
रोहतक, हरियाणा: हरियाणा के रोहतक जिले के इस्माईला गांव में शनिवार को आयोजित खाप पंचायत में लिव-इन रिलेशनशिप और प्रेम विवाह को लेकर कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। पंचायत में शामिल अलग-अलग खापों के प्रतिनिधियों ने लिव-इन रिश्तों पर गहरी आपत्ति जताई और कहा कि प्रेम विवाह में माता-पिता की सहमति को जरूरी बनाया जाना चाहिए। खाप प्रतिनिधियों का मानना था कि इस तरह के रिश्तों से सामाजिक व्यवस्था और पारिवारिक ताना-बाना प्रभावित हो रहा है।
इस्माईला गांव के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में हुई इस पंचायत की अध्यक्षता गांव के बुजुर्ग ओमप्रकाश ने की। उन्होंने प्रेम विवाह में माता-पिता की सहमति को जरूरी बताते हुए कहा कि शादी जैसे बड़े फैसले में परिवार की राय और सहमति को महत्व दिया जाना चाहिए।
हरियाणा में भी कानून में बदलाव की मांग
खाप पंचायतों की ओर से लंबे समय से संबंधित कानूनों में संशोधन करने या मौजूदा प्रावधानों को निरस्त करने की मांग उठाई जा रही है। इस मुद्दे पर खाप प्रतिनिधि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से भी मुलाकात कर चुके हैं।
पंचायत में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से हाल ही में किए गए संशोधन का स्वागत किया गया। खाप प्रतिनिधियों ने बताया कि इस संशोधन में विवाह के लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य करने और शादी कराने वाले व्यक्ति की पहचान व पुष्टि से जुड़े प्रावधानों की बात कही गई है।
खाप प्रतिनिधियों ने हरियाणा सरकार से भी इसी तरह के कदम उठाने की अपील की। उनका कहना था कि विवाह से जुड़े मामलों में परिवार की सहमति और जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के लिए सरकार को कानून में जरूरी बदलाव करने चाहिए।
नशे और शादियों में फिजूलखर्ची पर भी हुई चर्चा
पंचायत में केवल विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप का मुद्दा ही नहीं उठा, बल्कि सामाजिक बुराइयों पर भी विचार किया गया। खाप प्रतिनिधियों ने युवाओं में बढ़ते नशे के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की।
इसके अलावा विवाह समारोह रात के बजाय दिन में आयोजित करने का सुझाव दिया गया। पंचायत में शादियों के दौरान होने वाली फिजूलखर्ची पर रोक लगाने और सादगी से विवाह करने की अपील भी की गई।
खाप पंचायत ने इन मुद्दों को समाज में सुधार से जोड़ते हुए हरियाणा सरकार से आवश्यक कदम उठाने की मांग रखी।
Satya Report डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है। पंचायत में रखे गए विचार और मांगें संबंधित खाप प्रतिनिधियों के बयान हैं। इन्हें सरकारी नीति या लागू कानून के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए।



