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Hariyali Teej 2026 पर पहली बार रख रही हैं व्रत? जानिए Puja Vidhi और Rituals का धार्मिक महत्व

आज यानी हरियाली तीज का पर्व 15 अगस्त, शनिवार को मनाया जा रहा है। तीज के दिन विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से निर्जला या फलाहार व्रत रखती हैं। वहीं, अविवाहित कन्याएं मनचाह जीवनसाथी पाने की इच्छा में तीज का व्रत रखती हैं। पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पड़ने वाला यह त्योहार भगवान शिव और माता पार्वती के पवित्र मिलन से जुड़ा है। माना जाता है कि श्रद्धा भाव से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजाअर्चना करने से दांपत्य जीवन में प्रेम और सौहार्द बना रहता है। जो महिलाएं पहली बार व्रत रखने वाली हैं उनके लिए पूजा की सही विधि जरुर जानें।
हरियाली तीज व्रत की विधि
हरियाली तीज व्रत वाले दिन महिलाएं ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर साफ वस्त्र पहनें। इसके बाद पूजा की तैयारी करें और मन में व्रत का संकल्प लें।
तीज के मौके पर मायके से बेटी के लिए सिंधारा भेजने की परंपरा है। इसमें चूड़ियां, मिठाई, मेहंदी और श्रृंगार से संबंधित चीजें शामिल होती हैं। माना जाता है कि, इस दिन मायके से आए वस्त्र धारण करना बेहद शुभ होता है। हरे रंग को हरियाली और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस त्योहार के दिन हरे रंग की साड़ी या परिधान पहनने की परंपरा है।
तीज के अवसर पर महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं। इसको वैवाहिक सुख और सौभाग्य से जोड़ा गया है। 
फिर शुभ मुहूर्त में भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की पूजा की जाती है। माता पार्वती को श्रृंगार की सामग्री अर्पित की जाती है। वहीं भगवान शिव को जल, बेलपत्र, फूल और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाएं।
इसके बाद हरियाली तीज व्रत कथा का पाठ करें या सुनें। असल में कई परिवारों में महिलाएं अपनी सास को वस्त्र और सुहाग सामग्री भेंट कर उनका आशीर्वाद लेती हैं।
हरियाली तीज पर महिलाएं गीतसंगीत के साथ सामूहिक रुप से पर्व मनाती हैं। झूला झूलने और हाथों में मेहंदी लगाने की भी परंपरा है। वहीं, व्रत का पारण अपनी पारिवारिक पंरपरा और मान्यता के अनुसार की जाती है।
हरियाली तीज व्रत के नियम
इस दिन हरे और लाल रंग के वस्त्र पहनना काफी शुभ माना जाता है। भूलकर भी काले सफेद या भूरे रंग के कपड़े न पहनें।
  व्रत के दौरान पानी या दूध का सेवन न करने की परंपरा भी प्रचलित है।
  इस बात का ध्यान रखें कि पूजा में वही सामग्री का इस्तेमाल करें, जो मायके से प्राप्त हुई हो।
  व्रत का पारण शुभ मुहूर्त से पहले न करें।
  व्रत वाले दिन महिलाओं को किसी भी प्रकार का विवाद और नकारात्मकता से दूर रहना चाहिए।
  मान्यता के अनुसार, इस रात जागरण कर भजनकीर्तन के जरिए शिवपार्वती की आराधना करना चाहिए।

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