विदेश में रहने वाले निवेशकों के लिए रजिस्ट्रेशन प्रोसेस को सरल बनाना और अनुपालन संबंधी जरूरतों को आसान करना है. सेबी ने कहा कि भारत से बाहर रहने वाले किसी व्यक्ति ग्राहक के रजिस्ट्रेशन प्रोसेस को आसान बनाने के लिए मौजूदा केवाईसी प्रावधानों की समीक्षा करने का निर्णय लिया गया है. भारत से बाहर रहने वाले व्यक्तिगत ग्राहकों में प्रवासी भारतीय , भारतीय मूल के विदेशी नागरिक या विदेशी नागरिक शामिल होंगे.

केआरए को जारी किए निर्देश

सेबी ने कहा कि वित्तीय कार्रवाई कार्यबल के मानकों का पालन करने वाले देश में रह रहे ऐसे व्यक्तिगत ग्राहक के लिए डिजिटल पंजीकरण के दौरान भारत में मौजूद रहने की अनिवार्यता में ढील दी जा रही है. मध्यस्थ ऐसे ग्राहक से केवाईसी संबंधी जानकारी और संबंधित दस्तावेज डिजिटल माध्यम से स्वीकार कर सकते हैं. सेबी ने केवाईसी रिकॉर्ड के एक मध्यस्थ से दूसरे मध्यस्थ के पास इस्तेमाल की सुविधा भी बढ़ाई है. उसने केवाईसी रजिस्ट्रेशन एजेंसियों को निर्देश दिया है कि जहां भी किसी ग्राहक की व्यक्तिगत जानकारी का सत्यापन आधिकारिक या मूल आंकड़ा स्रोतों से किया गया है, उसे ‘सत्यापित’ के रूप में दर्ज किया जाए. केवाईसी रिकॉर्ड का अन्य मध्यस्थों के साथ आदानप्रदान किया जा सकेगा, भले ही उसमें दर्ज हर जानकारी का वेरिफिकेशन नहीं हुआ हो.

अतिरिक्त जांचपड़ताल करना भी शामिल

इसके अलावा, मध्यस्थों को केआरए या केंद्रीय केवाईसी रिकॉर्ड रजिस्ट्री में उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर किसी अन्य सेबीपंजीकृत मध्यस्थ या अन्य वित्तीय क्षेत्र के नियामक के अधीन आने वाली यूनिट द्वारा की गई केवाईसी प्रक्रिया पर भरोसा करने की अनुमति होगी. हालांकि, केवाईसी नियमों के अनुपालन की अंतिम जिम्मेदारी संबंधित मध्यस्थ की ही होगी. इसमें ग्राहक की जोखिम श्रेणी के आधार पर अतिरिक्त जांचपड़ताल करना भी शामिल है. संशोधित नियमों के तहत मध्यस्थों को ग्राहक का स्थायी खाता संख्या , पासपोर्ट और जहां लागू हो, वहां ओसीआई कार्ड लेना होगा. इसके साथ ही पहचान और पते का प्रमाण भी जुटाना होगा. भारत से बाहर रहने वाले ऐसे ग्राहकों के मामले में विदेश का पता ही उनका मौजूदा पता माना जाएगा.

ईसाइन को मिली मंजूरी

रेगुलेटर ने केवाईसी फॉर्म और नमूना हस्ताक्षर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जमा करने की भी अनुमति दी है. यह निर्धारित सत्यापन शर्तों पर निर्भर करेगा. सेबी के अनुसार, मध्यस्थों को केवाईसी प्रक्रिया पूरी होने के तीन कार्यदिवस के भीतर ऐसे व्यक्तिगत ग्राहकों की केवाईसी जानकारी केआरए को देनी होगी. संशोधित व्यवस्था एफएटीएफ के मानकों का पालन करने वाले देशों में रह रहे ग्राहकों की दोबारा केवाईसी प्रक्रिया पर भी लागू होगी.

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