
भिलाई, छत्तीसगढ़: कभी भिलाई में जूस की दुकान चलाने वाला एक युवक देखते ही देखते अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क के प्रमुख प्रमोटरों में शामिल हो गया। यह कहानी है सौरभ चंद्राकर की, जिसका नाम महादेव ऑनलाइन बुक सट्टेबाजी मामले में सामने आया। अब ओमान से भारत प्रत्यर्पित किए जाने के बाद एक बार फिर यह मामला सुर्खियों में है।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की टीम 1 नवंबर को सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लेकर आई। वह महादेव ऑनलाइन बुक सट्टेबाजी सिंडिकेट के प्रमुख प्रमोटरों में से एक बताया जाता है। उसके खिलाफ दो सीबीआई मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं, जबकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी उससे जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रहा है। अब उसे रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत में पेश किए जाने की प्रक्रिया चल रही है।
जूस की दुकान से शुरू हुआ सफर
सौरभ चंद्राकर का नाम सामने आने से पहले उसकी पहचान भिलाई के एक सामान्य कारोबारी के रूप में बताई जाती थी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वह जूस की दुकान चलाता था। बाद में उसकी मुलाकात रवि उप्पल से हुई और दोनों ने मिलकर ऑनलाइन सट्टेबाजी के कारोबार का नेटवर्क खड़ा किया।
धीरे-धीरे यह कारोबार महादेव ऑनलाइन बुक के नाम से फैलने लगा। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस नेटवर्क का संचालन विदेश से किया जाता था और भारत के अलग-अलग हिस्सों में इसके पैनल तथा शाखाएं सक्रिय थीं।
कैसे चलता था ऑनलाइन सट्टेबाजी का नेटवर्क?
जांच एजेंसियों के अनुसार, महादेव ऑनलाइन बुक के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, ताश और अन्य खेलों पर दांव लगाने की सुविधा दी जाती थी। इस नेटवर्क में अलग-अलग पैनल संचालक लोगों को जोड़ते थे और उनसे सट्टे की रकम जमा कराते थे।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जांचकर्ताओं ने भारत और संयुक्त अरब अमीरात में ऐसे 3,200 से अधिक पैनलों के संचालन का अनुमान लगाया है। नेटवर्क में फ्रेंचाइजी जैसी व्यवस्था बताई गई, जिसके तहत स्थानीय संचालक अपने स्तर पर ग्राहकों को जोड़ते थे और मुख्य नेटवर्क से जुड़े रहते थे।
88 हजार करोड़ रुपये के आंकड़े का क्या है सच?
इस मामले में 88,000 करोड़ रुपये से अधिक की रकम का आंकड़ा काफी चर्चा में रहा है। जांच से जुड़े अनुमानों में महादेव ऑनलाइन बुक और उससे जुड़े अन्य सट्टेबाजी प्लेटफॉर्मों से कथित अपराध की कमाई 88,000 से 94,000 करोड़ रुपये तक बताई गई है।
यह आंकड़ा किसी एक व्यक्ति की घोषित संपत्ति नहीं है, बल्कि जांच में सामने आए कथित अवैध कारोबार और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन का अनुमान है। इसलिए इसे सौरभ चंद्राकर की निजी संपत्ति बताना सही नहीं होगा।
फर्जी बैंक खातों और हवाला के जरिए पैसे का लेन-देन
ईडी और सीबीआई की जांच में आरोप लगाया गया है कि सट्टेबाजी से हासिल रकम को सीधे मुख्य संचालकों तक पहुंचाने के बजाय कई स्तरों पर घुमाया जाता था। इसके लिए कथित तौर पर म्यूल या बेनामी बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, कई खातों में ऐसे लोगों के दस्तावेज इस्तेमाल किए गए, जिन्हें वास्तविक लेन-देन की पूरी जानकारी नहीं थी। रकम को अलग-अलग खातों से गुजारने के बाद हवाला और अन्य माध्यमों के जरिए विदेश भेजे जाने का आरोप है।
सीबीआई ने भी अपनी जांच में कहा है कि नेटवर्क से जुड़ी रकम को कई बैंक खातों के जरिए घुमाकर विदेश भेजा गया। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि कारोबार को बिना बाधा चलाने के लिए कुछ सरकारी कर्मचारियों को संरक्षण राशि दी जाती थी। इन आरोपों की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
दुबई में आलीशान संपत्तियों तक पहुंची जांच
महादेव सट्टेबाजी मामले की जांच के दौरान दुबई और भारत में कई संपत्तियों का पता चला। ईडी ने मार्च 2026 में जारी अपनी जानकारी में बताया था कि उसने दुबई और नई दिल्ली में स्थित 20 अचल संपत्तियों को अटैच करने का आदेश दिया। इन संपत्तियों का अनुमानित बाजार मूल्य करीब 1,700 करोड़ रुपये बताया गया था।
ईडी के मुताबिक, मार्च 2026 तक इस पूरे मामले में जब्त, फ्रीज और अटैच की गई चल-अचल संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 4,336 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका था। जांच एजेंसी का आरोप है कि इनमें से कई संपत्तियां कथित अपराध से अर्जित रकम से खरीदी गई थीं।
200 करोड़ रुपये की शादी ने भी खींचा था ध्यान
सौरभ चंद्राकर की फरवरी 2023 में दुबई में हुई आलीशान शादी भी इस मामले की चर्चा का बड़ा कारण बनी थी। इस आयोजन पर करीब 200 करोड़ रुपये खर्च होने के दावे सामने आए थे। शादी में मनोरंजन जगत की कई जानी-मानी हस्तियों के शामिल होने और मेहमानों के लिए निजी विमानों की व्यवस्था किए जाने की खबरें आई थीं।
ईडी ने इस आयोजन से जुड़े खर्च और भुगतान के तरीकों की जांच की थी। एजेंसी ने कुछ कलाकारों और मनोरंजन जगत से जुड़े लोगों को पूछताछ के लिए समन भी जारी किए थे। हालांकि, किसी व्यक्ति को केवल समन जारी होने के आधार पर आरोपी नहीं माना जा सकता।
राजनीतिक और प्रशासनिक कनेक्शन की भी जांच
महादेव ऐप का मामला छत्तीसगढ़ में राजनीतिक विवाद का विषय भी बना। जांच एजेंसियों ने कथित तौर पर कुछ अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों तक अवैध कमाई पहुंचने के आरोपों की पड़ताल की। विधानसभा चुनाव के दौरान भी इस मामले को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप हुए थे।
हालांकि, इन आरोपों और राजनीतिक दावों को अलग-अलग देखना जरूरी है। किसी व्यक्ति या पदाधिकारी के खिलाफ आरोप लगना अपने आप में अपराध साबित होना नहीं है। संबंधित मामलों का फैसला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
ओमान से भारत लाया गया सौरभ चंद्राकर
भारत से बाहर रहने के दौरान सौरभ चंद्राकर की तलाश जांच एजेंसियां कर रही थीं। सीबीआई के मुताबिक, इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर ओमान की रॉयल पुलिस ने उसे हिरासत में लिया था। इसके बाद भारतीय एजेंसियों ने प्रत्यर्पण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
1 नवंबर 2026 को सीबीआई की विशेष टीम उसे ओमान से भारत लेकर आई। एजेंसी के मुताबिक, चिकित्सकीय जांच और ट्रांजिट रिमांड की प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया जाना है।
अब जांच एजेंसियों की कोशिश होगी कि उससे नेटवर्क के संचालन, कथित वित्तीय लेन-देन, विदेश में मौजूद संपत्तियों और अन्य आरोपितों की भूमिका को लेकर पूछताछ की जाए।
जूस की दुकान से शुरू होकर अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी नेटवर्क तक पहुंचने की यह कहानी अब एक नए मोड़ पर है। लेकिन इस पूरे मामले में लगे आरोपों की अंतिम सच्चाई अदालत में होने वाली सुनवाई और जांच के नतीजों से ही सामने आएगी।
Satya Report डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और जांच एजेंसियों की ओर से जारी जानकारियों पर आधारित है। इसमें उल्लेखित आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने का अधिकार अदालत को है।



