Satya Report: मई महीने की शुरुआत के पहले ही दिन रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी हो गई. कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 993 रुपये और 5 किलो वाले सिलेंडर में 261 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. कुछ समय पहले डोमेस्टिक एलपीजी सिलेंडर के दाम भी बढ़ाए गए थे. ईरान और इजराइलअमेरिका की जंग के बीच पैदा हुए गैस संकट के बाद सरकार ने ऐलान किया था कि भारत में जितनी भी गैस की जरूरत है उसकी 60 फीसदी तक गैस देश में बनाई जा रही है. पहले यह आंकड़ा 40 फीसदी था.

अब गैस के दामों में बढ़ोतरी के बीच सवाल उठता है कि भारत में कहां है एलपीजी के प्रोडक्शन का गढ़ और कौनकौन से राज्य इसे बनाने में सबसे आगे हैं.
भारत में LPG का गढ़
गैस संकट के बाद सरकार ने देश में ही इसका प्रोडक्शन बढ़ाने का फैसला लिया. नए सरकारी आंकड़े बताते हैं कि 202526 में पूरे साल में एलपीजी की खपत 33.21 मिलियन टन रही. भारत में एलपीजी की जरूरत का सबसे बड़ा हिस्सा कतर से आता है. इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका वो देश हैं जहां से भारत गैस आयात करता है.
रिलायंस का गुजरात स्थित एलपीजी प्लांट.
भारत के कुछ चुनिंदा राज्यों के शहरों में ही LPG का प्रोडक्शन होता है. इसमें वडोदरा, मथुरा, पानीपत और हल्दिया हैं. लेकिन गुजरात ही वो राज्य है जो इस मामले में सबसे आगे है. गुजराज के जामनगर को सबसे बड़ा एलपीजी प्रोड्यूसर कहा जाता है. रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड का विश्व का सबसे बड़ा रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स जामनगर में है. यह रिफाइनरी पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के साथसाथ बड़ी मात्रा में एलपीजी का उत्पादन करती है. यही वजह है कि जामनगर भारत का एनर्जी सेंटर बन गया है.
एलपीजी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस से बनाई जाती है.
कैसे बनती है एलपीजी?
एलपीजी को दो तरह से बनाया जाता है. पहली, कच्चे तेल को प्यूरीफाय करके और दूसरी, प्राकृतिक गैस की प्रॉसेसिंग से. जब कच्चे तेल को गर्म किया जाता है तो उससे कई अलगअलग प्रोडक्ट बनते हैं. एलपीजी उसी दौरान बनती है. इसे इकट्ठा करके टैंकों में स्टोर किया जाता है और फिर सिलेंडरों में भरकर उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाता है.
भारत में एलपीजी का इस्तेमाल सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है. इसका उपयोग रेस्तरां, होटल, उद्योगों और वाहनों में भी होता है. बहुत कम प्रदषूण होने के चलते इसे दूसरे पारंपरिक ईंधनों की तुलना में अधिक सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल माना जाता है.
देश में कितनी खपत?
इस साल जनवरी में एलपीजी की खपत 3.012 मीट्रिक टन और फरवरी में 2.822 मीट्रिक टन थी, जो मार्च में घटकर 2.379 मीट्रिक टन रह गई, यानी जनवरी की तुलना में 26.6% की गिरावट आई. मौजूदा दौर में एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित हो रही है. घरेलू उपयोग के लिए एलपीजी की आपूर्ति को प्राथमिकता दी गई है. सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, एलपीजी वितरकों से एलपीजी की कमी की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है. पिछले हफ्ते एलपीजी सिलेंडर बुकिंग में 98% की वृद्धि हुई. हेराफेरी रोकने के लिए डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड आधारित डिलीवरी में 94% से अधिक की बढ़ोतरी हुई है. डीएसी उपभोक्ता के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर प्राप्त होता है.
छापेमारी जारी
एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए देशभर में अभियान जारी हैं. 28 अप्रैल देशभर में 2200 से अधिक छापे मारे गए. सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के तेल और गैस निगमों ने अचानक निरीक्षण बढ़ा दिए हैं. 28 अप्रैल तक 325 एलपीजी वितरकों पर जुर्माना लगाया गया है और 72 एलपीजी वितरकों को निलंबित कर दिया गया है. कल 54 एलपीजी वितरकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए और 9 वितरकों पर जुर्माना लगाया गया.



