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इलेक्ट्रिक कार और स्कूटर खरीदने से पहले जान लें ये जरूरी बात, 45% घर नहीं हैं तैयार

भारत में इलेक्ट्रिक वाहन की बिक्री लगातार बढ़ रही है. हर महीने नई इलेक्ट्रिक कारें, स्कूटर और बाइक लॉन्च हो रही हैं. सरकार भी EV खरीदने को बढ़ावा दे रही है और जगहजगह चार्जिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं. लेकिन एक नई रिपोर्ट ने ऐसा खुलासा किया है, जो EV बाजार की सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है.

इलेक्ट्रिक कार और स्कूटर खरीदने से पहले जान लें ये जरूरी बात, 45% घर नहीं हैं तैयार

एलायंस फॉर एन एनर्जी एफिशिएंट इकोनॉमी और Kazam की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बड़ी समस्या EV की बिक्री नहीं बल्कि घरों में सुरक्षित चार्जिंग की कमी है. रिपोर्ट का कहना है कि देश के ज्यादातर घर अभी इलेक्ट्रिक वाहन को सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से चार्ज करने के लिए तैयार नहीं हैं.

क्यों होती हैं दुर्घटनाएं?

रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहन खरीद लेना ही काफी नहीं है. सबसे जरूरी बात यह है कि क्या आपके घर में ऐसी वायरिंग, बिजली का लोड और चार्जिंग पॉइंट है, जहां वाहन को पूरी रात सुरक्षित तरीके से चार्ज किया जा सके. अगर घर की वायरिंग कमजोर है या पुराने बिजली के सॉकेट इस्तेमाल किए जा रहे हैं, तो आग लगने और बिजली से जुड़ी दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है.

चार्जिंग बड़ी समस्या

रिपोर्ट में बताया गया है कि 2016 में भारत में केवल 50,000 EV बिके थे, जबकि 2025 तक यह संख्या बढ़कर 23 लाख से ज्यादा हो गई. इनमें लगभग 91% हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों की है. यानी सबसे ज्यादा लोग रोजमर्रा के सफर के लिए इलेक्ट्रिक स्कूटर और ईरिक्शा का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसके बावजूद घरों में चार्जिंग की व्यवस्था उतनी तेजी से नहीं बढ़ पाई है.

घर की वायरिंग में करना होगा बदलाव

रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ 55% संभावित EV खरीदारों के घर में चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध है. वहीं लगभग 30% लोगों को EV चार्ज करने से पहले अपने घर की बिजली व्यवस्था में बदलाव करना पड़ेगा. कई लोग मजबूरी में सामान्य बिजली के सॉकेट, एक्सटेंशन बोर्ड या अस्थायी वायरिंग से EV चार्ज करते हैं. रिपोर्ट के अनुसार यह तरीका लंबे समय तक सुरक्षित नहीं माना जाता. इससे आग लगने का खतरा, चार्जिंग में दिक्कत, चार्जर खराब होना और बैटरी की उम्र कम होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

अपार्टमेंट और सोसाइटी में रहने वालों की ये समस्या

सबसे ज्यादा परेशानी अपार्टमेंट, सोसाइटी और किराये के मकानों में रहने वाले लोगों को होती है. रिपोर्ट के अनुसार, भारत के शहरों में 70 से 75 प्रतिशत परिवार फ्लैट या मल्टीस्टोरी बिल्डिंग में रहते हैं. मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में 60 से 80 प्रतिशत लोग अपार्टमेंट में रहते हैं, जहां पार्किंग साझा होती है और बिजली का लोड सीमित होता है. ऐसी जगहों पर EV चार्जर लगाने के लिए अक्सर मकान मालिक, RWA और बिजली विभाग से मंजूरी लेनी पड़ती है. यही प्रक्रिया कई बार लोगों के लिए सबसे बड़ी बाधा बन जाती है.

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