क्या आपने कभी पहाड़ों पर जाने, फ्लाइट में सफर करने या बहुत ज्यादा ऊंचाई पर पहुंचने के दौरान कान में सीटी जैसी आवाज महसूस की है? कई लोगों को इस दौरान कान बंद होने, भारीपन या हल्का दर्द भी महसूस होता है। आखिर ऐसा क्यों होता है? इसके पीछे हमारे शरीर और वातावरण के दबाव में होने वाला बदलाव मुख्य वजह है।
ऊंचाई बढ़ने पर क्या बदलता है?
जैसे-जैसे हम समुद्र तल से ऊपर की ओर जाते हैं, वातावरण का वायुदाब कम होने लगता है। हमारे कान के अंदर मौजूद मध्य कान में भी हवा का दबाव होता है। सामान्य स्थिति में कान के अंदर और बाहर का दबाव लगभग संतुलित रहता है।
लेकिन अचानक ऊंचाई बढ़ने पर बाहर का दबाव तेजी से बदलता है, जबकि कान के अंदर का दबाव तुरंत उसी गति से नहीं बदल पाता। इसी असंतुलन की वजह से कान में दबाव, बंद होने जैसा एहसास और कभी-कभी सीटी या भनभनाहट जैसी आवाज सुनाई दे सकती है।
कान में सीटी जैसी आवाज क्यों आती है?
कान के अंदर एक पतली झिल्ली होती है, जिसे ईयरड्रम कहा जाता है। बाहर और अंदर के दबाव में अंतर होने पर इस झिल्ली पर खिंचाव पड़ सकता है। इससे सुनने की प्रक्रिया कुछ समय के लिए प्रभावित होती है और कान में अजीब आवाज, भनभनाहट या सीटी जैसी ध्वनि महसूस हो सकती है।
इसे आमतौर पर टिनिटस जैसी अनुभूति से जोड़ा जा सकता है। हालांकि हर व्यक्ति में इसका अनुभव एक जैसा नहीं होता।
फ्लाइट में यह ज्यादा क्यों महसूस होता है?
हवाई जहाज के उड़ान भरने और खासकर नीचे उतरने के दौरान केबिन के दबाव में बदलाव होता है। यही कारण है कि यात्रियों को टेकऑफ या लैंडिंग के समय कान बंद होने या आवाज बदलने की शिकायत हो सकती है।
ऐसे समय पर निगलना, जम्हाई लेना या च्यूइंग गम चबाना कान के अंदर और बाहर के दबाव को संतुल



