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हिमस्खलन​​​​​​ में बिछड़ गई नन्हीं लू-लू, बर्फीले पहाड़ पर 50 घंटे तक रही अकेली, फिर एक डिवाइस ने जगाई बचने की उम्मीद

हिमस्खलन​​​​​​ में बिछड़ गई नन्हीं लू-लू, बर्फीले पहाड़ पर 50 घंटे तक रही अकेली, फिर एक डिवाइस ने जगाई बचने की उम्मीद

अलास्का, अमेरिका: बर्फ से ढके पहाड़, जमा देने वाली ठंड और चारों तरफ सुनसान इलाका… ऐसे मुश्किल हालात में चार साल की लू-लू करीब 50 घंटे तक अकेली फंसी रही। 10 अक्टूबर, 2026 को चुगाच स्टेट पार्क में आए हिमस्खलन के बाद यह कुत्ता अपने साथ गए पर्वतारोहियों से बिछड़ गया था। दो दिनों से ज्यादा समय तक उसकी तलाश जारी रही और आखिरकार एक छोटी-सी ट्रैकिंग डिवाइस की मदद से उसे खोज निकाला गया।

हिमस्खलन ने पलभर में बदल दिए हालात

लू-लू पूडल और हस्की नस्ल का मिश्रित कुत्ता है। घटना के दिन वह अनुभवी पर्वतारोहियों के साथ चुगाच स्टेट पार्क में मौजूद था। इसी दौरान अचानक हिमस्खलन हुआ, जिसकी चपेट में आने के बाद समूह के लोग पहाड़ से करीब 500 फीट नीचे जा गिरे।

इस हादसे में दो पर्वतारोहियों को गंभीर चोटें आईं, जबकि लू-लू लापता हो गया। बर्फ से ढके दुर्गम इलाके और बेहद कम तापमान के बीच उसके सुरक्षित मिलने की उम्मीद लगातार चुनौतीपूर्ण होती जा रही थी।

प्रेमिका ने शुरू की तलाश, 20 से ज्यादा लोग जुटे

लू-लू के लापता होने की खबर मिलने के बाद घायल पर्वतारोही ब्रायन की प्रेमिका लॉरेन पैडावर ने उसकी तलाश शुरू करवाई। वह खुद खोज अभियान में शामिल नहीं हो सकीं, लेकिन उन्होंने स्थानीय बचाव संगठनों और हाइकिंग समूहों से संपर्क किया।

धीरे-धीरे इस अभियान में 20 से ज्यादा स्वयंसेवक जुट गए। तलाश में एक अन्य कुत्ता भी शामिल था। लॉरेन के लिए यह सिर्फ एक खोज अभियान नहीं, बल्कि अपने पालतू साथी को सुरक्षित वापस पाने की कोशिश थी। उन्होंने कहा कि वह तब तक हार नहीं मानना चाहती थीं, जब तक उन्हें यह भरोसा न हो जाए कि उन्होंने अपनी ओर से हर संभव प्रयास कर लिया है।

Apple AirTag ने दिखाई उम्मीद की राह

इस मुश्किल तलाश के दौरान लू-लू के गले में लगा Apple AirTag काफी अहम साबित हुआ। यह छोटा ट्रैकिंग उपकरण उसके संभावित स्थान का संकेत दे रहा था, लेकिन शुरुआती लोकेशन करीब आधा मील दूर दिखाई दे रही थी। ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों और बर्फीले इलाके के कारण वहां तक पहुंचना आसान नहीं था।

इसके बाद हवाई तलाश की मदद ली गई। पायलट अमांडा बार्कर और डेव बेकेट को एक अन्य AirTag का संकेत मिला। लॉरेन ने भी संभावित जगह की पहचान करने के लिए सैटेलाइट तस्वीरों और नक्शों की तुलना की। इन प्रयासों से तलाश को सही दिशा मिली और आखिरकार लू-लू तक पहुंचने का रास्ता खुला।

50 घंटे बाद पहाड़ की ढलान पर मिला लू-लू

करीब 50 घंटे तक लापता रहने के बाद लू-लू पहाड़ की ढलान पर मिला और उसे सुरक्षित बचा लिया गया। उसकी स्वास्थ्य जांच में पता चला कि उसके पैर की एक उंगली और एक नुकीला दांत टूट गया था। इसके बावजूद वह जीवित था और उसे घर वापस ले जाया गया।

लॉरेन का मानना है कि लू-लू के घने बाल, बाहर सोने की आदत और पहाड़ी रास्तों पर चलने का अनुभव उसे कठिन मौसम में टिके रहने में मददगार रहे होंगे। फिलहाल वह घर पर आराम कर रहा है और उसकी हालत पहले से बेहतर बताई गई है।

मुश्किल हालात में भी नहीं टूटी उम्मीद

लू-लू की कहानी में जहां उसकी सहनशक्ति ने लोगों को हैरान किया, वहीं उसकी तलाश में जुटे स्वयंसेवकों और बचाव दल के प्रयास भी अहम रहे। इस घटना ने यह भी दिखाया कि पालतू जानवरों पर लगाए जाने वाले ट्रैकिंग उपकरण आपात स्थिति में मदद कर सकते हैं। हालांकि, Apple AirTag वास्तविक समय में लगातार GPS ट्रैकिंग करने वाला उपकरण नहीं है; इसकी लोकेशन आसपास मौजूद Apple डिवाइसों और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर कर सकती है।

सत्य रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। घटना और बचाव अभियान से जुड़ी जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।

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