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ITR 2026: टैक्स में कटा अपना पूरा पैसा वापस चाहिए? रिटर्न भरते समय बस कर लें ये काम

ITR 2026: इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने का सीजन दस्तक दे चुका है. ऐसे में हर टैक्सपेयर की सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि अपना टैक्स रिफंड कैसे बढ़ाया जाए. दरअसल, रिफंड बढ़ाना केवल आखिरी पलों में निवेश के दस्तावेज खंगालने तक सीमित नहीं है. इसकी असली चाबी इस बात में छिपी है कि आपका आईटीआर आपकी वास्तविक आय, सही निवेश प्लान और पहले चुकाए गए टैक्स का बिल्कुल सटीक ब्योरा दे रहा हो.

ITR 2026: टैक्स में कटा अपना पूरा पैसा वापस चाहिए? रिटर्न भरते समय बस कर लें ये काम

कई बार जानकारी के अभाव में आपका कटा हुआ टीडीएस या एडवांस टैक्स सरकारी खजाने में ही रह जाता है. जब पूरे वित्तीय वर्ष में आपकी ओर से चुकाया गया टैक्स आपकी असली देनदारी से ज्यादा हो जाता है, तो इनकम टैक्स विभाग वह अतिरिक्त रकम आपको रिफंड के रूप में लौटा देता है. इस रिफंड को ईफाइलिंग पोर्टल पर आसानी से ट्रैक भी किया जा सकता है. टैक्स विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि छोटी सी गलती भी आपके रिफंड को अटका सकती है या विभाग के नोटिस का कारण बन सकती है. ऐसे में आइए समझते हैं वो तरीके जिनसे आप अपना रिफंड अधिकतम कर सकते हैं.

सही टैक्स रिजीम का चुनाव करेगा कमाल

रिटर्न फाइल करने से पहले सबसे अहम कदम पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था के बीच तुलना करना है. यह कतई जरूरी नहीं कि जो व्यवस्था आपके सहकर्मी के लिए अच्छी हो, वही आपके लिए भी फायदेमंद हो. आपको दोनों विकल्पों में अपनी टैक्स देनदारी का गणित समझना होगा. जिस व्यवस्था में आपका टैक्स सबसे कम बन रहा हो, उसी का चुनाव करें. अगर साल के दौरान आपकी सैलरी से ज्यादा टीडीएस कट गया है, तो सटीक टैक्स रिजीम चुनकर आप अपना फंसा हुआ पैसा आसानी से वापस पा सकते हैं.

पुरानी व्यवस्था में छिपे हैं टैक्स बचाने के शानदार मौके

अगर आपकी कैलकुलेशन पुरानी टैक्स व्यवस्था की तरफ इशारा कर रही है, तो आपके पास डिडक्शन क्लेम करने के ढेरों विकल्प मौजूद हैं. सेक्शन 80C के तहत पीपीएफ, ईपीएफ, ईएलएसएस, जीवन बीमा प्रीमियम या 5 साल की टैक्ससेविंग एफडी में निवेश करके सीधे तौर पर 1.5 लाख रुपये तक की छूट ली जा सकती है. इसके अलावा, सेक्शन 80D के तहत हेल्थ इंश्योरेंस का प्रीमियम चुकाकर उम्र के हिसाब से 25,000 रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक का अतिरिक्त फायदा लिया जा सकता है. वेतनभोगी कर्मचारी निर्धारित शर्तों के साथ हाउस रेंट अलाउंस क्लेम कर सकते हैं. वहीं सेक्शन 24 के तहत होम लोन के ब्याज भुगतान पर 2 लाख रुपये तक की बड़ी राहत पाई जा सकती है.

NPS निवेश से मिलेगी 50 हजार की एक्स्ट्रा पावर

अगर आपने सेक्शन 80C की 1.5 लाख रुपये की लिमिट पूरी कर ली है, तो नेशनल पेंशन सिस्टम आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है. सेक्शन 80CCD के तहत एनपीएस में निवेश कर आप 50,000 रुपये की अतिरिक्त टैक्स कटौती का दावा कर सकते हैं. सबसे अच्छी बात यह है कि सेक्शन 80CCD के तहत नियोक्ता के योगदान पर मिलने वाला टैक्स लाभ पुरानी और नई, दोनों टैक्स व्यवस्थाओं में उपलब्ध है. इसके जरिए पुरानी रिजीम में वेतन के 10 प्रतिशत और नई रिजीम में 14 प्रतिशत तक के योगदान पर टैक्स में छूट क्लेम की जा सकती है.

स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ इन जरूरी स्टेप्स पर दें ध्यान

हर वेतनभोगी टैक्सपेयर को अपनी टैक्स योग्य आय पर बिना कोई निवेश प्रमाण दिए ‘स्टैंडर्ड डिडक्शन’ का फायदा मिलता है. पुरानी व्यवस्था में यह कटौती 50,000 रुपये है, जबकि नई टैक्स व्यवस्था में इसे बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया गया है. इसके अलावा फैमिली पेंशन प्राप्तकर्ताओं को सेक्शन 57 के तहत पुरानी रिजीम में 15,000 रुपये व नई रिजीम में 25,000 रुपये तक की छूट मिलती है. अगर आय तय सीमा के भीतर रहती है, तो सेक्शन 87A की रिबेट आपकी टैक्स देनदारी को पूरी तरह शून्य कर सकती है.

रिफंड को जल्दी और बिना किसी रुकावट के अपने खाते में मंगाने के लिए कुछ बुनियादी बातें हमेशा याद रखें. अपनी आय के स्रोत के हिसाब से एकदम सही आईटीआर फॉर्म चुनें. रिटर्न में पहले से भरे हुए टीडीएस डिटेल्स का अपने फॉर्म 16 या 16A से मिलान जरूर करें ताकि कोई विसंगति न रहे. बैंक खाते की जानकारी बिल्कुल सही भरें क्योंकि रिफंड सीधा आपके एक्टिव खाते में ही क्रेडिट किया जाएगा. सबसे अहम बात, आईटीआर सबमिट करने के तुरंत बाद अपना ईवेरिफिकेशन पूरा करें. विभाग आपके रिटर्न की प्रोसेसिंग ईवेरिफिकेशन के बाद ही शुरू करता है, इसलिए इसमें देरी आपके रिफंड को अटका सकती है.

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