
लखनऊ। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने राजधानी के अमीनाबाद पुलिस चौकी को कथित अवैध निर्माण बताते हुए उसे हटाने अथवा ध्वस्त करने के अनुरोध वाली जनहित याचिका में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि पुलिस चौकी क्षेत्र के लोगों की सुरक्षा और सुविधा के लिए होती है, पुलिसकर्मियों के निजी उपयोग के लिए नहीं, ऐसे में मौजूदा परिस्थितियों में चौकी को ध्वस्त करने का आदेश देना उचित नहीं होगा।
सुनवाई के दौरान याची ने बताया था अवैध निर्माण
न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजिव शुक्ला की पीठ ने एम एल यादव की जनहित याचिका पर यह आदेश दिया। सुनवाई के दौरान याची ने कहा कि अमीनाबाद पुलिस चौकी का निर्माण अवैध तरीके से किया गया है और इसे हटाया जाना चाहिए। इसके लिए किसी अन्य उपयुक्त भूमि का अधिग्रहण कर पुलिस चौकी का निर्माण किया जा सकता है।
‘भूमि अधिग्रहण कहना आसान, करना मुश्किल’
अदालत ने कहा कि अमीनाबाद अत्यंत भीड़भाड़ वाला और घनी आबादी वाला क्षेत्र है, वहां शायद ही कोई ऐसी खाली जमीन उपलब्ध हो, जहां नयी पुलिस चौकी का निर्माण किया जा सके। अदालत ने कहा कि उपयुक्त भूमि के अधिग्रहण की बात कहना जितना आसान है, उसे व्यवहार में लाना उतना ही कठिन है।
पीठ ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में यदि वहां पुलिस चौकी का निर्माण किया गया है तो यह ऐसा मामला नहीं है जिसमें अदालत उसके ध्वस्तीकरण का आदेश दे। अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस चौकी क्षेत्र के लोगों के हित में ही कार्य करती है।
पुलिस आयुक्त के सामने दे सकेंगे प्रत्यावेदन
हालांकि, अदालत ने याची को पुलिस आयुक्त, लखनऊ के समक्ष प्रत्यावेदन देने की छूट दी है। अदालत ने कहा कि यदि पुलिस चौकी को वर्तमान स्थान से किसी अन्य उपलब्ध स्थान पर स्थानांतरित करना संभव हो तो इस विकल्प पर विचार किया जा सकता है।



