
NEET UG 2026 Re-examination Center 2026 burqa controversy: राजस्थान के अजमेर में नीट मेडिकल प्रवेश परीक्षा के केंद्र पर बुर्का पहनकर आई एक छात्रा को प्रवेश देने से कथित तौर पर इनकार कर दिया गया. ब्यावर से आई छात्रा कुलसुम बानो ने परीक्षा केंद्र के बाहर हंगामा करते हुए कहा कि उसके लिए परीक्षा से ज्यादा उसका बुर्का और पहचान मायने रखती है.
अजमेर. ‘मेरे लिए नीट पेपर मैटर नहीं करता, मेरे लिए मेरी पहचान,बुर्का मैटर करता है.’ यह बयान उस नीट छात्रा की है, जिसको अजमेर में एक NEET परीक्षा केंद्र के अंदर जाने से रोक दिया गया. इस लड़की की शिकायत है कि पहले जब नीट एग्जाम हुआ था तो वह बुर्के में ही परीक्षा दी थी. लेकिन अब उन्हें बुर्का उतारने के लिए बोला जा रहा है. बता दें देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट के आयोजन के दौरान राजस्थान के अजमेर से एक बेहद संवेदनशील और विवादित मामला सामने आया है. यहां के एक परीक्षा केंद्र पर बुर्का पहनकर आई एक मुस्लिम छात्रा को कथित तौर पर सुरक्षा जांच के नाम पर एंट्री देने से रोक दिया गया. इसके बाद केंद्र के बाहर भारी हंगामा खड़ा हो गया. छात्रा ने सुरक्षाकर्मियों और केंद्र प्रशासन पर धार्मिक पहचान के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए परीक्षा देने से साफ इनकार कर दिया.
यह घटना अजमेर संभाग के एक परीक्षा केंद्र की है, जहां ब्यावर से नीट की परीक्षा देने पहुंची छात्रा कुलसुम बानो को एंट्री गेट पर ही रोक दिया गया. परीक्षा केंद्र के बाहर मीडिया से बात करते हुए कुलसुम बानो का गुस्सा फूट पड़ा. उसने केंद्र के सुरक्षाकर्मियों और कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए अपनी आपबीती सुनाई. उसने कहा- ‘मैं ब्यावर से नीट का एग्जाम देने यहां आई हूं. जब मैंने इससे पहले 3 मई को परीक्षा दी थी, तब भी मैं इसी पहनावे में थी. बुर्का और दुपट्टा पहने हुए. उस समय मुझे कोई दिक्कत नहीं हुई. लेकिन आज यहां पहले मुझसे कहा गया कि एंट्री के लिए दुपट्टा हटाना होगा. जब मैंने विरोध किया, तो उन्होंने जिद पकड़ ली कि मुझे बुर्का भी उतारना पड़ेगा.’
‘एग्जाम मायने नहीं रखता, बुर्का और पहचान जरूरी है’
छात्रा ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की गाइडलाइंस का हवाला देते हुए कहा कि जब एनटीए (NTA) ने हमें नियमानुसार सांस्कृतिक या धार्मिक पोशाक में आने की अनुमति दी है, तो ये स्थानीय लोग हमें कैसे रोक सकते हैं? कुलसुम बानो ने परीक्षा केंद्र के अधिकारियों के सामने झुकने से साफ मना कर दिया. उसने भावुक होते हुए कहा कि वह अपनी धार्मिक पहचान और गरिमा के साथ किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगी. छात्रा ने नाराजगी जताते हुए आगे कहा, ‘यह बेहद शर्मनाक है कि वे इस तरह से 18 साल के बच्चों के भविष्य और उनकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. अगर वे मुझे मेरे इस पहनावे में अंदर नहीं जाने देंगे, तो मैं परीक्षा ही नहीं दूंगी.’
एनटीए (NTA) का ‘ड्रेस कोड’ नियम क्या कहता है?
इस पूरे विवाद के बीच एनटीए की आधिकारिक गाइडलाइंस को समझना जरूरी है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के नियमों के मुताबिक, नीट परीक्षा के लिए एक सख्त ड्रेस कोड लागू होता है ताकि किसी भी तरह की नकल या अनुचित साधनों को रोका जा सके. हालांकि, नियमों में एक विशेष प्रावधान भी है.
सांस्कृतिक/धार्मिक पोशाक (Customary Dress): यदि कोई उम्मीदवार अपनी धार्मिक मान्यताओं के कारण पारंपरिक या विशेष पोशाक (जैसे बुर्का, हिजाब, सिख कड़ा या कृपाण) पहनकर परीक्षा देना चाहता है, तो उसे इसकी अनुमति होती है.
शर्त: ऐसे उम्मीदवारों को परीक्षा शुरू होने से कम से कम एक या दो घंटे पहले केंद्र पर रिपोर्ट करना होता है, ताकि उनकी गहन और उचित सुरक्षा जांच की जा सके.
अजमेर के इस केंद्र पर हुआ विवाद इसी नियम की व्याख्या और स्थानीय स्तर पर सुरक्षाकर्मियों के रवैये को लेकर उपजा है. जहां छात्रा का कहना है कि वह जांच के लिए तैयार थी लेकिन कपड़े उतरवाने की जिद गलत थी, वहीं केंद्र प्रशासन का तर्क है कि वे केवल पारदर्शी सुरक्षा नियमों का पालन कर रहे थे. इस घटना के बाद इलाके के सामाजिक और राजनीतिक हल्कों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं.



