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जेफरीज ने NSE को बताया ‘बेस्ट’ एक्सचेंज, BSE के शेयरों में गिरावट!

मंगलवार, 7 जुलाई के दिन स्टॉक एक्सचेंज बीएसई के शेयरों में अचानक भारी गिरावट दर्ज की गई. दोपहर 3 बजे तक बीएसई का शेयर 3.23 फीसदी टूटकर 3680.20 रुपये पर आ गया था. इस गिरावट की वजह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का बहुप्रतीक्षित आईपीओ और दिग्गज ब्रोकरेज फर्म जेफरीज की एक ताजा रिपोर्ट है. जेफरीज का साफ मानना है कि जब बात दोनों एक्सचेंजों के बिजनेस की होती है, तो एनएसई कहीं ज्यादा मजबूत और डाइवर्सिफाइड है.

जेफरीज ने NSE को बताया ‘बेस्ट’ एक्सचेंज, BSE के शेयरों में गिरावट!

बाजार में NSE का एकतरफा दबदबा

जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि 30,000 करोड़ रुपये का आईपीओ लाने जा रही एनएसई का कारोबार बीएसई के मुकाबले ज्यादा फैला हुआ है. सेबी के पास जमा किए गए ड्राफ्ट पेपर के आंकड़ों का हवाला देते हुए ब्रोकरेज ने कहा कि इंडेक्स ऑप्शन और कमोडिटी एफएंडओ को छोड़ दें, तो बाकी लगभग हर सेगमेंट में एनएसई की बाजार हिस्सेदारी 90 फीसदी से अधिक है. कंपनी की क्लियरिंग कॉरपोरेशन का भी कैश मार्केट में 88% और एफएंडओ में 91% का भारीभरकम मार्केट शेयर है. एनएसई ने खुद को सिर्फ ट्रेडिंग तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि ग्लोबल लेवल का एक शानदार टेक प्रोडक्ट सुइट भी तैयार किया है. इसी तकनीक और डेटा से जुड़ी सर्विस के दम पर उसे वित्त वर्ष 2026 में अपने कुल रेवेन्यू का 13 फीसदी हिस्सा मिला है.

ट्रेडिंग का नया ट्रेंड और ऑप्शंस का बोलबाला

भारतीय शेयर बाजार में लोगों के निवेश और ट्रेडिंग करने के तरीके में तेजी से बदलाव आया है. वित्त वर्ष 2020 से 2026 के बीच, कैश मार्केट के टर्नओवर में जहां सालाना 19 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, वहीं इसके मुकाबले इक्विटी ऑप्शंस ट्रेडिंग में सालाना 56 फीसदी का शानदार उछाल देखा गया है. आलम यह है कि वित्त वर्ष 2026 में ऑप्शंस प्रीमियम का औसत दैनिक टर्नओवर, रोजमर्रा के कैश मार्केट टर्नओवर का 70 फीसदी तक पहुंच गया.

यही वजह है कि अब भारतीय एक्सचेंजों की कुल कमाई में डेरिवेटिव्स की हिस्सेदारी 70 फीसदी हो गई है. इसका सीधा मतलब है कि एक्सचेंज की कमाई अब बाजार की कीमतों से ज्यादा बाजार के उतारचढ़ाव पर निर्भर हो गई है. एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि भारत में आज अमेरिका से भी ज्यादा ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट ट्रेड होते हैं, लेकिन उनका कुल मूल्य अमेरिका का सिर्फ पांचवां हिस्सा ही है.

सरकारी बीमा कंपनियों के लिए संजीवनी बनेगा IPO

एनएसई का यह मेगा आईपीओ कई सरकारी साधारण बीमा कंपनियों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगा. रिपोर्ट के मुताबिक, इस ‘ऑफर फॉर सेल’ में पीएसयू जनरल इंश्योरेंस कंपनियां अपनी 1.1 फीसदी हिस्सेदारी बेचेंगी. फिलहाल चार में से तीन बड़ी मल्टीलाइन बीमा कंपनियों—ओरिएंटल, नेशनल और यूनाइटेड—की वित्तीय देनदारी चुकाने की क्षमता रेगुलेटरी लिमिट से काफी नीचे चल रही है. एनएसई के शेयर बेचने से इन कंपनियों के पास भारी मात्रा में नकदी आएगी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और सॉल्वेंसी कैपिटल में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा.

विवादों के बाद भी मुनाफे का शानदार ट्रैक रिकॉर्ड

एनएसई को हाल के वर्षों में कुछ बड़े कानूनी मामलों के चलते वित्तीय झटके भी लगे हैं. कोलोकेशन और डार्क फाइबर मामले में वित्त वर्ष 2026 में 1,390 करोड़ रुपये का प्रोविजन करना पड़ा था. वहीं, वित्त वर्ष 2025 में टीएपी मामले के निपटारे के लिए सेबी को 670 करोड़ रुपये चुकाए गए. इन भारी भुगतानों का सीधा असर एनएसई के ऑपरेशनल मुनाफे पर पड़ा है.

हालांकि, जेफरीज का कहना है कि सेबी को दी गई सेटलमेंट फीस सिर्फ एक बार का खर्च है. अगर इस खर्च को हटाकर एक्सचेंज के बुनियादी बिजनेस को देखा जाए, तो एनएसई का ऑपरेटिंग एबिटडा मार्जिन आज भी 7677 फीसदी के आसपास बिल्कुल स्थिर बना हुआ है.

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.

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