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महर्षि महेश योगी फाउंडेशन जमीन घोटाले की जांच करेगी SIT, सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव की देखरेख में एक विशेष जांच दल गठित करने का आदेश दिया है. यह दल स्पिरिचुअल रीजनरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया की जमीनों की कथित धोखाधड़ी से हुई बिक्री की जांच करेगा. कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस अंतरिम निर्देश को रद्द कर दिया है, जिसमें पुलिस को इस मामले में चार्जशीट दाखिल करने से रोक दिया गया था.

महर्षि महेश योगी फाउंडेशन जमीन घोटाले की जांच करेगी SIT, सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश
महर्षि महेश योगी फाउंडेशन जमीन घोटाले की जांच करेगी SIT, सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश

जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच ने कहा कि हालांकि कार्यवाही लंबित रहने के दौरान किसी आरोपी को दंडात्मक कार्रवाई से बचाने के लिए अदालत विवेक का प्रयोग कर सकती है, लेकिन जांच एजेंसी को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 193 के तहत पुलिस रिपोर्ट दाखिल न करने का निर्देश देना इस मामले के तथ्यों के आधार पर अनुचित था.

क्या है ट्रस्ट से जुड़ा विवाद?

यह फाउंडेशन ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन और आध्यात्मिक पुनरुद्धार के लिए जाना जाता है. इसके संस्थापक महर्षि महेश योगी की मृत्यु के बाद इसमें आंतरिक गुटबाजी शुरू हुई, जिसमें दो राइवल अजय प्रकाश श्रीवास्तव और चंद्र मोहन से जुड़े समूह सोसाइटी के नियंत्रण और जमीनों पर दावा करने लगे.

नतीजा यह हुआ कि फर्जी दस्तावेजों, जाली पावर ऑफ अटॉर्नी और फर्जी रिकॉर्ड के जरिए सोसाइटी की फ्री होल्ड जमीनें करोड़ों रुपये में बेच दी जा रही हैं, जो सोसाइटी के मूल उद्देश्यों के पूरी तरह खिलाफ है.

क्या है स्पिरिचुअल रीजनरेशन मूवमेंट फाउंडेशन?

स्पिरिचुअल रीजनरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया इन दिनों अपनी जमीनों की अवैध बिक्री को लेकर चर्चाओं में बना हुआ है. इस फाउंडेशन की शुरुआत महर्षि महेश योगी द्वारा 1963 में की गई थी. इस फाउंडेशन का मकसद लोगों को ट्रांसेंडेंटल मेडिटेशन सिखाकर आंतरिक शांति, तनाव मुक्ति, मानसिकशारीरिक स्वास्थ्य और विश्व शांति को बढ़ावा देना है.

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