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ललिता हत्याकांड: चंद्रशेखर आजाद ने सरकार को दी खुली चेतावनी, बोले- विधानसभा से संसद तक होगा बड़ा आंदोलन

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का मेरठ इस वक्त राजनितिक अखाड़े में तब्दील हो चुका है. मेरठ के थिरोट गांव की रहने वाली ललिता गौतम की हत्या को लेकर तमाम राजनीतिक दल सूबे की बीजेपी सरकार पर हमलावर हैं. कांग्रेस ने नेताओं को हाउस अरेस्ट करने का आरोप लगाया तो आजाद समाज पार्टी के मुखिया और नगीना से सांसद चंदशेखर भी अपने सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ मेरठ पहुंचे.

ललिता हत्याकांड: चंद्रशेखर आजाद ने सरकार को दी खुली चेतावनी, बोले- विधानसभा से संसद तक होगा बड़ा आंदोलन

हालांकि पुलिस प्रशासन ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए चंदशेखर को सिवाया टोल पर ही रोक दिया. काफी गहमागहमी के बाद ललिता के परिवार को टोल पर ही बुलाकर चंदशेखर से मुलाकात कराया. मुलाकात के बाद सांसद ने यूपी सरकार को 7 दिनों का अल्टीमेटम दिया और मांगे ना माने जाने पर लखनऊ विधानसभा और आगामी लोकसभा सत्र में संसद भवन में धरना प्रदर्शन की चेतावनी दी.

पीड़ित परिवार से की मुलाकात

TV9 भारतवर्ष से बात करते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि पीड़ित परिवार से मुलाकात हुई है. परिवार ने न्याय की मांग की है. हमने परिवार को न्याय दिलाने के लिए उत्तर प्रदेश प्रशासन को 7 दिन का अल्टीमेटम दिया है. अगर मांगे नहीं मानी गई तो निर्णायक लडाई लड़ी जाएगी और अगला प्रदर्शन लखनऊ में होगा. जरुरत पड़ी तो विधानसभा और संसद का घेराव करेंगे. चंद्रशेखर ने कहा कि 7 दिनों में एक्शन नहीं हुआ और अगर मैं जिंदा रहा तो आगामी सत्र में संसद के अंदर आवाज उठाऊंगा और परिसर में धरना प्रदर्शन करूंगा.

क्या है मांगें?

चंद्रशेखर ने कहा कि हमारे एक प्रतिनिधि मंडल ने पीड़ित परिवार के लिए न्याय, 50 लाख का मुआवजा, सरकारी नौकरी, परिवार की सुरक्षा के लिए शहर में रिहैबिलिटेशन और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर एक्शन, अच्छे और उच्च अधिकारियों की देखभाल में जांच और फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामले की सुनवाई की मांग की.

दलितों के खिलाफ बढ़ रहे आपराधिक मामले

चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि देश में लगातर दलितों के खिलाफ आपराधिक मामले बढ़ रहे हैं. NCRB के आंकड़ों के मुताबिक अन्याय और उत्पीड़न के मामले बढ़े हैं. उन्होंने मांग की कि जिन लोगों को बुधवार को धरना प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किया गया, उनको तुरंत रिहा की जाए. साथ ही आरोप लगाया कि ललिता के परिवार पर पहले भी दवाब बनाकर समझौता करवाया गया. 11 मई को भी ललिता ने अनहोनी की आशंका को लेकर चिट्ठी लिखी थी. 15 मई को वो घर से गई और 16 मई को हत्या कर दी गई.

‘मैं बुलडोजर का पक्षधर नहीं हूं’

चंद्रशेखर ने कहा कि जंतरमंतर पर एक विरोध प्रदर्शन चल रहा है. अगर वो बैठ सकते हैं तो हम भी बैठ सकते हैं. इस बार की लड़ाई निर्णायक होगी. एक संसद में और दूसरी लखनऊ में. चंद्रशेखर ने कहा कि कोर्ट में लड़कर ही फांसी की सजा हो सकती है. मुख्यमंत्री भी किसी को फांसी नहीं दे सकते. हां किसी दलित पर गोली तो चलवा सकते हैं. बुलडोजर चलवा सकते हैं. लेकिन मैं बुलडोजर का पक्षधर नहीं हूं. पूरा जीवन लग जाता है घर बनाने में और एक व्यक्ति के अपराध की वजह से पूरे परिवार को सजा नहीं मिलनी चाहिए.

उन्होंने अगर हम इसका समर्थन करेंगे तो कल हमारे बच्चे की ग़लती पर भी हमारे घरों पर बुलडोजर चलेगा. अगर आप लोगों ने मुझे ताकत दी होती तो कोई कप्तान थप्पड़ मार देता? आप लोगों को न्याय के लिए भटकना पड़ता? जितनी ताकत दी उतना मैं लड़ रहा हूं. इस ताकत को बढ़ाना है.

पुलिस ने छावनी में तब्दील कर दिया गांव

वहीं मृतक ललिता गौतम के थिरोट गांव को उत्तर प्रदेश पुलिस ने छावनी में तब्दील कर दिया है. स्थानीय ग्रामीणों के अलावा किसी भी बाहरी व्यक्ति, राजनेता या मीडिया की एंट्री बैन है. तैनात पुलिसकर्मी ने बताया कि गांव और इलाके का माहौल ख़राब ना हो इसलिए बाहरी लोगों की आवाजाही पर रोक लगाई गई है.

क्या है पूरा मामला?

आपको बता दें कि 20 साल की ललिता गौतम टीपी नगर इलाके से 15 मई को गायब हुई थी. परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने जांच में लापरवाही बरती और 17 मई को ललिता का शव रोहटा इलाके से बरामद हुआ. पुलिस ने मृतक के परिजनों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर मुख्य आरोपी को 18 मई को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. साथ ही सबूत मिटाने के आरोपों में एक और आरोपी बाद में पकड़ा गया. लेकिन परिजनों का आरोप है कि मामले में और भी लोग शामिल हैं. उनको भी गिरफ्तार किया जाए.

वहीं इन मांगों को लेकर सैकड़ों लोग कलेक्ट्रेट के बाहर धरना प्रदर्शन करने लगे, प्रदर्शन उग्र होने पर पुलिस ने कार्रवाई की. बुधवार रात 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 6 नामजद और 25 से ज्यादा अज्ञात लोगों पर गैरकानूनी जमावड़ा और रास्ता जाम के आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया.

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