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Luminetta Solar Car: स्टूडेंट्स ने बनाई ऐसी सोलर कार, जितनी बिजली खर्च करेगी उससे ज्यादा बनाएगी

   नई दिल्ली
Luminetta Solar Car: कल्पना कीजिए, आप रोज इलेक्ट्रिक कार से ऑफिस जाते हैं और कार को चार्ज करने के लिए बारबार चार्जिंग स्टेशन जाने की जरूरत ही न पड़े. इतना ही नहीं, दिनभर चलने के बाद कार जितनी बिजली खर्च करे, उससे ज्यादा एनर्जी कार खुद पैदा कर दे. सुनने में यह किसी साईफाई फिल्म की कहानी जैसी लगती है, लेकिन अमेरिका की  क्लमेसन यूनिवर्सिटी और BMW की रिसर्च टीम ने ऐसी ही एक इलेक्ट्रिक कार का प्रोटोटाइप तैयार किया है. इस कार को Deep Orange 17 Luminetta नाम दिया गया है। 

यह एक दो दरवाजों वाली इलेक्ट्रिक कूपे है, जिसे ट्रेडिशनल कारों से थोड़ा अलग हटकर डिजाइन किया गया है. खास बात यह है कि इसमें सोलर पावर को सिर्फ कार की बैटरी को चार्ज करने के लिए नहीं बल्कि एक्स्ट्रा इलेक्ट्रिसिटी बैकअप के तौर पर तैयार किया गया है. दावा किया जा रहा है कि, इस कार को चलने के लिए जितनी बिजली की जरूरत होगी, ये उससे कहीं ज्यादा इलेक्ट्रिसिटी जेनरेट करेगी. यानी कार का पावर सिस्टम का अहम हिस्सा बनाया गया है। 

छाए में भी चार्ज होगी कार
कार की बॉडी पर 1,700 से ज्यादा फोटोवोल्टिक सेल लगाए गए हैं. ये सेल कार के बाहर लगे पैनलों में ही शामिल किए गए हैं. यानी कार सड़क पर चल रही हो या पार्किंग में खड़ी हो, सूरज की रोशनी मिलने पर ये सेल बिजली बनाने का काम करते रहेंगे. इस कार में लगाए गए सोलर पैनल फ़्रॉनहोफ़र इंस्टीट्यूट फ़ॉर सोलर एनर्जी सिस्टम्स के सहयोग से डेवलप किया गया है. इन पैनलों की खासियत यह है कि अगर इनका कुछ हिस्सा छाया में आ जाए, तब भी ये बिजली बना सकते हैं. यानी यदि इन्हें सीधे धूप नहीं भी मिलती है तो भी कुछ पैनल्स इलेक्ट्रिसिटी जेनरेट करने में सक्षम होंगे। 

BMW के रिसर्च एंड न्यू टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट मैनेजर स्टेफन आगस्टिन ने कहा कि यह ऐसा प्रोजेक्ट था, जिस पर टीम कई साल से काम करना चाहती थी. उनके मुताबिक पिछले दो साल में छात्रों की टीम ने कई तकनीकी चुनौतियों से निपटते हुए आखिरकार ऐसी कार तैयार की है, जो जरूरत से ज्यादा ऊर्जा पैदा करने में सक्षम है। 

सोलर सेल को सुरक्षित रखने के लिए इनके ऊपर एक मजबूत फिल्म लगाई गई है. कार की बॉडी को एक अलग तरह का रंग भी दिया गया है, जिसे लेजर मैन्युफैक्चरिंग तकनीक की मदद से तैयार किया गया है. इससे कार का डिजाइन भी अलग नजर आता है और सोलर सेल को सेफ्टी भी मिलती है। 

अलगअलग शहरों के मुताबिक टेस्टिंग 
इस कार की क्षमता को समझने के लिए छात्रों ने अमेरिका के ग्रीनविले के अलावा फ्रैंकफर्ट, मैड्रिड और मुंबई जैसे शहरों में सूरज की रोशनी की उपलब्धता का सिमुलेशन किया. इसके बाद 20 किलोमीटर के रोजाना सफर को बेस बनाया गया. इस टेस्ट के मुताबिक ये कार अलगअलग शहरों में औसतन करीब 50 किलोमीटर की एक्स्ट्रा ड्राइविंग रेंज के बराबर सौर ऊर्जा पैदा कर सकती है. यानी रोजमर्रा के छोटे सफर में कार जितनी ऊर्जा इस्तेमाल करती है, उसके मुकाबले यह ज्यादा सौर ऊर्जा पैदा करने की क्षमता रखती है। 

यही वजह है कि इसे एनर्जीपॉजिटिव व्हीकल भी कहा जा रहा है. आसान भाषा में समझें तो कार सिर्फ बिजली खर्च करने वाली मशीन नहीं है, बल्कि रियल कंडिशन में बिजली पैदा करने वाला प्लेटफॉर्म भी बन सकती है। 

बॉक्सफिश से इंस्पायर्ड डिजाइन
कार का डिजाइन काफी यूनिक है. डेवलपमेंट टीम का कहना है कि इस कार का डिजाइन बॉक्सफिश से इंस्पायर्ड है. ये डिजाइन एयर प्रेशर को कम करने में मदद करता है. कम एयरोडायनामिक ड्रैग का सीधा फायदा कार की रेंज पर पड़ता है. कार को हवा को चीरकर आगे बढ़ने में कम एनर्जी खर्च करनी पड़ती है. साथ ही डिजाइन ऐसा रखा गया है कि अंदर बैठने वालों के लिए पर्याप्त जगह बनी रहे। 

इस इलेक्ट्रिक कार में रीजनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम दिया गया है. जब कार धीमी होती है या ब्रेक लगाती है, तब सामान्य तौर पर जो एनर्जी हीट के रूप में बर्बाद हो जाती है, उसे रीजनरेट कर एनर्जी बनाई जा सकती है. इसके अलावा कार में इंटेलिजेंट टॉर्क डिस्ट्रीब्यूशन और खास ड्राइवट्रेन कंट्रोल सिस्टम भी दिए गए हैं. ये सिस्टम कार की जरूरत के हिसाब से पावर का इस्तेमाल करने और एनर्जी को बेहतर तरीके से बचाने में मदद करते हैं। 

हाईटेक केबिन
कार का का इंटीरियर भी काफी मॉडर्न है. इसमें कस्टम ह्यूमनमशीन इंटरफेस दिया गया है, जो कार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी रियल टाइम में स्क्रीन पर दिखाता है. इसके अलावा कार में एप्पल कार प्ले और एंड्रॉयड ऑटो कनेक्टिविटी भी दी गई है. यानी एक फ्यूचरिस्टिक सोलर इलेक्ट्रिक कार होने के साथसाथ इसे डेली लाइफ के इस्तेमाल और कनेक्टेड ड्राइविंग को ध्यान में रखकर भी तैयार किया गया है। 

बेहद हल्की है ये इलेक्ट्रिक कार
इस कार की एक और बड़ी खासियत
इसका वजन है. इस प्रोटोटाइप का वजन सिर्फ 550 किलोग्राम यानी करीब 1,212 पाउंड है. यह सामान्य प्रोडक्शन कारों के मुकाबले लगभग एकचौथाई वजन है. कम वजन रखने के लिए कार के चेसिस में अलगअलग तरह की मैटेरियल का इस्तेमाल किया गया है. इसमें सेफ्टी के लिए स्ट्रक्चरल स्टील के साथ एल्युमिनियम, कार्बन फाइबर स्ट्रक्चरल पार्ट्स और 3D प्रिंटेड मेटल जॉइंट्स का इस्तेमाल किया गया है. इसका मकसद कार को मजबूत रखने के साथसाथ उसका वजन कम करना है। 

बाजार में कब आएगी कार
Deep Orange 17 अभी एक प्रोटोटाइप है. फिलहाल ये नहीं कहा जा सकता है कि, ये कार सीधे तौर पर बाजार में उतारी जाएगी या नहीं. लेकिन ये कार इतना जरूर बताती है कि, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को किस तरह नई दिशा दी जा सकती है. सोलर पैनल, बेहद हल्का चेसिस, एयरोडायनामिक डिजाइन और एनर्जी को रिकवर करने वाली तकनीक को एक साथ जोड़कर यह दिखाने की कोशिश की गई है कि भविष्य की इलेक्ट्रिक कारें सिर्फ बैटरी की एनर्जी पर निर्भर नहीं रहेंगी। 

अगर सोलर तकनीक, हल्के मटेरियल और बेहतर एनर्जी मैनेजमेंट को बड़े पैमाने पर व्यावहारिक बनाया जा सका, तो आने वाले समय में कार को चार्ज करने की जरूरत कम हो सकती है. ये कार इसी भविष्य की एक झलक है, जहां कार सड़क पर चलने के साथसाथ खुद के लिए एनर्जी भी तैयार कर सकती है। 

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