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राम मंदिर विवाद में केजरीवाल की एंट्री, अयोध्या दौरे से बढ़ी सियासी हलचल

Arvind Kejriwal Ayodhya Visit: आम आदमी पार्टी के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शुक्रवार को मंदिर में चढ़ावा चोरी विवाद के बीच अयोध्या के श्री राम मंदिर में दर्शन करने जाएंगे। उन्होंने पहले भी इस मुद्दे पर सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया था कि इतनी बड़ी चोरी होने के बावजूद अब तक एक भी एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की गई। उन्होंने कहा था कि सरकार किसे बचा रही है?

राम मंदिर विवाद में केजरीवाल की एंट्री, अयोध्या दौरे से बढ़ी सियासी हलचल
राम मंदिर विवाद में केजरीवाल की एंट्री, अयोध्या दौरे से बढ़ी सियासी हलचल

राम मंदिर से आस्था जुड़ी है

केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि अयोध्या श्री राम मंदिर में चढ़ावा चोरी से हर सनातनी बेहद दुखी है। उन्होंने यह भी बताया कि मैं शुक्रवार को श्री राम मंदिर दर्शन के लिये जाऊंगा। बता दें कि राम मंदिर में करोड़ों रुपये के चढ़ावे और दान की कथित चोरी के मामले में हाल ही में सियासत तेज हो गई है।

उन्होंने कहा कि इस पाप में शामिल लोग कितने भी बड़े क्यों न हों, उन्हें सीधे जेल में डाल देना चाहिए। क्योंकि करोड़ों हिंदुओं राम मंदिर से आस्था जुड़ी है।

200 करोड़ रूपये का कैश चोरी

बताया जा रहा है कि अयोध्या राम मंदिर से लगभग 200 करोड़ रूपये का कैश चोरी हो गया और इसके अलावा हीरे जवाहारात के संदूक भी चोरी हो गए। आम आदमी पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से मांग करते हुए कहा कि मामले की जांच कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाही होनी चाहिए।

उनका यह भी कहना है कि मंदिर में चंदा चोरी के मामले से पहले मंदिर के लिए जगह खरीदने में भी गड़बड़ी हुई थी।

दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई

समाजवादी पार्टी ने राम मंदिर दान और पत्थर चोरी विवाद को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह केवल चोरी का मामला नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है। यह बहुत गंभीर मामला है। अयोध्या में सैकड़ों करोड़ रुपए की कीमत वाले पत्थर चोरी हो गए हैं।

इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना चाहिए, निष्पक्ष जांच करानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।

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किसे बचाना जरूरी है, सरकार या करोड़ों लोगों की आस्था

की एंट्री के बाद राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मुद्दा और गर्माता जा रहा है। क्योंकि इससे पहले विपक्ष के कई नेता लगातार इस मामले को उठा रहे हैं। उन्होंने सीएम की सराकर को घेरते हुए कहा कि केंद्र और उत्तर प्रदेश में दोनों जगह इनकी सरकारें हैं। कोई रेड नहीं हुई और ना ही कोई गिरफ्तारी हुई।

बताया जा रहा है, कि इसमें बहुत बड़े बड़े नाम शामिल हैं। कार्रवाई हुई तो सरकार भी गिर सकती है। आपके हिसाब से किसे बचाना जरूरी है। सरकार को या करोड़ों लोगों की आस्था को?

 

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