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महाराष्ट्र: एशिया के सबसे बड़े गोला-बारूद डिपो (CAD) में बड़ी वारदात, मेजर ने जेसीओ पर चलाईं ताबड़तोड़ गोलियां

नागपुर। महाराष्ट्र के वर्धा जिले में स्थित पुलगांव सेंट्रल एमुनेशन डिपो से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलगांव पुलिस स्टेशन में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, सेना के एक कमीशंड अधिकारी मेजर मनन तिवारी ने शुक्रवार सुबह बेस पर अभ्यास फायरिंग सत्र के दौरान अपने जूनियर को बिल्कुल नजदीक से 5.56mm इंसास असॉल्ट राइफल से गोली मार दी। इस हमले में जूनियर कमीशंड अधिकारी की मौके पर ही मौत हो गई।

महाराष्ट्र: एशिया के सबसे बड़े गोला-बारूद डिपो (CAD) में बड़ी वारदात, मेजर ने जेसीओ पर चलाईं ताबड़तोड़ गोलियां
महाराष्ट्र: एशिया के सबसे बड़े गोला-बारूद डिपो (CAD) में बड़ी वारदात, मेजर ने जेसीओ पर चलाईं ताबड़तोड़ गोलियां

एक के बाद एक मारीं 15 गोलियां, उड़ा सिर

पुलगांव डिपो को एशिया का सबसे बड़ा गोलाबारूद डिपो माना जाता है। एफआईआर में दर्ज एक प्रत्यक्षदर्शी के बयान के मुताबिक, मेजर मनन तिवारी ने अपने अभ्यास राउंड पूरे कर लिए थे। इसके बाद वह अचानक मुड़े और सूबेदार मेजर ओम बहादुर खांड पर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं, जो उस समय बेस पर खाली कारतूस इकट्ठा कर रहे थे।

शीर्ष पुलिस सूत्रों के मुताबिक, बर्स्ट फायर के कारण सूबेदार खांड को कम से कम 15 गोलियां लगीं, जिससे उनके सिर के परखच्चे उड़ गए और वह वहीं जमीन पर गिर गए।

मेजर सेना की हिरासत में

फायरिंग रेंज पर मौजूद अन्य सैनिकों ने तुरंत मुस्तैदी दिखाते हुए मेजर तिवारी को पकड़ लिया। फिलहाल मेजर सेना की हिरासत में है और बाद में उसे वर्धा पुलिस को सौंप दिया जाएगा। एक शीर्ष पुलिस अधिकारी ने बताया कि शुरुआत में पुलिस टीम को जांच के लिए सीएडी परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया गया था।

यह एफआईआर सीएडी में ही तैनात लांस नायक बीर सिंह धामी के बयान के आधार पर दर्ज की गई है। प्रत्यक्षदर्शी धामी ने पुलिस को बताया कि वह सूबेदार मेजर खांड की हत्या के पीछे की वजह से अनजान हैं।

सेना ने बताया ‘हादसा’

नागपुर में सेना के प्रवक्ता ग्रुप कैप्टन आर. कन्नन ने जेसीओ की मौत की पुष्टि की है। हालांकि, उन्होंने इसे नियमित फायरिंग अभ्यास के दौरान हुआ एक ‘हादसा’ करार दिया है। उन्होंने कहा, “सेना और वर्धा पुलिस मिलकर इस मामले की जांच कर रही हैं।”

डिफेंस सिक्योरिटी कोर में तैनात थे खांड

मृतक ओम बहादुर खांड डिफेंस सिक्योरिटी कोर में तैनात थे। यह ऐसी कोर है जहां सेवानिवृत्त सैन्यकर्मियों को दोबारा रोजगार दिया जाता है। डीएससी इकाइयां सीएडी जैसे संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठानों की रखवाली करती हैं। पुलगांव सीएडी में ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों से आने वाले विभिन्न कैलिबर के गोलाबारूद का रखरखाव होता है, जिसे बाद में सेना की अन्य इकाइयों को सप्लाई किया जाता है।

पुलगांव डिपो में पहले भी हो चुके हैं हादसे

पुलगांव का यह सेंट्रल एमुनेशन डिपो पहले भी बड़े हादसों का गवाह रहा है:

  • साल 2016: एंटीटैंक माइंस वाले एक ढांचे में हुए भीषण विस्फोट में लेफ्टिनेंट कर्नल रैंक के एक अधिकारी सहित 18 लोगों की जान चली गई थी।
  • अन्य घटना: इसके बाद पुराने बमों को निष्क्रिय करने के एक अभ्यास के दौरान भी कई मजदूरों की मौत हो गई थी।

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