
बेवर क्षेत्र के एक गांव में एक साल पहले दुष्कर्म के बाद गला दबाकर नाबालिग फुफेरी बहन की हत्या करने वाले भाई को न्यायालय द्वारा आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश जहेंद्र पाल सिंह ने दोषी पर दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जबकि साक्ष्य के अभाव में दोषी के पिता सहित दो आरोपितों को बरी कर दिया गया है।
बेवर क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली एक 16 वर्षीय किशोरी कक्षा 11 की छात्रा थी। 15 मई 2025 की सुबह सात बजे के करीब वह घर से स्कूल जाने के लिए निकली थी।
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट ने दोषियों पर लगाया दो लाख जुर्माना
आरोप था कि रास्ते में रिश्ते का भाई करन उर्फ आलोक निवासी नगला मनी थाना नवाबगंज फर्रुखाबाद और मोंटी निवासी प्रेमपुर बेवर बहाना बनाकर किशोरी को अपने साथ ले गए। जहां उसके साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। भेद खुलने के डर से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद करन ने फोन कर अपने पिता जितेंद्र को मौके पर बुला लिया। जहां तीनों ने चुन्नी का फंदा लगाकर किशोरी के शव को गांव कांसेपुर के निकट स्थित गूलर के पेड़ पर लटका दिया।
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दूसरे दिन जितेंद्र ने फोन कर किशोरी के पिता को घटना की सूचना देकर मौके पर बुला लिया। जानकारी करने पर आरोपित लगातार पिता को गुमराह करते रहे। पुलिस ने तीनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर किशोरी के शव का पोस्टमार्टम कराया और विवेचना करने के बाद आरोप पत्र न्यायालय भेज दिया।
एक साल पहले बेवर क्षेत्र के एक गांव में दिया था घटना को अंजाम
मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट के न्यायालय में हुई। जहां सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक शैलेंद्री राजपूत ने वादी, विवेचक, गवाहों की गवाही दिलाकर साक्ष्य प्रस्तुत किए। जिस पर न्यायाधीश जहेंद्रपाल सिंह ने करन उर्फ आलोक को दुष्कर्म के बाद किशोरी को गला दबाकर हत्या किए जाने का दोषी पाया। न्यायालय ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। जबकि साक्ष्य के अभाव में दोषी के पिता जितेंद्र और मोंटी को बरी कर दिया है।
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पीड़ित स्वजन को मिलेगी जुर्माना की राशि
सजा सुनाते हुए पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश जहेंद्र पाल सिंह ने आदेश दिया कि जुर्माना की धनराशि पीड़ित स्वजन को दी जाएगी। दोषी के खिलाफ साबित किए गए अपराध की प्रकृति, अपराध कारित करने की परिस्थितियों और मृतका के स्वजन पर अपराध के कारण हुए मानसिक परिपक्वता पर विचार करने के बाद न्यायालय का मत है कि ये मामला विरलतम से विरल की श्रेणी में नहीं पाया गया। ऐसी स्थिति में उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
दोषी ने भाई-बहन के रिश्ते को भी किया तार-तार
विशेष लोक अभियोजक शैलेंद्री राजपूत ने बताया कि सजा सुनाए जाने के बाद न्यायालय ने आदेश में ये भी लिखा कि दोषी ने ऐसी घटना को अंजाम देकर भाई-बहन के पवित्र रिश्ते भी तार-तार कर न केवल किशोरी की हत्या की, बल्कि उसके साथ बलात्कार एवं विधि विरुद्ध अपराध भी किया है।



