अगर आपका क्रेडिट कार्ड कहीं खो जाए और उसके बाद कोई व्यक्ति उससे ऐसा ट्रांजैक्शन कर दे, जो आपने नहीं किया है, तो सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि उस रकम का भुगतान कौन करेगा, आप या बैंक? इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि आपने ट्रांजैक्शन की जानकारी बैंक को कितनी जल्दी दी और कार्ड कब ब्लॉक कराया.

क्रेडिट कार्ड खोने की स्थिति में सबसे पहला काम कार्ड को तुरंत ब्लॉक करना होना चाहिए. अगर आपको सिर्फ शक है कि कार्ड कहीं गिर गया है, तब भी उसे कुछ समय के लिए फ्रीज कर देना बेहतर है. आजकल लगभग सभी बैंक अपने मोबाइल ऐप, वेबसाइट या हेल्पलाइन के जरिए कार्ड को तुरंत बंद करने की सुविधा देते हैं.
कार्ड खोने के बाद ट्रांजैक्शन हो गया तो क्या पैसे देने होंगे?
किसी फ्रॉड ट्रांजैक्शन की जिम्मेदारी हमेशा कार्डधारक की नहीं होती. यह इस बात पर निर्भर करती है कि फ्रॉड किस वजह से हुआ और ग्राहक ने बैंक को कितनी जल्दी इसकी जानकारी दी. अगर कार्ड खोने की जानकारी बैंक को दे दी गई है और कार्ड ब्लॉक हो चुका है, तो उसके बाद होने वाले किसी भी ट्रांजैक्शन की जिम्मेदारी आमतौर पर बैंक की होती है. लेकिन कार्ड ब्लॉक कराने से पहले हुए ट्रांजैक्शन के मामले में RBI के नियम और बैंक की ग्राहक सुरक्षा नीति लागू होती है.
3 कामकाजी दिनों के अंदर शिकायत करने पर जीरो लायबिलिटी
RBI के नियमों के मुताबिक, अगर अट्रांजैक्शन बैंक की गलती, लापरवाही या कमी के कारण हुआ है, तो ग्राहक की जिम्मेदारी नहीं होती है. इसके अलावा, अगर पेमेंट सिस्टम में किसी तीसरे पक्ष की वजह से सेंध लगी है और इसमें न तो बैंक की गलती है और न ग्राहक की, तब भी ग्राहक की जिम्मेदारी नहीं हो सकती है. इसके लिए ग्राहक को बैंक से ट्रांजैक्शन की सूचना मिलने के 3 कामकाजी दिनों के अंदर इसकी जानकारी देनी होती है.
यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है. ये 3 दिन कार्ड खोने की तारीख से नहीं गिने जाते. बैंक से अनधिकृत ट्रांजैक्शन की सूचना मिलने के बाद की समयसीमा महत्वपूर्ण होती है. अगर ग्राहक 3 कामकाजी दिनों के अंदर शिकायत नहीं करता और शिकायत 4 से 7 कामकाजी दिनों के बीच करता है, तो कुछ मामलों में ग्राहक की जिम्मेदारी तय सीमा तक हो सकती है.
कार्ड खोते ही क्या करें?
सबसे पहले बैंक के आधिकारिक ऐप, वेबसाइट या हेल्पलाइन से कार्ड को ब्लॉक करें. इसके बाद हाल के सभी ट्रांजैक्शन चेक करें. जो ट्रांजैक्शन आपने नहीं किए हैं, उन्हें तुरंत फ्रॉड के रूप में रिपोर्ट करें. बैंक से मिली शिकायत संख्या, शिकायत की तारीख और समय का रिकॉर्ड जरूर रखें. अगर कार्ड चोरी हुआ है तो पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराएं. फाइनेंशियल फ्रॉड होने पर 1930 पर तुरंत कॉल किया जा सकता है और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर पर भी शिकायत दर्ज की जा सकती है.



